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LIC के क्लर्क से भगवान विष्णु के अवतार तक, जानिए करोड़ों की संपत्ति वाले कौन हैं धर्मगुरु कल्कि महाराज

1980 की शुरुआत में विजयकुमार औऱ उनके एक साथी शंकर ने बेंगलुरु स्थित वैली स्कूल के साथ जुड़कर इसके प्रशासकीय विभाग में काम किया था। हालांकि साल 1984 में स्कूल प्रबंधन ने इन दोनों को स्कूल से निकाल दिया था

कल्कि महाराज की पत्नी ने खुद को ‘भगवती’ बताया था।

कभी LIC एजेंट के तौर पर नौकरी करने वाले विजय कुमार नायडू जब ‘कल्कि महाराज’ बने तो उनके कई अनुयायी बनते चले गए। हाल ही में ‘कल्कि महाराज’ के आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक स्थित इनके अलग-अलग ठिकानों पर इंकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पांच दिनों तक छापेमारी की और करीब 600 करोड़ रुपए की अघोषित संपत्ति भी बरामद किये। इसमें 20 करोड़ मूल्य के अमेरिकी डॉलर भी शामिल थे। कल्कि महाराज के पास यह पैसे कहां से आए..? इस सवाल का जवाब कानून अपने तरीके से उनसे लेगा। हम आपको आज बताते हैं कि कैसे एक साधारण एलआईसी कलर्क ‘भगवान विष्णु’ का दसवां अवतार माने जाने वाला ‘भगवान कल्कि’ बन गया।

वर्ष 1990 और 2000 के शुरुआत में दक्षिण भारत में ‘कल्कि’ काफी मशहूर हुए थे। इसके बाद धीरे-धीरे उनके रसूख में कमी आने लगी और लोग उनके बारे में कम बातचीत करने लगे। पिछले 10 वर्षों में यहीं देखने को मिला कि ‘कल्कि’ अपने शिष्यों से घिरे रहते थे और खुद को ज्यादा प्रचारित नहीं करते थे। हालांकि ऐसा लगता है कि शायद आईटी विभाग ‘कल्कि’ को नहीं भूली थी।

कल्कि महाराज का असली नाम वी विजयकुमार है। वर्ष 1990 में उन्होंने खुद को भगवान की उपाधि दी थी। साल 1980 में उन्होंने कर्नाटक के शराब कारोबारी हरी खोड़े की मदद से आंध्र प्रदेश के चित्तुर में एक आवासीय विद्यालय खोला। यह स्कूल फिलॉस्पर Jiddu Krishnamurthy’s Valley School के सिद्धांतों पर आधारित था। इससे पहले वो लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में क्लर्क थें।

1980 की शुरुआत में विजयकुमार औऱ उनके एक साथी शंकर ने बेंगलुरु स्थित वैली स्कूल के साथ जुड़कर इसके प्रशासकीय विभाग में काम किया था। हालांकि साल 1984 में स्कूल प्रबंधन ने इन दोनों को स्कूल से निकाल दिया था और स्कूल से निकाले जाने की वजह नहीं बताई थी। साल 1990 में ‘कल्कि’ के स्कूल के छात्रों ने दावा किया कि उन्होंने अपने स्कूल में कई अनोखी और जादू जैसी चीजें देखी हैं।

उस वक्त यह स्कूल काफी सुर्खियों में आय़ा था। चर्चा में आने के बाद ‘कल्कि’ ने अपना स्कूल बंद कर दिया और एक आश्रम खोल लिया। जल्दी ही यह आश्रम एक आध्यात्मिक केंद्र बन गया जो करीब 50 एकड़ में फैला था। साल 2002 में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उनके आश्रम के पास 300 करोड़ रुपए हैं। साल 2010 आते-आते उनके फॉलोअर्स की संख्या काफी बढ़ गई।

इसके बाद ‘कल्कि’ की पत्नी पद्मावती ने भी दावा किया कि उनके पास भी आध्यात्मिक शक्ति है और उन्होंने अपने शिष्यों से उनके भक्त उन्हें ‘भगवती’ कहने लगे था। इन दोनों के बच्चों ने भी दावा किया कि उनके पास अपने माता-पिता की तरह की चमत्कारिक शक्तियां हैं।

दूसरे अन्य धर्मगुरुओं के शिष्यों की तरह ही ‘कल्कि’ के शिष्य भी यहीं समझते हैं कि उनके गुरु उन्हें कैंसर और किडनी से जुड़ी अन्य बीमारियों से चमत्कार के जरिए निजात दिला सकते हैं। ‘कल्कि’ अपने शिष्यों को भी काफी कम नजर आते थे और कभी-कभी तो छह महीने के बाद।

आपको याद दिला दें कि कल्कि महाराज ने कभी कहा था कि उन्होंने एक क्रिश्चन में जीसस को देखा है तथा हिंदू में भगवान राम को देखा है। हालांकि कल्कि का विवादों से पुराना नाता है। उनपर आरोप लगे थे कि उन्होंने अपने बच्चों को जबरदस्ती आश्रम में रखा था। (और…CRIME NEWS)

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