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जासूसी के लिए भारतीय सीमा में याक भेज रहा चीन? अचानक संख्या बढ़ने से बढ़ी आशंका

जानवरों से जासूसी कराए जाने की बातें कई बार सामने आई हैं। पिछले ही साल अप्रैल के महीने में नॉर्वे कोस्ट के पास एक Beluga Whale को पकड़ा गया था। इस व्हेल के सिर पर कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक सामान लगे हुए थे।

india, china, yakचीनी सीमा से कुछ जानवर भारतीय सीमा में प्रवेश कर गए थे। फाइल फोटो

भारत-चीन के बीच सीमा पर तनाव का माहौल है। इस बीच ऐसी आशंका जताई जा रही है कि चीन Yak के जरिए भारतीय सीमा में जासूसी कराने की कोशिश कर रहा है। दरअसल 31 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा के पास से Yak का झुंड गुजरा। चीन की तरफ से आया जानवरों का यह झुंड सीमा पार कर भारतीय सीमा में आ गया। इसी सप्ताह भारतीय सेना ने मानवता के आधार इन सभी जानवरों को उनके चीनी मालिकों को सौंप दिया है। खास बात यह भी है कि 7 दिनों तक भारतीय जवानों ने ही इन जानवरों की देखभाल की है।

हाल के दिनों में लद्दाख में पैंगॉन्ग झील से सटी सीमा के पास जिस तरह से चीन ने हरकत की है उससे यह आशंका गहराने लगी है कि क्या यह जानवर सिर्फ गलती से भारतीय सीमा में प्रवेश कर गए थे ? या फिर इनके जरिए चीन जासूसी कर रहा है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि क्या यह जानवर जासूसी सामानों से लैस थे? यहां आपको बता दें कि 20वीं सदी के आसपास जानवरों का इस्तेमाल इस तरह से जासूसी के लिए किया जाता था।

जानवरों से जासूसी कराए जाने की बातें कई बार सामने आई हैं। पिछले ही साल अप्रैल के महीने में नॉर्वे कोस्ट के पास एक Beluga Whale को पकड़ा गया था। इस व्हेल के सिर पर कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक सामान लगे हुए थे। पता चला था कि इसके जरिए सिग्नल्स और इंजेलिजेंस भेजे जा रहे थे।

डॉल्फिन और बिल्ली का इस्तेमाल: यूएस नेवी कई दशकों से प्रशिक्षित डॉल्फिन के जरिए पानी के अंदर बिछाए गए माइन्स और सबमैरिन को खोजने के लिए करता रहा है। Sea lions का इस्तेमाल भी इस तरह के कामों में किया जाता है। कुछ कागजातों के आधार पर यह भी कहा जाता है कि CIA पालतू बिल्लियों का इस्तेमाल भी ऑडियो रिकॉर्डिंग इत्यादि हासिल करने के लिए करता आया है।

शार्क को हमला करने का प्रशिक्षण: यूएस सरकार को लेकर साल 2016 में एक रिपोर्ट आई थी कि यहां शार्क को पानी के अंदर हमला करने के लिए तैयार किया जा रहा है। हालांकि इस प्रशिक्षण के क्या नतीजे रहे यह सामने नहीं आ पाया था। इजरायल पर भी जानवरों का इस्तेमाल जासूस के तौर पर करने का आऱोप लगता रहा है। साल 2007 में इरान ने अपने न्यूक्लियर फैसिलिटी के आसपास के इलाकों से कुछ गिलहरियों को पकड़ा था औऱ उस वक्त आरोप लगा था कि इजरायल इनका इस्तेमाल जासूसी के लिए करता है।

गिद्धों के जरिए निगेहबानी: सऊदी अरब पर आरोप लगते रहे हैं कि वो गिद्धों का इस्तेमाल पड़ोसी देशों की सीमाओं की निगरानी के लिए करता आय़ा है। कहा जाता है कि इन पंछियों के पास विशेष कैमरे होते हैं जिनकी जरिए नजर रखी जाती है। साल 2011 में एक गिद्ध को पकड़ा गया था और उसके एक पैर पर Tel Aviv University का टैग भी लगा था। सू़डान ने भी इस तरह का गिद्ध पकड़ा था और कहा था कि गिद्ध के शरीर पर कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस लगे हुए थे।

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