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23 लाख रुपए का पैकेज छोड़ दिया था, कई जिम्मेदारियों और सेल्फ स्टडी से IAS बनीं काजल ज्वाला की कहानी…

हालांकि नौकरी और शादीशुदा जीवन में तालमेल बनाना आसान नहीं होता लेकिन काजल ने सभी चीजें संभालते हुए परीक्षा की तैयारी जारी रखी थी।

crime, crime newsIAS काजल ज्वाला। फोटो सोर्स – सोशल मीडिया

यूपीएससी की परीक्षा पास करना आसान कतई नहीं। लेकिन कहा जाता है कि अगर इंसान ठान ले और ईमानदारी से प्रयास करे तो उसके लिए कोई भी काम मुश्किल नहीं। आज हम यूपीएसी की परीक्षा पास करने वाली एक ऐसी महिला आईएएस के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जिन्होंने कई जिम्मेदारियां निभाते हुए इस प्रतिष्ठित परीक्षा की तैयारी की और फिर सारी मुश्किलों को पार कर अपना मुकाम हासिल किया।

IAS अफसर काजल ज्वाला उन सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं जो कड़ी मेहनत कर अपनी मंजिल को हासिल करना चाहते हैं। मूल रूप से हरियाणा के शामली की रहने वाली काजल ज्वाला ने अपनी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई शामली से ही की। स्कूल के बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन किया। उन्होंने मथुरा के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से अपनी पढ़ाई की थी।

इंजीनियरिंग के बाद उनकी नौकरी Wipro में लग गई और इस कंपनी में उनका सालाना पैकेज 23 लाख रुपए का था। शुरुआत में काजल ज्वाला एक चिकित्सक बनना चाहती थीं लेकिन यह संभव नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की परीक्षा देने का सपना देखा।

इस बीच काजल ज्वाला की शादी हो गई। उनके पति आशीष मलिक दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में नौकरी करते थे। आशीष मलिक ने अपनी पत्नी के सपने को पूरा करने में उनका पूरा सहयोग किया।

खास बात यह है कि काजल ज्वाला ने यूपीएससी की तैयारी के लिए कोई कोचिंग संस्थान ज्वायन नहीं किया। घर संभालने के अलावा वो अपने बचे हुए समय में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने लगीं। हालांकि नौकरी और शादीशुदा जीवन में तालमेल बनाना आसान नहीं होता लेकिन काजल ने सभी चीजें संभालते हुए परीक्षा की तैयारी जारी रखी थी।

काजल ज्वाला के मुताबिक आईएएस के Pre-Exam में लगातार मिल रही असफलताएं ही उनके लिए सफलता का मंत्र बन गया। इन असफलताओं ने उनका हौसला तोड़ा नहीं बल्कि इससे उनके जज्बे में इजाफा हुआ और हौंसला बढ़ा गया। काजल ने एक साक्षात्कार में बताया था कि उनके लिए वक्त की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। लेकिन उनको खुद पर भरोसा था इसलिए कोचिंग का सहारा ना लेते हुए खुद से पढ़ाई करने का फैसला लिया और ऐसा करने के बावजूद 28वीं रैंक हासिल करने में सफलता हासिल की।

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