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यूपी के दो बड़े माफियाओं की गैंगवार जिसने पूर्वांचल को जुर्म की आग में झोंक दिया

बिहार के आरा कोर्ट बम धमाके में गिरफ्तार लंबू शर्मा ने खुलासा किया कि बृजेश सिंह ने उसे मुख्तार अंसारी को मारने के लिए 6 करोड़ की सुपारी दी थी।

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बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी। (Photo Credit – Social Media)

उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल माफिया और बाहुबलियों का गढ़ रहा। लेकिन दो बड़े बाहुबलियों मुख्तार अंसारी व बृजेश सिंह की गैंगवार ने पूरे इलाके का परिदृश्य ही बदलकर रख दिया। मुख्तार अंसारी व बृजेश सिंह की अदावत के चलते न जाने कितने लोगो की हत्याएं हुई और कितने ही परिवार तबाह हो गए। हालांकि ये दोनों बाहुबली कभी एक दूसरे के करीब हुआ करते थे, लेकिन जब दुश्मनी हुई तो जमकर खूनखराबा हुआ।

90 के दशक में बृजेश सिंह गैंगस्टर साहिब सिंह के साथ काम करता था। वहीं जब 1990 में मुख्तार ने गाजीपुर के इलाकों में उठने वाले सरकारी ठेकों पर कब्ज़ा शुरू किया तो उसकी भिड़ंत साहिब सिंह के गिरोह से कई बार हुई। लेकिन कभी एक-दूसरे के खास रहे मुख्तार और बृजेश ने कई ऐसे काम किए कि दोस्ती तो टूटी ही नफरत भी भीषण वाली पैदा हो गई।

साल 1991 में बनारस के पिंडरा से विधायक अजय राय के भाई अवधेश राय की हत्या ने बृजेश सिंह का पारा हाई कर दिया। अवधेश की हत्या में मुख्तार अंसारी व उसके गिरोह का नाम सामने आया था। वहीं, बृजेश के खास त्रिभुवन सिंह की मुख्तार से बढ़ती दुश्मनी ने उसके अंदर ज्वाला भर दी और यही वह समय था जब भीषण और घातक गैंगवारों का दौर शुरू हुआ। लेकिन इस दुश्मनी की शुरुआत में ही मुख्तार अंसारी को कम आंकने की गलती बृजेश सिंह ने कर दी, जिसका खमियाजा उसे बाद में अलग-अलग हिस्सों में चुकता करना पड़ा।

साल 1996 में जब पहली बार मुख्तार अंसारी विधानसभा पहुंचा तो उसने बृजेश सिंह के साथ-साथ उसके पूरे गिरोह को निशाने पर लिया। अपराध की दुनिया का बड़ा नाम रहे मुख्तार के पास अब राजनीति का भी बल था। थोड़े ही दिनों में बृजेश सिंह को पुलिस ने पुराने मामलों में तलब करना शुरू किया। वहीं दूसरी तरफ आपसी दुश्मनी से गैंग भी छोटा होता चला गया, तभी बृजेश सिंह के गिरोह ने एक योजना तैयार की।

साल 2001 में गाजीपुर में मुख्तार अंसारी का काफिला जा रहा था कि तभी रेलवे क्रासिंग के पास एक ट्रक और कार ने मुख्तार की गाड़ी को घेर लिया। जब तक कोई कुछ समझ पाता कि ट्रक और कार से फायरिंग शुरू कर दी गई। इस भयानक हमले में मुख्तार अंसारी बच निकला और उसके तीन साथ मारे गए। इस हमले के पीछे बृजेश सिंह का नाम सामने आया। लेकिन साल 2005 में कृष्णानंद राय की हत्या के बाद बृजेश सिंह इलाका छोड़कर अंडरग्राउंड हो गया।

बृजेश के गायब होने के बाद उसके मरने की अफवाहे भी खूब सुनी गई। हालांकि जब बृजेश को पुलिस ने 2008 में गिरफ्तार किया तो सारी कहानियां ढेर हो गई। इसके बाद 4 मई 2013 के साल ब्रजेश के करीबी अजय खलनायक पर जानलेवा हमला हुआ और 3 जुलाई 2013 में उसके चचेरे भाई सतीश सिंह की हत्या कर दी गई। काफी दिनों से थमीं गैंगवार के शुरू होने की बातें उड़ने लगी थी, लेकिन इस दौरान चारो तरफ सन्नाटा था।

कई सालों से छाए सन्नाटे को चीरती हुई एक खबर साल 2014 में आई जिसने सभी को हिलाकर रख दिया। बिहार के आरा कोर्ट बम धमाके में गिरफ्तार लंबू शर्मा ने खुलासा किया कि बृजेश सिंह ने उसे मुख्तार अंसारी को मारने के लिए 6 करोड़ की सुपारी दी थी। इस केस में बिहार के बाहुबली नेता सुनील पांडेय का नाम भी सामने आया था। इस खुलासे के बाद मुख्तार अंसारी की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी और फिर कोई गैंगवार नहीं हुई।

बीते कई दशकों से चली आ रही पूर्वांचल की गैंगवार अब थम चुकी है। मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह दोनों ही राजनीति में हैं और जेल की सलाखों के पीछे अपने अपराधों की सजा काट रहे हैं।

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