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कोरोना के बीच 2020 में बेरोजगारों की खुदकुशी का रिकॉर्ड टूटा- राज्यसभा में सरकार ने दिए आंकड़े

संसद में बजट सत्र पर चर्चा के दौरान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि महामारी के प्रथम वर्ष 2020 में बेरोजगारों की आत्महत्या का आंकड़ा पहली बार 3000 के पार चला गया।

कोरोना के बीच 2020 में बेरोजगारों की खुदकुशी का रिकॉर्ड टूटा- राज्यसभा में सरकार ने दिए आंकड़े
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (Photo Credit – PTI/SANSAD TV)

देश की संसद में विपक्षी दल के नेताओं द्वारा बजट सत्र पर चर्चा के दौरान बेरोजगारी का भी मुद्दा उठाया गया। क्योंकि बेरोजगारी के बीच आत्महत्याओं में भी भारी वृद्धि हुई थी। ऐसे में केंद्र सरकार ने बुधवार को राज्यसभा को सूचित किया कि कोरोना महामारी की पहली लहर यानी 2020 में बेरोजगारों की आत्महत्या का आंकड़ा पहली बार 3000 का आंकड़ा पार गया।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि महामारी के प्रथम वर्ष 2020 में बेरोजगारी के कारण देश में 3,548 लोगों ने आत्महत्या की है। बता दें कि, साल 2020 में देश में करीब 1.53 लाख मामले दर्ज किये गए थे, जिनकी संख्या साल 2019 में 1.39 लाख के करीब थी।

राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब में नित्यानंद राय ने बताया कि देश में कर्ज और दिवालियापन के कारणों से साल 2018 से 2020 के बीच आत्महत्या के 16,091 मामले रिपोर्ट किये गए थे। जिनमें से 2018 में 4,970 मामले, साल 2019 में 5,908 तो वहीं साल 2020 में 5,213 खुदकुशी के मामले सामने आए थे।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2020 में कर्नाटक (720), महाराष्ट्र (625), तमिलनाडु (336), असम (234), और उत्तर प्रदेश (227) में बेरोजगारी के चलते सबसे अधिक आत्महत्याएं दर्ज की गईं थी। वहीं साल 2020 में कर्ज व दिवालियापन के कारण हुई आत्महत्याओं में महाराष्ट्र का नाम 1,341 मौतों के साथ सूची में सबसे ऊपर रहा था। महाराष्ट्र के बाद इस सूची में कर्नाटक (1,025), तेलंगाना (947), आंध्रप्रदेश (782) और तमिलनाडु (524) का नाम शामिल है।

हालांकि, पिछले कुछ सालों में एनसीआरबी के आंकड़ों पर गौर करें तो बेरोजगारों में खुदकुशी के मामलों में वृद्धि हुई है। भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल के दौरान (2014-2020) बेरोजगारों में खुदकुशी के कुल 18,772 मामले दर्ज किये गए, जिनमें कि हर साल औसतन 2,681 मौतें हुई थी। आंकड़ों के हिसाब से साल 2014 में 2,207, साल 2015 के दौरान 2,723, 2016 में 2,298, साल 2017 में 2,404 मामले तो वहीं 2018 में 2,741 और 2019 में कुल 2,851 मामले दर्ज किए थे।

वहीं यूपीए सरकार के पिछले सात साल के आंकड़ों (2007-2013) की बात करें तो इस दौरान आत्महत्या के 15,322 मामले दर्ज किये गए थे, जिनमें से हर साल औसतन मौतों का आंकड़ा 2,188 का था। बता दें कि, बीते हफ्ते लोकसभा में राहुल गांधी ने भी बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि देश इस वक्त पिछले 50 सालों में सबसे अधिक बेरोजगारी का सामना कर रहा है। साथ ही कांग्रेस नेता शशि थरूर ने लोकसभा को बताया कि “भारत की बेरोजगारी दर बांग्लादेश और वियतनाम की तुलना में तेजी से बढ़ी है।”

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