कहां लापता हो गए भारत के ये सबसे बड़े खजाने, अरबों के हीरे-जवाहरात का आजतक नहीं चला पता

भारत में मौजूद कई खजाने ऐसे हैं जिसके बारे में आजतक सही से कुछ पता नहीं चल पाया है। कई खजाने गुफाओं में तो कुछ महलों और कुछ सुरंगों में आज भी दबे हुए हैं। कुछ खजानों के लिए तो कोशिशें भी हुईं लेकिन नाकामी ही हाथ लगी।

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भारत में छुपा है अरबों का खजाना (प्रतिकात्मक फोटो-@pixabay)

एक समय भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। देश में हीरे जवाहरात और अमूल्य वस्तुओं के कई खजाने थे। कई खजाने विदेशी आक्रमणकारियों के हाथ लग गए तो कई का आज तक पता ही नहीं चल पाया है। कुछ तो समय के परिवर्तन के साथ कहीं खो गए।

आज हम आपको ऐसे ही खजानों की कहानी बता रहे हैं, जिसका पता आज तक नहीं चल पाया है। 500 साल पहले गायब हुए मानसिंह के खजाने से लेकर राजगीर का खजाना आज भी रहस्य बना हुआ है।

मानसिंह प्रथम का खजाना- मानसिंह प्रथम अकबर की सेना के सेनापति और जयपुर के पूर्व शासक थे। वह अकबर के शाही दरबार के नवरत्नों में से एक थे। माना जाता है कि 1580 के दशक में वे अफगानिस्तान से मुहम्मद गजनी का खजाना लेकर भारत आए थे। इस खजाने को उन्होंने अकबर को नहीं दिया बल्कि जयगढ़ किले में छिपा दिया। कुछ लोगों का मानना ​​है कि खजाने को किले के प्रांगण के भूमिगत टंकियों में रखा गया था। इस खजाने की खोज में आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किले में खोदाई का आदेश दिया था। बाद में बताया गया कि कुछ नहीं मिला, हालांकि सरकार के इस दावे पर विपक्ष हमेशा से सवाल उठाता रहा है।

सोनभंडार गुफा, बिहार– सोनभंडार की गुफाएं बिहार के राजगीर में स्थित है। यहां दो अजीबो गरीब गुफा हैं। जो एक ही विशाल चट्टान से बनी हुई हैं। पश्चिमी गुफा में मौजूद शिलालेखों से यह अनुमान लगाया गया है कि यह कम से कम तीसरी-चौथी शताब्दी ईस्वा पूर्व की है। माना जाता है कि पश्चिमी गुफा सुरक्षा गार्ड के लिए थी। यह गुफा राजा बिंबिसार के खजाने की ओर जाता है। यह भी कहा जाता है कि पश्चिमी गुफा की दीवार पर उकेरे गए शंख लिपि में लिखे शिलालेख एक तरह का कोडवर्ड है, और इसी को सुलझाने से खजाने का दरवाजा खुल सकता है।

कहा जाता है कि इस खजाने में उस समय के हीरे-जवाहरात रखे हुए हैं। एक बार ब्रिटिश सेना ने तोप से गोले बरसाकर इसे खोले की कोशिश की थी, लेकिन वे असफल रहे। गोले के निशान अभी भी देखे जा सकते हैं। हालांकि ब्रिटिश सेना भी असफल रही और ये खजाना आज भी रहस्य बना हुआ है।

नादिर शाह का खजाना– फारसी आक्रमणकारी नादिर शाह ने 1739 में भारत पर हमला किया था और करीब 50 हजार की सेना के साथ दिल्ली में प्रवेश किया था। नादिर के लोगों द्वारा तब जमकर लूटपाट की गई थी। हजारों लोग मारे गए थे। कहा जाता है कि लूट इतनी बड़ी थी कि ईरान वापस जाते समय उसके खजाने का कारवां 150 मील तक लंबा था।

वापसी के समय नादिर शाह के एक खास साथी अहमद शाह ने ही उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद वो खजाना लेकर गायब हो गया। कुछ दिनों बाद उसने भी बीमारी के कारण दम तोड़ दिया। यह माना जाता है कि अहमद शाह ने किसी भूलभुलैया में उस खजाने को छुपा दिया था। इस खजाने के बारे में भी आजतक किसी को पता नहीं चल पाया है।

हालांकि इस लूट में शामिल कुछ चीजें जैसे पवित्र मयूर सिंहासन (अब ईरान में) और काल्पनिक कोहिनूर हीरा शामिल भी था, जो आज ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स में लगा हुआ है।

चारमीनार सुरंग, हैदराबाद– माना जाता है कि चारमीनार और गोलकुंडा किले को जोड़ने वाली सुरंग में खजाने छिपे हैं। ये सुरंग सुल्तान मोहम्मद कुली कुतुब शाह द्वारा बनवाई गई थी। सुरंग इसलिए तैयार करवाई गई थी ताकि मुश्किल समय में इससे राजपरिवार बाहर निकल सके। साथ ही ये भी माना जाता रहा है कि इस सुरंग में शाही परिवार ने अपना खजाना भी छुपाया था। इसमें बने तहखानों में अरबों के हीरे जवाहरात रखवाए गए थे। इस खजाने तक भी आजतक कोई नहीं पहुंच पाया है।

कृष्णा नदी का खजाना, आंध्र प्रदेश– दुनिया के कुछ बेहतरीन हीरे, कोल्लूर में कृष्णा नदी के तट पर मिले थे। कोहिनूर हीरा भी यहीं से मिला था। माना जाता है कि यहां पर अभी भी हीरों का खान है। गोलकुंडा प्राकृतिक रूप से बना एक ऐसा खजाना है जहां हीरों की भरमार है। ये भी कहा जाता है कि यहां इतने हीरे हैं कि कृष्णा नदी के रेत से भी छोटे-छोटे हीरे निकाले जा सकते हैं। हालांकि इस प्राकृतिक खजाने को भी खोजने के लिए ज्यादा प्रयास नहीं किए गए हैं, और इसका रहस्य अभी भी बरकरार है।

मीर उस्मान अली का खजाना- मीर उस्मान अली हैदराबाद के अंतिम निजाम थे। 2008 में फोर्ब्स पत्रिका ने निजाम को 210.8 बिलियन डॉलर की कुल संपत्ति के साथ पांचवें सबसे धनी व्यक्ति के रूप में बताया था। टाइम पत्रिका ने उन्हें 1937 में दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति कहा था।

1911 में जब मीर उस्मान अली को गद्दी मिली तब उनके पिता की असाधारण जीवन शैली के कारण राज्य का खजाना लगभग खाली था। अपने 37 साल के शासन में, उसने राज्य के वित्त को फिर से पटरी पर पहुंचाया और शानदार व्यक्तिगत संपत्ति अर्जित की। कहा जाता है कि उन्होंने अपना खजाना किंग कोठी पैलेस के भूमिगत कक्षों में रखवाया था। इसी किले में उन्होंने अपना अधिकांश जीवन बिताया था। उनके खजाने में माणिक, हीरे, मोती, नीलम और अन्य कीमती पत्थरों से जड़े प्रसिद्ध निजाम आभूषण थे, जो सोने और चांदी में खूबसूरती से जड़े हुए थे। एक समय इन्होंने भारत सरकार को 5 टन सोना देकर मदद की थी। इससे पहले हैदराबाद पर कब्जे के समय भी भारत सरकार ने यहां से करोड़ों रुपये जब्त कर लिए थे। इसके बाद भी उनके पास संपत्ति की कमी नहीं थी। निजाम के मरने के बाद उन खजानों के बारे में आजतक पता नहीं चल पाया जो उस समय उनके पास थे।

श्री मोक्कम्बिका मंदिर, कर्नाटक– यह मंदिर कर्नाटक के पश्चिमी घाट के कोल्लूर की तलहटी में स्थित है। मंदिर की वार्षिक आय 17 करोड़ रुपये है लेकिन मंदिर के रखरखाव में 35 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होता है। ये पैसे कहां से आते हैं किसी को पता नहीं। मंदिर के पुजारियों का मानना ​​है कि मंदिर में नाग का प्रतीक, मंदिर के नीचे छिपे बड़े खजाने का स्पष्ट संकेत है। सर्प बाहरी लोगों से खजाने की रक्षा करने के लिए है।

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