महंत नरेंद्र गिरि मौत: जिस शिष्य का नाम पुलिस FIR में है दर्ज, उसपर पहले भी लगे हैं गंभीर आरोप, जा चुका है जेल

महंत नरेंद्र गिरि की मौत मामले में उनके ही एक शिष्य आनंद गिरि को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सुसाइड नोट में भी इसी शिष्य का जिक्र किया गया है। आनंद गिरि और नरेंद्र गिरि के बीच पहले भी कई विवाद हो चुके हैं।

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आनंद गिरि (फोटो-फेसबुक)

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत मामले में उनके अपने ही एक शिष्य आनंद गिरि को गिरफ्तार किया गया है। आनंद गिरि पर आरोप है कि उसी ने महंत नरेंद्र गिरि को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया है। योगी सरकार इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर चुकी है।

आनंद गिरि पर पहली बार कोई आरोप नहीं लगा है। दोनों गुरु-शिष्य में काफी पहले से आरोप-प्रत्यारोप चल रहा था। आउटलुक के अनुसार आनंद गिरि अपने ही गुरु के खिलाफ प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री तक को पत्र लिख चुका है।

विदेश में गिरफ्तार- राजस्थान में पैदा हुए आनंद गिरि ने बचपन में ही घर छोड़कर संन्यास अपना लिया था। आनंद की लाइफ स्टाइल भी हमेशा चर्चाओं में रही है। सोशल मीडिया पर भी आनंद काफी ऐक्टिव रहता है। अपने प्रवचन और योग के सिलसिले में आनंद विदेश भी जाता रहा है। 2019 में जब वो जब ऑस्ट्रेलिया में योग सिखाने गया था, तब वहां की दो युवतियों ने उसपर छेड़खानी का आरोप लगाया था। इस आरोप मे उसे जेल भी जाना पड़ा था।

जब नरेंद्र गिरी से मिला आनंद- घर से भागकर जब आनंद गिरी, महंत नरेंद्र गिरि से मिला तो उसने अपनी पढ़ाई की इच्छा के बारे में महंत नरेंद्र गिरि को बताया। जिसके बाद नरेंद्र गिरि ने उसकी शिक्षा की व्यवस्था की थी और दीक्षा भी उन्होंने दी थी। यहीं नरेंद्र गिरि आनंद के गुरु बन गए थे।

कहां से बिगड़ी बात- दोनों गुरु-शिष्य के बीच पहले तो सबकुछ ठीक रहा फिर धीरे-धीरे विवाद बढ़ने लगा। कुछ सालों बाद कर्तव्यों के ठीक से निर्वहन ना करने के आरोप में आनंद को निरंजनी अखाड़ा से निकाल दिया गया था। जिसके बाद आनंद ने अपने ही गुरु पर कई सनसनीखेज आरोप लगाए थे। उसने निरंजनी अखाड़े के दो साधुओं की मौत को भी हत्या करार दिया था। अपने गुरु पर आश्रम की जमीन भी बेचने का आरोप लगाया था।

मांग ली थी माफी– आरोप-प्रत्यारोप के काफी दिनों बाद आनंद गिरि ने अपने गुरु नरेंद्र गिरि के पैर पकड़ कर माफी मांग ली थी। दोनों के बीच सुलह भी हो गई थी। आनंद गिरि पर लगाए गए प्रतिबंध भी हटा लिए गए थे।

विवाद की जड़- कहा जाता है कि विवाद की जड़ में मुख्य रूप से बाघंबरी गद्दी की 300 साल पुरानी वो करोड़ों की संपत्ति है, जिसे महंत नरेंद्र गिरि संभाल रहे थे। इसी की जमीन बेचने का आरोप आनंद गिरि ने अपने गुरु पर लगाया था।

सुसाइड नोट में गुरु ने क्या लिखा- महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि उनका शिष्य आनंद गिरि उन्हें ब्लैकमेल कर रहा थे। महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा है- ‘आनंद गिरि की वजह से मेरा मन परेशान है। मैं 13 सितंबर को अपनी जान लेने वाला था, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा सका। आज मुझे सूचना मिली कि आनंद गिरि एक-दो दिन में, कंप्यूटर का इस्तेमाल कर एक महिला के साथ मेरी तस्वीर वायरल कर देगा। मैं प्रयागराज पुलिस अधिकारियों से उसके खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूं। मेरी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जाना चाहिए ताकि मेरी आत्मा को शांति मिले।”

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