अंतिम संस्कार में जातिवाद पर बिफरा मद्रास हाईकोर्ट, बोला- एक ही श्मशान में किया जाए सभी का संस्कार

श्मशान या कब्रिस्तान में भी जातिगत भेदभाव होने के मुद्दे पर मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि यह शर्मनाक है। न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश ने इस तरह के बहिष्कार को एक घृणित प्रथा करार दिया और कहा कि यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि मृत्यु के समय भी जाति, किसी व्यक्ति को नहीं छोड़ता है।

madras high court
अंतिम संस्कार में जातिवाद पर बिफरा मद्रास हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

अंतिम संस्कार में भी जातिवाद की सूचना को लेकर मद्रास हाईकोर्ट बिफर पड़ा। हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि एक ही श्मशान घाट में सभी का अंतिम संस्कार किया जाए।

बार एंड बेंच के अनुसार मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को खेद व्यक्त करते हुए कहा कि हाशिए पर रहने वाली जातियों के लोगों के अंतिम संस्कार या दफनाने पर रोक लगाने की प्रथा कई गांवों में जारी है। न्यायमूर्ति एन आनंद वेंकटेश ने इस तरह के बहिष्कार को एक घृणित प्रथा करार दिया और कहा कि यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि मृत्यु के समय भी जाति किसी व्यक्ति को नहीं छोड़ता है।

न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि जब शवों के दाह संस्कार की बात आती है, तो “सभी को उस स्थान पर शवों का अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी जानी चाहिए, जिसे श्मशान घाट या कब्रिस्तान के रूप में अधिसूचित किया गया है।”

कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि लोगों को किसी अन्य स्थान पर शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिन्हें कब्रिस्तान में अधिसूचित नहीं किया गया है। इस तरह की प्रथा को तुरंत रोक दिया जाना चाहिए और सभी को श्मशान तक पहुंच प्रदान की जानी चाहिए। इतने लंबे समय में भी, जाति व्यवस्था का अभिशाप विशेष रूप से गांवों में इतना प्रचलित है और यह जन्म के समय भी रहता है और दाह संस्कार के समय भी नहीं जाता है।

कोर्ट ने कहा कि अगर किसी ने इस कारण से अंतिम संस्कार को रोका है कि मृत व्यक्ति समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्ग का है, तो कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए और ऐसे व्यक्तियों को दंडित किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति वेंकटेश ने कहा कि इस तरह की निंदनीय प्रथाओं को नियंत्रण में लाने के लिए अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।

अदालत पोलाची में कुछ सरकारी भूमि पर शवों को दफनाने या दाह संस्कार के खिलाफ एक याचिका पर विचार कर रही थी, जिसके बारे में याचिकाकर्ता महिला ने दावा किया था कि उसके पति की जमीन की उसे जरूरत है। मामले के दौरान, उच्च न्यायालय को बताया गया था कि उक्त भूमि का उपयोग निचली जाति के व्यक्तियों के शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए किया जा रहा था, क्योंकि इस समुदाय के सदस्यों को पास के कब्रिस्तान में प्रवेश की अनुमति नहीं थी।

सरकार ने इस दौरान कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए संबंधित खंड विकास अधिकारी को एक पत्र जारी किया गया था कि सभी समुदायों को आम कब्रिस्तान का उपयोग करने की अनुमति है।

पढें जुर्म समाचार (Crimehindi News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

Next Story
Coolpad Note 3 Lite हुआ लॉन्‍च, 6999 रुपए में फिं‍गरप्रिंट स्‍कैनर और 4g कनेक्‍ट‍िविटीCoolpad Note 3 Lite, Coolpad Note 3 Lite launch, Coolpad Note 3 Lite registration, Coolpad Note 3 Lite amazon, Coolpad Note 3 Lite price, Coolpad Note 3 Lite features, Coolpad Note 3 Lite specs, Coolpad Note 3 Lite smartphone, Coolpad Note 3 Lite 3GB ram
अपडेट