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‘खालिद मुन्नाभाई गैंग से हैं, 10-10 लाख भेजो, वरना बना देंगे अपाहिज’ कोचिंग संचालक ने मैसेज भेज कारोबारियों से मांगी रंगदारी

एसएसपी ने बताया कि पुलिस को मामले की जांच में पता चला है कि आरोपी सूबे के आला अधिकारियों को भी वारदात के इसी तरीके से धमकाकर उनसे अवैध वसूली की फिराक में थे।

Author इंदौर | November 26, 2019 7:56 PM
indoreप्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

मध्यप्रदेश के इंदौर में पुलिस ने ‘मुन्नाभाई गैंग’ के सदस्यों को पकड़ कर इस गैग का खुलासा किया है। बता दें कि खुद को बिहार के गिरोह के सदस्य बताकर स्थानीय रीयल एस्टेट कारोबारियों से फिरौती मांगने के आरोप में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले में आरोपी कोचिंग क्लास के डायरेक्टर और उसके साथी शिक्षक को पुलिस ने सोमवार (25 नवंबर) को धर दबोचा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रुचिवर्धन मिश्र ने संवाददाताओं को बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आनंदम कोचिंग क्लास के डायरेक्टर आनंद अग्रवाल (49) और इस संस्थान में अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षक संतोष मीणा (30) के रूप में हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

वॉट्सऐप पर मैसेज भेज दी गई थी धमकीः रुचिवर्धन मिश्र ने बताया कि दोनों आरोपियों ने खुद को बिहार के ‘खालिद मुन्नाभाई गिरोह’ के सदस्य बताकर शहर के कुछ रीयल एस्टेट कारोबारियों को वॉट्सऐप पर वॉइस मैसेज भेजे थे। इन संदेशों में धमकी दी गई थी कि अगर कारोबारियों ने बताए गए बैंक खातों में ‘प्रोटेक्शन मनी’ के रूप में 10-10 लाख रुपए जमा नहीं कराए, तो उनके हाथ-पैर तोड़कर उन्हें अपाहिज बना दिया जायेगा।

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उनके पास से फर्जी सिक कार्ड समेत जाली बैंक खाते भी मिलेः एसएसपी ने बताया कि आरोपियों ने वॉइस मैसेज भेजने से पहले हिन्दी बोलने के बिहारी लहजे का कई बार अभ्यास भी किया था, ताकि उनके ‘शिकारों’ को भरोसा हो सके कि वे बिहार से ही बात कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी इस गोरखधंधे में फर्जी पहचान वाले सिम कार्ड का उपयोग करते थे। उन्होंने इस अवैध वसूली का धन प्राप्त करने के लिए अन्य लोगों के नाम पर जालसाजी से बैंक खाते भी खुलवाए थे।

आला अधिकारियों पर भी था निशानाः एसएसपी ने बताया कि पुलिस को मामले की जांच में पता चला है कि आरोपी सूबे के आला अधिकारियों को भी वारदात के इसी तरीके से धमकाकर उनसे अवैध वसूली की फिराक में थे। इसके लिए उन्होंने इंदौर के साथ ही देवास और उज्जैन जैसे पड़ोसी जिलों में शासकीय अधिकारियों की कॉलोनियों मे घूम-घूमकर घरों के बाहर लगी नेमप्लेटों की जानकारी नोट की थी। मामले में विस्तृत जांच जारी है।

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