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पॉप स्टार बनने में नाकाम रही तो बनी तांत्रिक, मर्डर के लिए पति के साथ दी गई थी फांसी

जब मोना को काम मिलना बंद हो गया तो उसने अपने पति के साथ मिलकर तांत्रिक का काम करना शुरू कर दिया।

Author November 22, 2017 2:17 PM
मजान जब जवानी के दिनों में पॉप सिंगर का काम करती थीं तो उसे मोना फेन्दे के नाम से जाना जाता था।

मलेशिया की पूर्व पॉप स्टार मजान इस्माइल और उसके पति मोहम्मद अफाना अब्दुल रहमान और उनके एक नौकर जुरैमी हुसैन को 2 नवंबर 2001 को फांसी पर लटका दिया गया था। मजान जब जवानी के दिनों में पॉप सिंगर का काम करती थीं तो उसे मोना फेन्दे के नाम से जाना जाता था। फांसी के वक्त वह 45 साल की थी, जबकि उसका पति उससे एक साल छोटा था। जब मोना को काम मिलना बंद हो गया तो उसने अपने पति के साथ मिलकर तांत्रिक का काम करना शुरू कर दिया। इन्हें एक सांसद की हत्या करने के मामले में फांसी की सजा हुई थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक जुलाई 1993 में सांसद दत्तुक माजलान इदरिस ने जादू टोना के लिए उनसे संपर्क किया था, ताकि उसका राजनीतिक करियर आगे बढ़ सके। इसके बाद इस जोड़े ने इदरिस से एक डील की, जिसके तहत इन्होंने तंत्र विद्या के तहत उनका राजनीतिक करियर आगे बढ़ाने का वादा किया। एक दिन इन तीनों ने इदरिस को एक मकान में बुलाया, जहां इनको जादू टोना करना था। वहां पर इदरिस से कहा कि फर्श पर लेट जाओ और आंखें बंद कर लो। इसके बाद आसमान से पैसे बरसेंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और इन तीनों ने उस सांसद को कुल्हाड़ी से काट डाला। इसके बाद इन लोगों ने उसके शव के 18 टुकड़े किए और मोना के घर के पास ही उन्हें दफना दिया। इदरिस ने इनके पास जाने से पहले 2 जुलाई 1993 को कुआलालंपुर बैंक से 12 हजार यूएस डॉलर निकाले थे। इदरिस की हत्या के बाद मोना कुआलालंपुर में शॉपिंग के लिए गई, जहां उसने अपने चेहरे की सर्जरी करवाई और एक महंगी कार और अन्य सामान खरीदा।

कोर्ट में जब इस मामले में पेश होने के लिए मोना आती थी तो वह महंगे कपड़े और ज्वैलरी पहनकर आती थी, जिससे वह लोगों का आकर्षण बन गईं। इस केस की सुनाई 65 दिन चली और 76 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में बताया कि इस हत्या के पीछे केवल पैसा ही मकसद था। मोना ने दावा किया था कि उसने कई अन्य नेताओं के लिए भी जादू टोना किया था, जिससे लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ी थी। मोना जब भी कोर्ट से जेल जाती थी तो वह हंसती हुई ही जाती थी। इसके साथ ही जब कोर्ट ने इस जोड़े को मौत की सजा सुनाई तो ये दोनों लोग हंसने लगे। इसके बाद इन्होंने मलेशिया की दूसरी कोर्ट में याचिका लगाई, जहां कई वर्षों तक यह केस चला। लेकिन आखिर में कोर्ट ने अप्रैल 2001 में उनकी याचिका खारिज कर दी और फांसी की सजा बरकरार रखी।

फांसी से एक दिन पहले दोनों के परिवार वालों को उनसे मिलने के लिए आठ घंटे दिए गए थे। बताया जाता है कि आखिरी समय में इन दोनों ने अपने बच्चों को अच्छा इंसान बनने और खुद का ख्याल रखने की सलाह दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक फांसी से पहले जब इनका परिवार मिला तो काफी देर तक ये लोग रोते रहे और एक दूसरे के गले लगते रहे। इसके साथ ही बताया गया कि उन्हें अपने किए गए काम पर कोई पश्चाताप नहीं था।

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