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मुंबई अंडरवर्ल्ड का ‘डैडी’, दाउद से भी है अदावत; कभी दूधवाला कहे जाने वाले अरुण गवली की कहानी…

कहा जाता है कि कभी दूध बेचकर परिवार चलाने वाला गवली धीरे-धीरे जुर्म की दुनिया का बादशाह बन गया। वह अपने चाहने वालों के बीच 'डैडी' के नाम से जाना जाता है।

crime, crime newsअरुण गवली। फाइल फोटो। (Express archive photo by Manoj Patil)

अरुण गवली का जन्म महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपारगांव में हुआ था। अरुण गवली के पिता गुलाब राव मध्य प्रदेश के खांडवा के रहने वाले थे और फिर बाद में साल 1950 में वो महाराष्ट्र आ गए। बताया जाता है कि अरुण गवली के पिता गुलाब राव मिल इंडस्ट्री में काम करते थे और अपने बेटे को अच्छी तालीम दिलाना चाहते थे।

यहां तक कि अरुण गवली ने मैट्रिक की परीक्षा भी पास की। हालांकि बाद में गुलाब राव की नौकरी छूट गई और फिर अरुण गवली खुद पैसे कमाने पर ज्यादा ध्यान देने लगा। इसके बाद अरुण गवली ने महालक्ष्मी में शक्ति मिल्स में ज्वायन किया। साल 1977 में अरुण गवली ने सदाशिव पावले उर्फ ‘सदा मामा’ से हाथ मिलाया और कहा जाता है कि सदाशिव पावले की छत्रछाया में ही अरुण गवली ने पहला क्राइम किया था।

साल 1980 में अरुण गवली ने ‘Byculla Company’ ज्वायन की। यह उस वक्त एक चर्चित गैंग हुआ करता था जिसे रामा नाइक और बाबू रेशिम चलाते थे। रामा नाइक, अरुण गवली का स्कूलमेट भी था। बाद में इस गैंग का नाम पड़ा B.R.A. गैंग, जिसका मतलब था बाबू, रामा और अरुण।

दाउद से हुआ कनेक्शन

कहा जाता है कि साल 1984 में नाइक ने दाउद इब्राहिम की मदद की थी। इसके बाद “D-Company” और “Byculla Company” के बीच दोस्ती का सिलसिला शुरू हुआ। साल 1988 तक गवली और उसके साथियों ने दाउद इब्राहिम के काले धंधे में उसका सहयोग किया। साल 1988 में दाउद पुलिस से बचता हुआ दुबई भाग गया और फिर वहीं रहने लगा।

बाद में एक पुलिस एनकाउंटर में नाइक मारा गया। कहा जाता है कि इसके बाद अरुण गवली ने गैंग का काम संभाल लिया। गवली यह मानता था कि उसके स्कूल के साथी के एनकाउंटर का प्लान दाउद इब्राहिम ने बनाया था। इसके बाद शुरू हुई इन दोनों के बीच अदावत की कहानी। कहा जाता है कि 90 के दशक के दौरान इन दोनों गैंग्स के बीच की दुश्मनी पूरे मुंबई में सुर्खियों में रही। बताया जाता है कि इसी दौरान अरुण गवली के भाई बप्पा गवली की हत्या दाउद के आदमियों ने कर दी। इसके बाद अरुण गवली गैंग पर दाउद के दामाद इब्राहिम पार्कर को मारने का आरोप लगा।

‘डैडी’ के नाम से हुआ मशहूर

80 और 90 के दशक में गैंगस्टर एक्टिविटीज के लिए बदनाम भायकुला स्लम एरिया में मौजूद दगड़ी चाल में कभी गवली का घर हुआ करता था। कहा जाता है कि कभी दूध बेचकर परिवार चलाने वाला गवली धीरे-धीरे जुर्म की दुनिया का बादशाह बन गया। वह अपने चाहने वालों के बीच ‘डैडी’ के नाम से जाना जाता है।

साल 1986 में कोबरा गिरोह के सदस्य पारसनाथ पांडेय और सशी राशम के मर्डर का आरोप गवली पर लगा। गवली के गैंग पर शिवसेना के विधायक रमेश मोरे और बाला साहेब ठाकरे के विश्वासपात्र रहे जयंत जाधव और विधायक जौद्दीन बुखारी का मर्डर करने का आरोप लगा। साल 2007 में गवली पर शिवसेना के मेयर कमलाकर जमसंदेकर की हत्या के लिए सुपारी देने के आरोप लगे।

अरुण गवली ने राजनीति में भी किस्मत आजमाई। उसने शिवसेना के साथ अपनी राजनीति की शुरुआत की। लेकिन जल्दी ही शिवसेना के साथ उसकी रंजिश शुरू हो गई। इसके बाद अरुण गवली ने अखिल भारतीय सेना नाम से अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई।

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