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GST चोरी करने वाले रैकेट का भंडाफोड़, नकली चालान बनाकर सरकारी खजाने को लगाई 79 करोड़ रुपए की चपत

डीजीजीएसटीआई की प्रमुख अतिरिक्त महानिदेशक के अंपझाकन ने कहा कि ये लोग बैंक ऋण हासिल करने के झूठे बहाने लोगों के पैन और आधार का उपयोग काल्पनिक संस्थाओं को चलाने में करते हैं।

चेन्नई में जीएसटी घोटाला, प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स – इंडियन एक्सप्रेस)

चेन्नई में लगभग 440 करोड़ रुपए के सामान की वास्तविक आपूर्ति के बिना नकली चालान जारी करने के रैकेट के लगभग 79 करोड़ रुपए के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट उपयोग करने का खुलासा हुआ है। यह जानकारी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस ने शुक्रवार को दी। विभाग ने कहा कि रैकेट में शामिल तीन लोगों में से एक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दो अन्य का पता लगाया जा रहा है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में डीजीजीएसटीआई की प्रमुख अतिरिक्त महानिदेशक के अंपझाकन ने कहा कि ये लोग बैंक ऋण हासिल करने के झूठे बहाने लोगों के पैन और आधार का उपयोग काल्पनिक संस्थाओं को चलाने में करते हैं।

निजी बैंकों के अधिकारियों की भी मिलीभगत की आशंका : उन्होंने बताया कि नियमों का उल्लंघन कर रैकेट के साथ निजी बैंकों के अधिकारियों की भी मिलीभगत की बात सामने आई है। इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, “कई परिसरों में जांच से पता चला है कि उनमें से ज्यादातर बंद हो चुके हैं। वहां कुछ हो नहीं रहा है। एक परिसर में तो चाय की दुकान चल रही है।” बताया कि फर्जी इकाइयां ऐसी बनाई गई हैं जिससे उनका आपस में लेन-देन का एक जटिल नेटवर्क बनाया जा सके। इस तरह के लेन-देन में धन का हस्तांतरण बैंक खातों में करते हैं ताकि नकली चालान उन निर्माताओं तक पहुंचे जो सामान की प्राप्ति के बिना धोखाधड़ी करते हैं।

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फर्जी दस्तावेजों से बनाई फर्जी संस्थाएं : आरोपियों के जीएसटी विभाग और संबंधित बैंक खातों के साथ पंजीकरण नहीं मिला। शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि बैंक खातों को फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके फर्जी संस्थाएं खोली गई थी। अब तक की जांच में पता चला है कि साजिश तीन लोगों ने रची थी। ये लोग काल्पनिक संस्थाएं बनाकर माल की वास्तविक आपूर्ति के बिना नकली चालान जारी करते थे। एक अन्य ने नकली चालान प्राप्त करने वालों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

करोड़ों का करते थे घोटाला : रैकेट से संबंधित गतिविधियों के लिए तीसरा व्यक्ति रोजाना की गतिविधियों का प्रभारी था। अधिकारी के मुताबिक, “फर्जी ऋणों के आधार पर फर्जी संस्थाओं से कुल 79 करोड़ रुपये तक का घोटाला हुआ है।”

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