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झारखंड में साइबर अपराधियों ने उड़ाई पुलिस की नींद, सीएम को धमकी भरा ई-मेल भेजने वाले अभी भी गिरफ्त से बाहर

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पिछले साल धमकी वाले मेल आए थे। इसके बाद पुलिस सतर्क हो गई थी, लेकिन करीब 10 महीने बाद भी पुलिस किसी की गिरफ्तारी नहीं कर पाई है। अभी भी जांच की जा रही है।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

झारखंड में साइबर क्राइम को लेकर एक वेब सीरीज भी बन चुकी है। सूबे के जामताड़ा पर बनी वेब सीरीज में दिखाया गया था कि आखिर कैसे अपराधी आम लोगों के अकाउंट से लाखों रुपए उड़ा देते हैं। अब इन अपराधियों ने झारखंड पुलिस की नाक में दम कर दिया है। अपराधियों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को धमकी भरा ई-मेल किया था। ये पूरी घटना पिछले साल की है।

सीएम हेमंत सोरेन को 8 जुलाई 2020, 17 जुलाई 2020 और 5 जनवरी 2021 को ये मेल किया गया था। इसके बाद से ही झारखंड पुलिस की नजर ऐसे अपराधियों पर थी। इसके अलावा अपराधियों ने तो झारखंड के डीजीपी तक को नहीं बख्शा था और उन्हें भी धमकी वाला मेल कर दिया था। टीवी9 के मुताबिक, झारखंड पुलिस की नाक में दम करने वाले ये अपराधी अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

झारखंड पुलिस से जब इस बारे में पूछा गया तो वह भी इन्हें पकड़ने में नाकाम ही नजर आई। पुलिस अधिकारियों ने जीमेल के विदेशी होने का हवाला दिया। उन्होंने कहा, ‘ज्यादातर मेल कंपनियां विदेशी ही हैं और इनसे जब ऐसे अपराध को रोकने के लिए जानकारी मांगी जाती है तो वह इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं देती हैं।’ इसके अलावा जामताड़ा को लेकर तो पहले ही अखबारों और टीवी सीरीज में ये नजर आ चुका है।

टीवी9 को झारखंड पुलिस ने बताया, ‘सीएम को मिलने वाले धमकी भरे ईमेल का पता भारत या इसके असापास का नहीं है बल्कि जर्मनी और स्विटजरलैंड का है। किसी भी ऐसे अपराध को पकड़ने के लिए आईपी एड्रेस का सहारा लिया जाता है। कंपनियां विदेशी हैं तो उनके सहयोग के बिना इन लोगों का पता लगाना थोड़ा मुश्किल भी हो सकता है। सीआईडी की टीम भी इसमें छानबीन कर रही है।’

न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, हेमंत सोरेन को मिले धमकी भरे मेल में कहा गया था, ‘सीएम आप ठीक नहीं कर रहे है और इसके लिए आपको सजा दी जाएगी।’ इस ईमेल के मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई थी और एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई थी। इस मामले की जानकारी तुरंत साइबर पुलिस को दे दी गई थी। हालांकि करीब दस महीने बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं।

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