अवैध बार पर मारा छापा, जान से मारने की धमकी भी मिली; बहादुर IAS की कहानी

जालना में पोस्टिंग के दौरान तुकाराम मुंडे ने अवैध बालू माफियाओं के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई की थी। उन्होंने शहर में पानी की किल्लत से जुड़ी समस्या को दूर करने में अहम भूमिका अदा की थी।

crime, crime newsIAS तुकाराम मुंडे, फोटो सोर्स- फेसबुक, @Tukaram Mundhe

देश में बहादुर IAS अफसरों की कोई कमी नहीं है। 2005 बैच के आईएएस अफसर तुकाराम मुंडे की गिनती कुछ उन चुनिंदा अफसरों में होती है जिन्होंने बड़े माफियाओं से ना सिर्फ पंगा लिया बल्कि ईमानदारी की वजह से उन्हें जान से मारने की धमकी तक मिली थी। एक साक्षात्कार में एक घटना का जिक्र करते हुए तुकाराम मुंडे ने बताया था कि एक बार महाराष्ट्र के एक इलाके में सड़क हादसे में एक युवक की मौत हो गई। उन्होंने बताया था कि इस हादसे के बाद स्थानीय लोग काफी आक्रोशित हो गए और उन्होंने सड़क पर जाम लगा दिया। उस वक्त तुकाराम मुंडे सोलापुर के जिला कलेक्टर थे और वो खुद भीड़ को समझा-बुझा कर वहां से हटाने के लिए घटनास्थल पर मौजूद थे। इसके अलावा वहां जिले के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक भी कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मौजूद थे।

तुकाराम मुंडे ने बताया था कि जिस भीड़ को वो समझा रहे थे वो अचानक इतनी उग्र हो गई कि उन्होंने क्विक रेस्पॉन्स टीम पर ईंट, पत्थरों से हमला कर दिया। तुकाराम मुंडे ने बताया था कि उस वक्त उन्हें ऐसा लगा था कि वो अब भी़ड़ के हत्थे चढ़ जाएंगे और मॉब लीचिंग में मारे जाएंगे। जिस जगह पर यह घटना हुई थी वहां पर अतिरिक्त पुलिस बल को आने में कम से कम 2 घंटे का समय लगता। जब वहां मौजूद पुलिस अफसरों और अन्य पुलिस कर्मियों की जान पर बन आई तब तुकाराम मुंडे ने टीम को फायरिंग करने के लिए कहा और खुद इसकी जिम्मेदारी ली थी। फायरिंग के बाद किसी तरह भीड़ तितर-बितर हुई और इन लोगों की जान बच सकी।

महाराष्ट्र के बीड जिले के एक छोटे से गांव Tadsonna में जन्में तुकाराम मुंडे के गांव में कृषि ही मुख्य व्यवसाय था। तुकाराम मुंडे और उनके भाई ने गांव में स्थित जिला परिषद स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई की। ईमानदारी और लगनशीलता की पहली पाठ तुकाराम मुंडे ने अपने परिवार में ही पढ़ी थी।

उच्च शिक्षा के लिए जब तुकाराम मुंडे के भाई बाहर चले गए तब तुकाराम अपने पिता के साथ खेतों में काम करने लगे। स्कूल के साथ-साथ वो खेतों में काम करते थे। 10वीं क्लास तक उनका यहीं रूटीन रहा। इतना ही नहीं खेतों में उपजाए गए सब्जियों को वो बाजार में बेचने भी जाया करते थे। उनके भाई ने बाद में Maharashtra Public Service Commission (MPSC) परीक्षा पास कर ली।

10वीं क्लास की पढ़ाई के बाद तुकाराम औरंगाबाद चले गये। यहां आने के बाद पहली बार वो 16 साल की उम्र में सिनेमा भी देखा। उन्हें न्यूजपेपर औऱ टीवी के बारे में जानकारी यहां आने के बाद ही मिली। इससे पहले गांव में उन्होंने इसके बारे में सिर्फ सुना था।

विज्ञान विषय से उन्हें बारहवीं पास की। इसके बाद उन्होंने Government College of Arts & Science, औरंगाबाद से इतिहास, राजनीति विज्ञान और सोसियोलॉजी में साल 1996 में ग्रेजुएशन किया था। इसके बाद वो मुंबई आ गए। यहां उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन में एडमिशन लिया।

मेधावी तुकाराम मुंडे ने स्कॉलरशिप भी हासिल किया था। यूपीएससी में पहले प्रयास में तुकाराम मुंडे का चयन नहीं हुआ लेकिन कुछ प्रयासों के बाद उन्होंने इस परीक्षा में सफलता हासिल की थी। सोलापुर में पदस्थापित होने के बाद उन्होंने अवैध बार पर छापेमारी की। इसके अलावा उन्होंने यहां अतिक्रमण पर भी कार्रवाई की थी। अवैध शराब दुकानों पर भी तुकाराम मुंडे ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की थी।

जालना में पोस्टिंग के दौरान तुकाराम मुंडे ने अवैध बालू माफियाओं के खिलाफ जबरदस्त कार्रवाई की थी। उन्होंने शहर में पानी की किल्लत से जुड़ी समस्या को दूर करने में अहम भूमिका अदा की थी। एक अवैध बार पर छापा मारने से लेकर अनधिकृत अतिक्रमण के ध्वस्तीकरण और भूमि और जल माफियाओं के खिलाफ दृढ़ता से कार्रवाई करने तक, मुंडे के नाम यह सारी उपबल्धियां हैं। यहां तक कि उन्हें रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मौत की धमकी भी मिली थी। इतना ही नहीं कुछ राजनीतिक चेहरों को नाराज करने की वजह से उनके इस्तीफे की मांग भी उठी थी। लेकिन तुकाराम मुंडे अपने कर्त्व्य पथ पर बने रहे।

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