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दाउद के भाई को सरेआम मारा, ग्रेजुएशन के बाद जुर्म की दुनिया में आए मान्या सुर्वे की कहानी फिल्मों में आई नजर

सजा सुनाए जाने के बाद मान्या सुर्वे पुणे की यरवदा जेल में गया। हालांकि जेल के अंदर वो और भी खतरनाक हो गया। उसने जेल के अंदर कुछ कैदियों की पिटाई कर दी और फिर वो जेल में एक कुख्यात के नाम से मशहूर हो गया।

crime, crime newsमुंबई में इस गैंगस्टर के नाम की तूती बोलती थी।

सभी जानते हैं कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम देश का दुश्मन नंबर वन है और मुल्क की पुलिस उसे बेसब्री से तलाश रही है। लेकिन आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे माफिया कि जो किसी समय दाउद इब्राहिम का नंबर वन दुश्मन हुआ करता था। वर्ष 1970 और 80 के दशक में मुंबई में मान्या सुर्वे की धौंस चलती थी। मुंबई के कई इलाकों में लोग उसके नाम से खौफ खाते थे। यहां तक कि दाउद भी इस गैंगस्टर को मारने की प्लानिंग ही बनाता रहा लेकिन वो उसका कुछ भी ना बिगाड़ सका।

मान्या सुर्वे का असली नाम मनोहर अर्जुन सुर्वे है। मुंबई में ही पले-बढ़े मनोहर अर्जुन सुर्वे ने अपना ग्रेजुएशन (बीए) कीर्ति कॉलेज से किया था। कहा जाता है कि ग्रेजुएशन के बाद ही मान्या सुर्वे अपराध की दुनिया में उतरा और फिर उसने इस काम में अपने कॉलेज के कई साथियों को भी शामिल कर लिया। बताया जाता है कि मन्या को अपराध की दुनिया में उसका सौतेला भाई भार्गव दादा लाया। भार्गव और उसके दोस्त मन्या पोधाकर के साथ मिलकर मान्या सुर्वे ने सन 1969 में दांदेकर नाम के एक शख्स का मर्डर किया था। इस कत्ल में उसकी गिरफ्तारी हुई, मुकदमा चला और उम्र क़ैद की सजा हुई।

जेल में बना कुख्यात

सजा सुनाए जाने के बाद मान्या सुर्वे पुणे की यरवदा जेल में गया। हालांकि जेल के अंदर वो और भी खतरनाक हो गया। उसने जेल के अंदर कुछ कैदियों की पिटाई कर दी और फिर वो जेल में एक कुख्यात के नाम से मशहूर हो गया। जेल में उसकी उदंडता को देखते हुए बाद में उसे रत्नागिरी जेल में शिफ्ट कर दिया गया। इस जेल में मान्या सुर्वे ने भूख हड़ताल कर दिया और इस दौरान उसने जेल में रहकर अपराध से जुड़े कई नोबल भी पढ़े।

पुलिस को चकमा देकर हुआ फरार

14 नवंबर 1979 को वह पुलिस को चकमा देकर अस्पताल से भाग निकला। मुंबई में उसने अपने गैंग को फिर से खड़ा किया, कई बड़े गैंगस्टर और उस दौर के कुख्यात रॉबर भी इस गैंग में शामिल हुए। मान्या सुर्वे के बारे में बताया जाता है कि मुंबई में अपराध की दुनिया में उतरने के बाद उसने एक शक्तिशाली गैंग बनाया। इसमें उसके 2 पार्टनर थे। धारावी के रहने वाले शेख मुनीर और डोंभीवली के विष्णु पाटिल को मान्या सुर्वे को सबसे करीबी सहयोगियों में गिना जाता है। साल 1980 में उसके गैंग में एक और कुख्यात गैंगस्टर उदय शामिल हो गया।

लूट की वारदात को भी दिया अंजाम

बताया जाता है कि इस गैंग ने सबसे पहले 5 अप्रैल 1980 को लूट की वारदात को अंजाम दिया। इस दौरान इन्होंने एक एंबेस्डर कार चुराई। बाद में इसी कार के जरिए एक अन्य लूट को भी अंजाम दिया गया। 30 अप्रैल को उन्होंने शेख मुनीर के दुश्मन शेख अजीज की हत्या कर दी। कहा जाता है कि मान्या सुर्वे और उसके गैंग ने एक पुलिस कॉन्स्टेबल की हत्या भी की थी।

दाउद के भाई को मारा

इसके बाद इस गैंग ने चोरी-डकैती से लेकर कई तरह की वारदातों को अंजाम दिया। मन्या सुर्वे की दहशत बढ़ी, मुंबई में कानून व्यवस्था पर सवाल उठे और पुलिस की कार्यशैली पर उंगलियां उठने लगीं। 1970 से 80 के दशक में मान्या सुर्वे मुंबई का सबसे पावरफुल गैंगस्टर था। उस वक़्त हर जगह सिर्फ मान्या का खौफ था। लोगों के बीच उसका डर फैला हुआ था। मान्या सुर्वे असल में दाऊद इब्राहिम और उसके बड़े भाई सबीर इब्राहिम का सबसे बड़ा दुश्मन था। मान्या ने दाऊद और अफगानी माफिया के खिलाफ लंबे समय तक लड़ाई लड़ी थी।

मुंबई के गैंगस्टर मान्या सुर्वे ने दाऊद के भाई को सरेआम मौत के घाट उतार दिया और डॉन अपने भाई की मौत का बदला तक नहीं ले सका। कहा जाता है कि मान्या एक अकेला शख्स था जिसने दाऊद को कई बार चुनौती दी। 1982 को वह वडाला में आंबेडकर कॉलेज के पास एक ब्यूटी पार्लर में अपनी गर्लफ्रेंड को लेने आया। यहां पर मुंबई पुलिस के इशाक बागवान की टीम ने एनकाउंटर में मन्या सुर्वे को ढेर कर दिया।

कहा जाता है कि मान्या सुर्वे ही वो शख्स था जिसपर जॉन अब्राहम की फिल्म शूटआउट एट वडाला बनी। 1990 में रिलीज हुई फिल्म ‘अग्निपथ’ में अमिताभ बच्चन ने और साल 2012 की फ़िल्म अग्निपथ में ऋतिक रोशन ने जिस विजय दीनानाथ चव्हाण का किरदार निभाया, उसमें भी मान्या सुर्वे की जिंदगी की झलक नजर आई।

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