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केरल: प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती का 4 अस्पतालों ने नहीं किया इलाज, जुड़वां बच्चों की गर्भ में मौत; मंत्री ने कहा – होगी जांच

शारीफ ने बताया कि पत्नी की निगेटिव कोरोना रिपोर्ट लेकर वो इदावाना के ईएमसी अस्पताल गए। उनका आरोप है कि अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर ने उनसे बड़ी ही बेरूखी से बात की और कहा कि डॉक्टर से बात करने के बाद वो इस मामले में कुछ कहेंगे

Author Edited By Nishant Nandan Updated: September 28, 2020 4:23 PM
CRIME, KERALAगर्भ में जुड़वां बच्चों की मौत के बाद अब महिला अभी फिलहाल आईसीयू में हैं। प्रतीकात्मक तस्वीर।

इधर केरल में 4 अस्पतालों ने प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला का इलाज करने से इनकार कर दिया। महिला के पति का आऱोप है कि सही समय पर इलाज नहीं मिलने से उनके अजन्मे जुड़वां बच्चों की गर्भ में ही मौत हो गई। इस मामले में केरल सरकार ने सोमवार को जांच के आदेश दिये हैं। यह घटना मालाप्पुरम जिले की है। घटना के बाद स्थानीय लोगों और यहां के कुछ नेताओं ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ प्रदर्शन भी किया है।

लोगों की नाराजगी को देखते हुए राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने कहा कि ‘यह घटना बेहद ही दुखी करने वाला है।’ उन्होंने आश्वासन दिया है कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से जांच कर रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।

महिला के पति एनसी शारीफ का कहना है कि उनकी पत्नी नौ महीने की गर्भवती थी। 5 सितंबर को उनका कोविड-19 टेस्ट पॉजीटिव आया था। जिसके बाद उन्हें मंजेरी में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 15 सितंबर को अस्पताल से उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया और उनका एंजीटन टेस्ट निगेटव आया था।

18 सितंबर को उनकी पत्नी को पेट में दर्द शुरू हुआ। इसके बाद उन्हें इसी अस्पताल में दोबारा भर्ती कराया गया। हालांकि इस दौरान महिला ने अपने पति को बताया कि अस्पताल के कर्मचारियों का व्यवहार बहुत खराब है इसलिए वो अपने बच्चे को यहां जन्म नहीं देना चाहती हैं। शारीफ ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया कि इसके बाद एक सरकारी अस्पताल और 3 निजी अस्पतालों में उन्होंने अपनी पत्नी को इलाज मुहैया करवाने की कोशिश की लेकिन किसी भी अस्पताल ने उनकी पत्नी का इलाज नहीं किया।

शारीफ ने बताया कि पत्नी की निगेटिव कोरोना रिपोर्ट लेकर वो इदावाना के ईएमसी अस्पताल गए। उनका आरोप है कि अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर ने उनसे बड़ी ही बेरूखी से बात की और कहा कि डॉक्टर से बात करने के बाद वो इस मामले में कुछ कहेंगे। शारीफ ने बताया कि इस अस्पताल में प्रबंधन ने सरकार द्वारा दिए गए उनकी पत्नी के एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट को मानने से इनकार कर दिया और उन्हें इलाज नहीं मिल सका।

26 सितंबर को शारीफ अपनी पत्नी को लेकर Manjeri Medical College Hospital पहुंचे। यहां उनकी पत्नी को लेबर रुम में एडमिट कराया गया। शारीफ के मुताबिक यहां भी अस्पताल प्रबंधन यह मानने के लिए तैयार नहीं था कि उनकी पत्नी कोविड निगेटिव हैं। हालांकि अस्पताल के एक चिकित्सक ने हालत को समझते हुए कहा कि इस वक्त महिला को अस्पताल से डिस्चार्ज करना खतरों भरा है बावजूद इसके प्रबंधन ने उन्हें सरकारी अस्पताल जाने के लिए कह दिया।

शारीफ के मुताबिक इसके बाद वो कोजिखोड स्थित सरकारी अस्पताल जा रहे थे और तब ही रास्ते में उनकी पत्नी को तेज दर्द होने लगा और वो चीखने लगीं। शारीफ के मुताबिक अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि प्रसूति विभाग में कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं हैं। इसके बाद उन्हें Kozhikode Medical College में रेफर कर दिया गया।

लेकिन Kozhikode Medical College में हालात ठीक नहीं होने की वजह से शारीफ ने निजी अस्पताल में अपनी पत्नी को एडमिट करने का फैसला लिया। शारीफ के मुताबिक शांति हॉस्पीटल में प्रबंधन कोरोना का RT-PCR रिजल्ट मांगने लगा और एंटीजन रिजल्ट पर यहां भी प्रबंधन ने भरोसा नहीं किया। कई अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद महिला को शनिवार को Kozhikode Medical College में भर्ती कराया गया। शनिवार की रात को उनका ऑपरेशन किया गया लेकिन चिकित्सक उनके जुड़वां बच्चों को बचाने में नाकाम रहे। महिला का इलाज अभी भी अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है।

मीडिया से बातचीत करते हुए शारीफ ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वो अपनी पत्नी को जुड़वां बच्चों की मौत के बारे में कैसे बताएंगे? उन्होंने कहा कि सरकार को Antigen और RT-PCR टेस्ट के नतीजों को लेकर स्थिति साफ करनी चाहिए।

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