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सबसे खतरनाक जेल से फरार हुए तीन कैदी, कागज, चम्मच और बाल का किया था इस्तेमाल

जेल से भागे तीन कैदियों की तलाश एक अनसुलझे मोड़ पर जाकर खत्म हुई। उस वक्त जेल के अफसरों ने कहा था कि उनकी नाव समुद्र पार नहीं कर सकती और समुद्र का पानी इतना ठंडा है कि कोई शख्स इस पानी में 20 मिनट से ज्यादा जिंदा नहीं रह सकता।

इस जेल को सबसे सुरक्षित माना जाता था। प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो सोर्स – indian express

चारों तरफ समुद्र का गहरा पानी और बीच में एक सुनसान टापू। इसी टापू पर बना था दुनिया का सबसे सख्त और महफूज जेल। जुर्म की किताब में दर्ज वो नाम जिनपर दर्ज थे कुछ बेहद ही संगीन जुर्म उन सभी को इसी जेल में कैद किया गया था। इस जेल को अमेरिका का काला पानी इसलिए कहा जाता था क्योंकि इस जेल की सुरक्षा को तोड़कर यहां से भागना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन भी माना जाता था। लेकिन जिस इतिहास के पन्ने में यह जेल सबसे सुरक्षित सलाखों के लिए जाना जाता था उसी पन्ने में दर्ज है उन तीन शातिर कैदियों का नाम जो इस जेल की सुरक्षा घेरा को तोड़कर फरार होने में कामयाब गए थे। यह कहानी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं। य़ह कैदी इस महफूज जेल से कैसे भागे? यह जानकर आप चौंक जाएंगे। जेल से भागने के बाद इन कैदियों का क्या हुआ यह जानकारी भी आपको हैरत में डाल देगी।

यह कहानी है साल 1962 की। जॉन और क्लैरेंस दो भाई इस जेल में उस वक्त सजा काट रहे थे। इन दोनों की गहरी दोस्ती जेल में ही सजा भुगत रहे मॉरिस और एलन नाम के दो अन्य कैदियों से थी। यह चारों कैदी जेल में अक्सर एक साथ ही नजर आते थे। दरअसल तब किसी को अंदाजा नहीं था कि यह चारों जेल से भागने की साजिशें रचा करते थे। इन चारों कैदियों में से मॉरिस पहले लुइसियाना जेल से भी भाग चुका था और इस जेल में भी वो पहले बंदी बनकर रह चुका था। जाहिर है मॉरिस इस जेल के चप्पे-चप्पे से वाकिफ था। कहा जाता है कि मॉरिस ने ही जेल के सुरक्षा चक्रव्यूह को तोड़ने का मास्टर प्लान बनाया था। जॉन और क्लैरेंस अच्छे तैराक थे और मॉरिस अपने काम में किसी भी कीमत पर इनकी मदद हासिल करना चाहता था। एलन इस ग्रुप में इसलिए शामिल हुआ था क्योंकि वो जेल से आजाद होने के सपने देखा करता था। चारों कैदियों ने जेल से भागने का जो मास्टर प्लान बनाया था उसे अमलीजामा पहनाने के लिए उन्हें कुछ हथियारों की जरुरत थी।

इस योजना को अंजाम तक पहुंचाने के लिए जॉन और क्लैरेंस भाइयों ने इंसान के पुतले बनाने का काम अपने जिम्मे लिया। इस मुखैटे को बनाने के लिए इन दोनों ने जेल में कैदियों के कटे बालों का गुच्छा जुटाया था। इसके अलावा कुछ कागज और लकड़ियों की मदद से उन्होंने पुतला बनाया था। मॉरिस ने जेल में बेकार पड़े वाद्य यंत्र अकॉर्डियन को ठीक करने की बात कह कर उसे अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद सबने मिलकर रेनकोट्स चुराए और रेनकोट्स तथा अकॉर्डियन की मदद से उन्होंने नावनुमा चीज बनाई जो समुद्र पार करने में इनकी सहायता करने वाली थी। इन सभी ने जेल से चम्मच और बटर नाइफ जैसे बर्तन भी चुराए।

जेल में पानी की सप्लाई पाइपों के जरिए की जाती थी। यह पाइप हर बैरक की दीवारों से होकर गुजरते थे। इन पाइपों में समुद्र का खारा पानी आता था जिसकी वजह से जेल के अंदर दीवारें कहीं-कही थोड़ी कमजोर हो गई थीं। मॉरिस ने जेल से आजाद होने के रास्ते के रुप में अपनी कोठरी की दीवारों को चुना और अपने साथियों को कोठरी की दीवार में पाइप वाले हिस्से की तरफ से एक छेद करने को कहा। यह चारों हर रोज तीन से चार घंटे छोटी-छोटी चम्मचों और बर्तनों से मोटी दीवार को तोड़कर छेद बनाने का काम करते थे। यह काम करते हुए शोर ना हो और प्रहरियों तक दीवार तोड़ने की आवाज ना जाए इसलिए मॉरिस इस दौरान पूरे शोर के साथ अकॉर्डियन बजाया करता था। इंसान के पुतले का इस्तेमाल वो रात के अंधेरे में प्रहरियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए किया करते थे। अक्सर दोनों भाई अपनी कोठरी में इन पुतलों को रखकर मॉरिस की मदद करने उसकी कोठरी में जाया करते थे।

कई दिनों तक मेहनत के बाद जून 1962 में वो रात आज जब दीवार में काफी बड़ा छेद तैयार हो चुका था और इसी रात के अंधेरे में इन्होंने इस छेद से होकर जेल से बाहर जाने का मन बना लिया। जॉन, क्लैरेंस और मॉरिस इस छेद से आसानी से बाहर निकल गए लेकिन एलन इस छेद में फंस गया। उस वक्त तीनों एलन को छोड़कर जेल से भाग गए। हालांकि एलन ने अपने दोस्तों से मदद मांगी थी पर उन्होंने इनकार कर दिया और उससे शोर ना मचाने की गुजारिश भी की थी। यह प्लान कामयाब हुआ और जॉन, क्लैरेंस तथा मॉरिस जेल की दीवारों में सेंध लगाकर बाहर आ गए। उस रात करीब साढ़े 11 बजे यह तीनों अपनी बनाई नाव पर सवार होकर समुद्र में उतर चुके थे।

सुबह होते ही जेल के प्रहरियों को जेल ब्रेक की खबर मिल गई। एलन पकड़ा गया। लेकिन इसके बाद शुरू हुई जेल से भागे तीन कैदियों की तलाश एक अनसुलझे मोड़ पर जाकर खत्म हुई। उस वक्त जेल के अफसरों ने कहा था कि उनकी नाव समुद्र पार नहीं कर सकती और समुद्र का पानी इतना ठंडा है कि कोई शख्स इस पानी में 20 मिनट से ज्यादा जिंदा नहीं रह सकता। हालांकि काफी वक्त तक तलाश के बाद टापू या समुद्र में इन तीनों कैदियों का कोई सुराग नहीं मिला। कहा जाता है कि कुछ समय बाद नार्वे की एक जहाज ने समुद्र में एक लाश देखी थी जिसके बदन पर कैदियों के कपड़े होने का अंदेशा जताया गया था। हालांकि उस शव को पानी से बाहर नहीं लाया जा सका।

यह केस एफबीआई के पास था और सालों तक इस केस की छानबीन होती रही। 15 साल तक चली लंबी जांच के बाद एफबीआई ने यह कहा कि तीनों समुद्र में डूबकर मर गए और फिर इस मामले को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। लेकिन साल 2015 में प्रसारित की गई एक डॉक्यूमेंट्री में यह दावा किया गया था कि तीनों कैदी जेल से भागने में कामयाब हो गए थे और उन्होंने अपनी पूरी जिदंगी भी जी थी। एक चिट्ठी भी सामने आई थी जिसके बारे में कहा गया था कि यह चिट्ठी रॉबर्ट और उसके भाइयों के बीच हुई बातचीत का अंश था। साल 2013 में जॉन और क्लैरेंस के तीसरे भाई रॉबर्ट ने खुलासा किया था कि जेल से भागने के बाद उसके दोनों भाई जिंदा थे और वो उनके संपर्क में था। बहरहाल बता दें कि साल 1963 में इस जेल को हमेशा-हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। आखिरी वक्त तक जेल में गार्ड रहे जिम ने साल 2018 में एक बयान में कहा था कि उन्हें हमेशा लगता है कि उन तीनों की समुद्र में डूबकर मौत हो गई थी। (और…CRIME NEWS)

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