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International Kidney Racket: पकड़ी गई फोर्टिस अस्पताल की महिला कर्मचारी, सरगना की तलाश जारी

International Kidney Racket: किडनी रैकेट से जुड़े लोगों की पहली पसंद नेपाल था क्योंकि वहां से आने-जाने के लिए न तो वीजा की जरूरत है और न ही पासपोर्ट की।

kidney racket, kidney, crime, crime newsलीवर की कीमत 70 लाख रुपए तक होती थी लेकिन डोनर्स को सिर्फ 2-3 लाख रुपए मिलते थे। प्रतीकात्मक तस्वीऱ।

International Kidney Racket: किडनी ले लो, लीवर ले लो… लाखों में बिक रहे हैं इंसान के अंग दौलत है तो ले लो! उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट के खुलासे के बाद से अब तक इस घिनौने सौदे के खेल के कई बड़े खिलाड़ी यानी नामी चिकित्सक पकड़े गए हैं। किडनी की सौदगरी के इस खेल में अब नाम आया है प्रतिष्ठित अस्पताल फोर्टिस की एक महिला कर्मचारी का। बीते मंगलवार (11 अप्रैल, 2019) को उत्तर प्रदेश की पुलिस ने फरीदाबाद स्थित इस अस्पताल की एक कर्मचारी सोनिका डबास को पकड़ा है। सोनिका इस अस्पताल में ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर के पद पर तैनात थीं। देश में एक अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट के खुलासे के बाद अब तक की यह 12वीं गिरफ्तारी है।

अस्पताल की फाइल में दर्ज हैं फर्जी नाम: दरअसल इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए कुछ सौदागरों ने फोर्टिस अस्पताल की कर्मचारी सोनिका डबास का नाम उगला था। इसी के बाद से सोनिका जांच टीम के रडार पर थी। जांच टीम को अंदेशा था कि जरा भी भनक लगने पर सोनिका अंडरग्राउंड हो सकती है लिहाजा टीम ने खामोशी के साथ अचानक फरीदाबाद पहुंचकर उसे पकड़ा। जांच के दौरान पुलिस ने किडनी के मरीजों से जुड़ी अस्पताल की एक फाइल देखी तो यह देखकर चौंक गई कि फाइल में किडनी के मरीज के नाम पर दो नाम दर्ज हैं – तीरथ पाल और अरुण कुमार। इसके अलावा कुछ किडनी डोनर्स के नाम भी दर्ज थे। लेकिन शुरुआती जांच में यह सभी नाम फर्जी पाए गए। यह सभी फाइल सोनिका की देखरेख में तैयार की गई थीं। जिसके बाद जांच टीम ने उसे पकड़ लिया।

SIT कर रही जांच: मानव अंग के विदेशों में तस्करी से जुड़े इस सबसे बड़े रैकेट की जांच एसआईटी कर रही है। कानपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनंत देव की निगरानी में यह जांच चल रही है। जांच टीम को अंदेशा है कि इसके तार तुर्की तथा पश्चिम एशिया समेत अन्य देशों से जुड़े हो सकते हैं। सोनिका से पहले प्रतिष्ठित पुष्पावति सिंघानिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (PSRI) के सीईओ डॉक्टर दीपक शुक्ला को गिरफ्तार किया था। साल 2017 में दिल्ली पुलिस ने किडनी की खरीद-फरोख्त में शामिल एक महिला सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इनकी गिरफ्तारी के बाद इन लोगों ने उस वक्त दीपक शुक्ला का नाम लिया था।

सरगना की तलाश जारी: देश के बड़े अस्पतालों से मरीजों की किडनी निकाल विदेशों में बेचने के इस बड़़े मामले में पुलिस को अब डॉक्टर केतन कौशिक की तलाश है। कहा जा रहा है कि केतन इस पूरे डर्टी गेम का मास्टर माइंड हो सकता है। जानकारी के मुताबिक केतन कौशिक ही वो शख्स है जो श्रीलंका, तुर्की और गल्फ के अन्य देशों से मरीजों को इन अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लाता था।

कई और हैं रडार पर: तुर्की से लेकर मध्य पूर्व तक फैले अंतर्राष्ट्रीय किडनी रैकेट के मद्देनजर निजी अस्पतालों में या निजी प्रैक्टिस करने वाले दिल्ली के प्रमुख यूरोलॉजिस्ट से लेकर करीब दर्जन भर से ऊपर सर्जन पर उत्तर प्रदेश पुलिस की निगाह बनी हुई है। इस मामले की जांच की निगरानी कर रहे उत्तर प्रदेश काडर के आईपीएस अधिकारी अनंत देव ने बताया था कि डॉक्टरों द्वारा गरीब लोगों से धोखाधड़ी का मामला फोर्टिस के अलावा पीएसआरआई और मध्य दिल्ली के एक और अस्पताल में आया है। इसमें अस्पताल प्रशासन और मध्यस्थ की भूमिका भी सामने आई है।

कई देशों से जुड़े हैं तार: पुलिस ने बताया इससे पहले बताया था कि गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल वाट्सअप ग्रुप चैट से कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस का दावा है कि नेपाल में कम दामों में तय करके डोनर दिल्ली बुलाए जाते थे। किडनी रैकेट से जुड़े लोगों की पहली पसंद नेपाल था क्योंकि वहां से आने-जाने के लिए न तो वीजा की जरूरत है और न ही पासपोर्ट की। पुलिस आरोपियों के वाट्सअप, फेसबुक अकाउंट की जांच कर रही है। कानपुर पुलिस के अनुसार नेपाल के अलावा तुर्की और श्रीलंका का नाम भी सामने आया है। इन देशों को लेकर जानकारियां जुटाई जा रही हैं। इन देशों से मरीजों को लाया जाता था। पुलिस ने बताया कि बिचौलियों की मदद से पीएसआरआइ में गरीब लोग लाए जाते थे और फिर फर्जी पैथालॉजिकल रिपोर्ट तैयार कर डोनेशन के कागज बनाए जाते थे।

ऐसे हुआ खुलासा: दरअसल इस गिरोह के सदस्यों ने इसी साल जनवरी के महीने में कानपुर की एक महिला को काम दिलाने के बहाने गाजियाबाद लाया था। यहां आने के बाद महिला को किडनी और लीवर बेचने का लालच दिया गया था। यह महिला किसी तरह कानपुर पहुंची और उसने यहां फरवरी के महीने में अपनी FIR दर्ज करवाई। शुरुआती जांच में पता चला कि इस रैकेट के तहत अमीरों से किडनी बदलवाने के एवज में 30 लाख रुपए और लिवर के हिस्से के बदले 80 रुपए लिए जाते थे। हैरान करने वाली बात यह है कि किडनी डोनर्स यानी गरीबों को सिर्फ 7-8 लाख रुपए दिए जाते थे। शिकायत मिलते ही कानपुर पुलिस ने इस मामले में लखीमपुर खिरी के रहने वाले गौरव मिश्रा, कोलकाता के टी राजकुमार राव, दिल्ली के बदरपुर के रहने वाले शैलेश सक्सेना, लखनऊ निवासी साबूर अहमद, शमशाद अली और कानपुर के रहने वाले विक्की सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। (और…CRIME NEWS)

 

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