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हिंदू समाज पार्टी के नेता की हत्याः जानें कौन थे कमलेश तिवारी? विवादों से रहा है पुराना नाता

Hindu Mahasabha leader Kamlesh Tiwari Murder in Lucknow: भगवा कपड़े पहले 2 बदमाशों ने पहले चाकू से उनका गला रेता और उसके बाद गोली मार दी। बताया जा रहा है कि बदमाश मिठाई के डिब्बे में असलहा व चाकू छिपाकर लाए थे।

Author लखनऊ | Updated: October 18, 2019 5:23 PM
हिन्दू महासभा के नेता कमलेश तिवारी फोटो सोर्स- फेसबुक/Kamlesh Tiwari

Hindu Mahasabha leader Kamlesh Tiwari Murder: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में क्राइम का खूंखार चेहरा एक बार फिर नजर आया। यहां हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी को उनके ही कार्यालय में घुसकर जान से मार दिया गया। भगवा कपड़े पहले 2 बदमाशों ने पहले चाकू से उनका गला रेता और उसके बाद गोली मार दी। बताया जा रहा है कि बदमाश मिठाई के डिब्बे में असलहा व चाकू छिपाकर लाए थे। बता दें कि विवादों और कमलेश का चोली दामन का साथ रहा है। कुछ समय पहले पैगंबर पर विवादित टिप्पणी करने को लेकर वह चर्चा में आए थे। मामले में पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे एसएसपी ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी होगी।

इन विवादों से जुड़ा है कमलेश का नाता: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के रहने वाले कमलेश लगातार विवादों में रहते थे। इसके चलते उन्हें 2 बार गिरफ्तार भी किया गया था। बताया जाता है कि वह कुछ पत्रकारों को भी धमका चुके थे। साथ ही, काशी विश्वनाथ मंदिर के एरिया में स्थित मस्जिद को लेकर भी उन्होंने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

गोडसे का मंदिर बनवाने की मांग भी की थी: बता दें कि उत्तर प्रदेश में कमलेश तिवारी की छवि कट्टर हिंदू नेता की थी। एक बार उन्होंने उन्‍होंने महात्‍मा गांधी के हत्‍यारे नाथूराम गोडसे के सम्‍मान में मंदिर बनवाने का भी ऐलान किया था, जिस पर काफी विवाद भी हुआ था।
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कमलेश के सिर पर रखा गया था 51 लाख का इनाम: बता दें कि 2015 में कमलेश ने विवादित बयान दिया था, जिसके बाद यूपी खासकर लखनऊ में खूब हो-हल्ला मचा था। इसके विरोध में रैली भी निकाली गई थी। वहीं, बिजनौर में जमीयत शाबाबुल इस्‍लाम के जनरल सेक्रेटरी मौलाना अनवरुल हक ने कमलेश तिवारी के सिर पर 51 लाख रुपए का इनाम रख दिया था।

सुरक्षा में ढिलाई का आरोप: कमलेश के समर्थकों का कहना है कि उनकी जान को लगातार खतरा था। बार-बार फोन पर धमकियां मिल रही थीं। वहीं, कई बार हमले की कोशिश भी हो चुकी थी। इसके बावजूद राज्य सरकार ने उन्हें सिर्फ एक गनर दिया था, जो भी मौके पर मौजूद नहीं था। समर्थकों का दावा है कि कमलेश को वाई कैटिगरी की सुरक्षा देने की बात भी कही गई थी, लेकिन इसकी फाइल 3 साल से सरकारी दफ्तरों में अटकी रही। अगर लापरवाही नहीं बरतते तो तिवारी की जान नहीं जाती।

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