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गर्भवती महिला को बैठाए रखा, बच्‍चे का हाथ बाहर आया तो गर्भ में वापस डाल कर दिया रेफर, मौत

इस घटना के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया। महिला के पति ने अस्पताल प्रबंधन पर महिला का इलाज सही समय पर ना करने का आरोप लगाया है। इधर अपनी गर्दन फंसते देखते अस्पताल के डॉक्टरों ने एनएचएम कर्मचारियों पर सारा दोष मढ़ दिया है।

Author April 26, 2018 1:50 PM
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Unsplash)

इधर गुरुग्राम में बड़ी चिकित्सीय लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां के जिला नागरिक अस्पताल में एक गर्भवती महिला और शिशु की जिंदगी के साथ इतना भयानक खेल खेला गया कि आखिरकार शिशु की मौत हो गई। घटना के बारे में मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार (25 अप्रैल) की सुबह पटौदी स्थित दौलताबाद गांव की रहने वाली सोनिया को अचानक लेबर पेन होने के बाद उनके पति जयदेव उन्हें लेकर तुरंत जिला नागरिक अस्पताल में पहुंचे। अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने बतलाया कि सोनिया को खून की कमी है। दर्द से कराह रही सोनिया को अस्पातल कर्मियों ने इमरजेंसी में भर्ती करने से इनकार कर दिया। इस दर्द में सोनिया करीब 3 घंटे तक व्हीलचेयर पर बैठी रही और इमरजेंसी में एडमिट होने का इंतजार करती रही। इसी बीच महिला के गर्भ से बच्चे का एक हाथ बाहर आ गया। वहां मौजूद डॉक्टर ने बच्चे का हाथ वापस महिला के गर्भ में डाल दिया और महिला को सफदरजंग अस्पताल में रेफर कर दिया।

करीब 3 घंटे के बाद जब महिला को सफदरजंग अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस में लिटाया गया तो बच्चे का एक हाथ फिर बाहर आ गया। दोबारा ऐसी घटना होने के बावजूद वहां के डॉक्टरों ने एक बार फिर बच्चे का हाथ महिला के गर्भ में डाल दिया। इस दौरान महिला ने एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दिया। आनन-फानन में अस्पताल कर्मियों ने महिला को अस्पताल के प्रसूति कक्ष में एडमिट किया, लेकिन कुछ ही देर बाद बच्चे की मौत हो गई। इस महिला को तीन बेटियां हैं और चौथी बार उसने एक बेटे को जन्म दिया था, लेकिन अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की वजह से उसके बच्चे की मौत हो गई।

इस घटना के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया। महिला के पति ने अस्पताल प्रबंधन पर महिला का इलाज सही समय पर ना करने का आरोप लगाया है। इधर अपनी गर्दन फंसते देखते अस्पताल के डॉक्टरों ने एनएचएम कर्मचारियों पर सारा दोष मढ़ दिया है। इतना ही नहीं सिविल अस्पताल के डॉक्टर प्रदीप शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि ऐसे मामलों को हायर सेंटर भेजना जरूरी होता है, इसीलिए गर्भवती महिला को सफदरजंग अस्पताल भेजा गया था।

आपको बता दें कि इस सिविल अस्पताल पर पहले भी इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लग चुका है। फरवरी महीने में आधार कार्ड ना होने पर इसी अस्पताल प्रशासन ने एक गर्भवती महिला को भर्ती करने से मना कर दिया था। बाद में इस महिला ने अस्पताल के गेट पर बच्चे को जन्म दिया था।

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