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झारखंड का एक कुख्यात माफिया जिसे मारने के लिए हजारीबाग कोर्ट में बरसाई गई थी एके-47 से गोलियां

सुशील श्रीवास्तव अपने आपराधिक कृत्यों के चलते कई सालों तक जेल में रहा था और लोग उसे ‘बाबा’ नाम से बुलाते थे।

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हजारीबाग कोर्ट परिसर में सुशील श्रीवास्तव को मौत के घाट उतार दिया गया था। (Photo Credit – Social Media)

झारखंड में कोयला माफिया के तौर पर कुख्यात सुशील श्रीवास्तव का कई सालों तक इलाके पर प्रभुत्व रहा। सुशील श्रीवास्तव अपने आपराधिक कृत्यों के चलते कई सालों तक जेल में रहा था और लोग उसे ‘बाबा’ नाम से बुलाते थे। माना जाता है कि सुशील के बिहार और झारखंड के नेताओं से भी बड़े करीबी रिश्ते थे।

झारखंड के चतरा जिले के कुपा गांव में 1963 में सुशील का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। गांव में शुरुआती पढ़ाई के बाद सुशील स्नातक करने रांची चला गया। रांची में पढ़ाई के दौरान उसे एक मीना नाम की लड़की से प्यार हुआ तो शादी की बात घर में छेड़ी पर घरवालों ने मना कर दिया। बाद में घरवालों की बिना मर्जी के सुशील ने 1986 में मीना से शादी की और रांची में ही बस गया।

शादी के बाद सुशील कोयले के धंधे में उतर गया और देखते ही देखते इलाके का कोयला माफिया बन गया। लेकिन उसे अब बड़ा बनने की चाहत थी। साल 1992 में सुशील की मुलाकात पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियर राधेश्याम रजक से हुई। उसने राधेश्याम से रामगढ़ इलाके में काम के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट मांगा। यहां उसे काम तो नहीं मिला उल्टा राधेश्याम रजक ने खूब बेइज्जती की। इसके बाद वह चुपचाप काम करता रहा, तभी उसकी जिले के कोयला माफिया भोला पांडेय से मुलाकात हुई।

सुशील कुछ ही दिनों में भोला पांडेय का करीबी बन गया और दो साल बाद ही उसने राधेश्याम रजक की हत्या कर दी और अपनी बेइज्जती का बदला ले लिया। फिर तो जैसे सुशील श्रीवास्तव का सिक्का बोलने लगा। भोला पांडेय के साथ मिलकर कोयला और स्क्रैप के कारोबार में खूब पैसा कमाया। साल 1995 आते-आते सुशील का नाम, रुतबा दबदबा सब कुछ बन चुका था। अब उसके कुछ साथी भी हो गए थे जो उसके लिए काम करते थे। थोड़े ही दिनों में उसने भोला पांडेय का साथ छोड़ दिया तो पांडेय से अदावत छिड़ गई।

सुशील का नाम इसी बीच रामगढ़ के स्क्रैप व्यापारी की हत्या के मामले में सामने आया और 1997 में वह गिरफ्तार हो गया। सुशील श्रीवास्तव को हजारीबाग जेल भेजा गया लेकिन उसका नेटवर्क तब भी काम करता रहा। उसके गुर्गों ने जबरन वसूली के काम को बोकारो और झारखंड तक फैला दिया। जेल में बंद रहने के दौरान ही उसकी मुलाकात अनिल शर्मा से हुई। अनिल शर्मा और सुशील ने मिलकर कोयला टेंडर सहित रैक ट्रांसपोर्टिंग के काम में भी हाथ डाल दिया।

रामगढ़ के इलाकों में कई बड़े मामलों के चलते 2005 में सुशील फिर से जेल गया और यहीं से भोला पांडेय की हत्या की साजिश रचने लगा। लेकिन 2006 में विकास तिवारी नाम के अपराधी ने भोला पांडेय के भतीजे किशोर पांडेय के साथ मिलकर सुशील के कई साथियों को मार दिया। हत्या के मामले में साल 2008 में विकास गिरफ्तार हुआ तो जेल गया। जब डेढ़ साल बाद बाहर आया तो पांडेय गैंग में बड़ा रुतबा मिला, लेकिन दूसरी तरफ जेल में रहते हुए सुशील ने 2010 में भोला पांडेय की हत्या करा दी।

भोला पांडेय की हत्या के बाद सुशील जेल से बाहर ही नहीं आया और अब वह जेल को ही सुरक्षित ठिकाना मानने लगा था। कुछ मामलों में पेशी के चलते 2 जून 2016 को सुशील श्रीवास्तव को जेल से हजारीबाग व्यवहार न्यायालय लाया गया। लेकिन कोर्ट परिसर में ही उसके ऊपर एके-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग कर उसे मौत के घाट उतार दिया गया। इस फायरिंग में सुशील के अलावा 3 और लोगों की भी मौत हो गई थी। सुशील श्रीवास्तव हत्याकांड के मामले में साल 2020 में 5 लोगों को आजीवान कारावास की सजा सुनाई गई थी।

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