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झारखंड लिंचिंग: पुलिस ने भी बाइक चोरी के ‘कबूलनामे’ का बनाया था वीडियो, लेकिन पीड़ित के साथ मारपीट की बातें छिपाईं

पुलिस ने अंसारी को 18 जून को चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था और न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। तबीयत बिगड़ने पर उसे सरायकेला-खारसावां जिले के सिविल अस्पताल और बाद में जमशेदपुर के टाटा मेन हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां 22 जून को उसकी मौत हो गई।

Author रांची | June 25, 2019 9:04 AM
झारखंड में तबरेज अंसारी के साथ 18 जून को मारपीट हुई थी। फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस

झारखंड के जमशेदपुर में मुस्लिम युवक तबरेज अंसारी को जय श्रीराम व जय हनुमान नहीं कहने पर पीटकर मार डालने के मामले में नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि भीड़ द्वारा पीटे जाने के कुछ घंटे बाद झारखंड पुलिस ने 22 वर्षीय युवक का बयान दर्ज किया था। बताया जा रहा है कि इस कबूलनामे का वीडियो हमलावरों ने अपने मोबाइल से बनाया था। इसमें बाइक चोरी कबूल करने की बात तो थी, लेकिन युवक के साथ हुई मारपीट का जिक्र तक नहीं किया गया।

पुलिस ने अंसारी को 18 जून को चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था और न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। तबीयत बिगड़ने पर उसे सरायकेला-खारसावां जिले के सिविल अस्पताल और बाद में जमशेदपुर के टाटा मेन हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां 22 जून को उसकी मौत हो गई। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने सोमवार (24 जून) को घाटकिडीह गांव के 11 लोगों को गिरफ्तार किया। बता दें कि इसी गांव में यह घटना हुई थी। वहीं, 2 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया।

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सरायकेला-खारसावां के एसपी एस कार्तिक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘‘युवक को पीटे जाने की सूचना मिलने के बाद गांव वालों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। एक आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि बाकी 10 बाद में दबोचे गए। जांच में सामने आया कि खारसावां थाने के इंचार्ज व एक एएसआई ने संवेदनशीलता के साथ मामले को नहीं संभाला। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को भी मामले की जानकारी नहीं दी।’’

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अंसारी के परिजनों ने पुलिस से पूछा है कि मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से पहले अंसारी के कबूलनामे में मारपीट का जिक्र क्यों नहीं है? बता दें कि मुस्लिम युवक के साथ मारपीट का जिक्र न तो पुलिस की एफआईआर में है और न ही घाटकिडीह निवासी कमल महतो की ओर से दर्ज कराई गई बाइक चोरी की शिकायत में। फिलहाल पुलिस ने महतो को भी लिंचिंग में भूमिका होने के चलते गिरफ्तार कर लिया है। एसपी ने बताया कि इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में 2 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं, डीसीपी रैंक के एक अफसर के नेतृत्व में बनी एसआईटी मामले की जांच कर रही है। अनुमान है कि अपने कबूलनामे के दौरान तबरेज ने ही पुलिस को कुछ नहीं बताया हो।

अंसारी के अंकल मकसूद आलम ने बताया, ‘‘जब मैं पुलिस थाने में अपने भतीजे से मिला था तो वह काफी कमजोर था और बात नहीं कर पा रहा था। मैं विश्वास ही नहीं कर सकता कि उसने पुलिस को खुद के साथ हुई मारपीट के बारे में नहीं बताया हो। पुलिस ने जानबूझकर इस पक्ष को छोड़ दिया। क्या पुलिस को दिखाई नहीं दे रहा था कि उसे कितनी बुरी तरह पीटा गया था? क्या डॉक्टरों को भी उसका दर्द नहीं दिखाई दे रहा था?’’

अपने बयान में अंसारी ने कहा था, ‘‘उसने अपने 2 साथियों नुमैर और इरफान के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था। उन्होंने दीवार लांघकर और छत पर चढ़कर गांव से बाइक चोरी की थी। इस बाइक पर रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं था। मैं एक घर में घुसा और पर्स चोरी कर लिया, जिसमें 200 रुपए थे। इसके बाद मैं दूसरे घर में चोरी की योजना बनाने लगा। इस घर में दरवाजे की आवाज सुनकर एक शख्स जाग गया और उसने शोर मचा दिया। इसके बाद हम सभी छत से कूद गए, लेकिन पैर में चोट लगने की वजह से मैं भाग नहीं सका। मैंने छिपने की कोशिश की, लेकिन गांव वालों ने मुझे पकड़ लिया।’’

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