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Rajasthan: बाइक टकराने पर हुई मारपीट में दलित ने गंवाई थी जान, पिता ने पुलिस पर एक्शन नहीं लेने का आरोप लगाकर किया सुसाइड

राजस्थान के अलवर जिले में बेटे के मौत के बाद पिता ने खुद को फासी लगा लिया। बताया जा रहा है कि बेटे की हत्या के बारे में पुलिस द्वारा परेशान किए जाने पर उसने यह कदम उठाया है।

Author जयपुर | August 17, 2019 10:18 AM
प्रतीकात्मक फोटो (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

राजस्थान के अलवर जिले में मारपीट की घटना में जान गंवाने वाले दलित युवक के पिता ने कथित तौर पर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। आरोप है कि बेटे की मौत के मामले में पुलिस की निष्क्रियता से परेशान था। दूसरी ओर विपक्षी भाजपा ने इस मामले में राज्य सरकार एवं पुलिस पर निशाना साधा है और मामले की सीबीआई से जांच करवाने की मांग भी की है। विपक्षी पार्टी बीजेपी का कहना है कि करीब एक महीने बाद भी पुलिस इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं की है। वहीं पुलिस ने इन आरोपों को गलत ठहराया है और मामले में कार्रवाई होने की बात कही है।

क्या है मामलाः चौपानकी पुलिस थाने के प्रभारी विजय कुमार चंदेल ने बताया कि रतिराम जाटव (60) ने गुरुवार (15 अगस्त) को कुछ जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने बताया कि कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और उनके शव को अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखवाया गया है। चंदेल ने कहा, ‘गांव वालों के अनुसार रतिराम दृष्टिहीन था।’ रतिराम के परिवार वालों ने शुक्रवार को पोस्टमार्टम करवाने से इनकार कर दिया। उन्होंने व समाज के अन्य लोगों ने प्रभावित परिवार को मुआवजे सहित अन्य मांगों को लेकर टपूकड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में धरना प्रदर्शन भी किया।

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लोगों ने की मुआवजे की मांगः अलवर के जिला पुलिस अधीक्षक अनिल परिस देशमुख ने भाषा को बताया कि बेटे और पिता के मौत के बाद आंदोलनकारी एक करोड़ रुपए के मुआवजा व पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग कर रहे हैं। प्रशासन के आला अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से बात की। वहीं युवक की मौत के मामले में उन्होंने कहा,’ युवक (हरीश जाटव) की मौत के बाद इस मामले में हत्या से सम्बद्ध धारा 302 जोड़ी गई थी और मामले में जांच चल रही है।’

पुलिस और सरकार पर ढिलाई बरतने का आरोपः विपक्षी भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर पुलिस व राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा है। भाजपा के राज्य प्रवक्ता व विधायक सतीश पूनिया ने यहां संवाददाताओं से कहा कि राज्य सरकार अल्पसंख्यकों के संरक्षण की बात तो करती है लेकिन, ‘ऐसा लगता है कि दलित व बहुसंख्यक समाज का संरक्षण इस सरकार की प्राथमिकताओं में नहीं है।’ उन्होंने आरोप लगाया कि युवक की मौत के एक महीने बाद भी पुलिस किसी नामजद आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई और प्रताड़ना से परेशान उसके पिता रतिराम ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। पूनिया ने इस मामले की सीबीआई से जांच करवाने की भी मांग की है। साथ ही भाजपा ने एक समिति गठित की है जो घटनास्थल पर जाकर तथ्यों का पता लगाएगी।

बाइक टक्कर के बाद मारपीट में जान गईः उल्लेखनीय है कि अलवर जिले के फलसा गांव के युवक हरीश जाटव की 19 जुलाई को नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दौराने इलाज मौत हो गई थी। हरीश के पिता रतिराम ने 17 जुलाई को एक मामला दर्ज करवाया था कि 16 जुलाई को फलसा गांव में हरीश की बाइक किसी अन्य के साथ भिड़ गई जिसको लेकर वहां खडे ठेकेदार उमरशेर व अन्य ने उसके साथ मारपीट की। बता दें कि मारपीट में हरीश को गंभीर चोटे भी आई थी। वहीं 17 जुलाई को ही जमालुद्दीन ने भी एक मामला दर्ज करवाया जिसमें हरीश पर तेजी व लापरवाही से बाइक चलाते हुए उसकी पत्नी हकीमन को टक्कर मारने का आरोप लगया गया था।

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