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इंदौर: सबसे बड़े अस्पताल में नवजात का शव फ्रिजर में रख भूल गया कर्मचारी, हाल ही में स्ट्रेचर पर 11 दिन तक पड़ा शव मिलने पर मचा था हंगामा

अस्पताल के सीएमओ का कहना है कि शिशु की मौत के बाद अगले ही दिन पुलिस को इस संबंध में सूचना दी गई थी। इसके बाद 16 सितंबर को दोबारा पुलिस को इस बारे में याद दिलाया गया।

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मध्य प्रदेश के इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में फिर एक बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। अब यहां एक नवजात का शव फ्रिजर में रख कर कर्मचारी भूल गया और फिर कई दिनों तक शव फ्रिजर में ही रखा रहा। Maharaja Yeshwantrao अस्पताल के मोर्चुरी के फ्रिजर से 5 दिन बाद नवजात का शव निकाला गया है। बताया जा रहा है कि 11 सितंबर को नवजात की मौत हो गई थी और 12 सितंबर को उसका शव मोर्चुरी के फ्रिजर में रखा गया था। शव को फ्रिजर में रखकर अस्पताल कर्मचारी भूल गया था।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक जुलाई के महीने में यह नवजात अलीराजपुर जिले में सड़क पर लावारिश हालत में मिला था। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने इस बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया था और 11 तारीख को अस्पताल में उसकी मौत हो जाने पर अस्पताल के मुख्य चिकित्सका अधिकारी को इस बारे में बताया गया।

अस्पताल के सीएमओ का कहना है कि शिशु की मौत के बाद अगले ही दिन पुलिस को इस संबंध में सूचना दी गई थी। इसके बाद 16 सितंबर को दोबारा पुलिस को इस बारे में याद दिलाया गया। आपको बता दें किसी भी लावारिश डेड बॉडी के पोस्टमार्टम के वक्त पुलिस का वहां होने बेहद जरुरी है।

हालांकि इस पूरे मामले में यहां पुलिस का कहना है कि जरुरी कागजात नहीं मिल पाने की वजह से वो उस वक्त अस्पताल नहीं जा पाए थे। बहरहाल इस मामले में अब एडिशनल कमिश्नर कार्यालय को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

आपको याद दिला दें कि अभी हाल ही में इसी महाराजा यशवंतराव अस्पताल में एक औऱ बड़ी लारपरवाही की बात सामने आई थी। यहां 11 दिनों तक अस्पताल के मॉर्चुरी में स्ट्रेचर पर एक लाश पड़ी रही और किसी न उसकी सुध नहीं ली थी।

जब इस डेड बॉडी की हालत काफी खराब हो गई और उससे दुर्गंध आने लगी तब जाकर अस्पताल कर्मचारियों की नींद खुली थी। 11 दिनों में यह डेड बॉडी कंकाल में तब्दील हो चुकी थी।

इसके बाद महाराजा यशवंतराव अस्पताल प्रबंधन की तरफ से सफाई देते हुए कहा गया था कि मुर्दाघर में प्रतिदिन 21-22 लाशें आ रही हैं। जबकि यहां सिर्फ 16 फ्रीजर की ही व्यवस्था है।

सीमित संसाधनों को लेकर कई जरुरी राज्य प्रशासन को खत लिखा जा चुका है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इधर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. पीएस ठाकुर ने इस मामले में जांच कराने की बात भी कही थी।

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