Stubble Burning: किसान ने जहर खाकर लगाया मौत को गले; पराली जलाने के केस को वापस लेने की कर रहा था मांग

Farmers Protest in Punjab, Stubble burning: किसान यूनियन के नेता रेशम सिंह ने मीडिया को बताया है कि जगसीर के पास 2. 5 एकड़ जमीन थी और वह 10 लाख रुपये के कर्ज में थे।

पंजाब किसान नेता जेएस डिल्वाल, फोटो सोर्स- एएनआई

Farmers Protest in Punjab: पंजाब के फरीदकोट जिले के जैतो में पराली जलाने के मामले में दर्ज मामले वापस लेने सहित कई अन्य मांगों को लेकर किसान आंदोलित हो गए हैं। बता दें कि बठिंडा जिले के कोटरा कोरियनवाला गांव के 50 वर्षीय जगसीर सिंह ने जहर खा लिया। जिसके बाद उसे सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

तनाव में था किसान: किसान यूनियन के नेता रेशम सिंह ने मीडिया को बताया है कि जगसीर के पास 2. 5 एकड़ जमीन थी और वह 10 लाख रुपये के कर्ज में थे। हाल ही में उन्होंने अपनी 3 कनाल जमीन बिक्री के लिए रखी थी, जिसके कारण वह बहुत ही तनाव रह रहें थे। शनिवार सुबह (07 दिसंबर) सभी किसानों के साथ धरना प्रदर्शन में सभी किसानों के साथ कुछ देर बैठे रहे। लेकिन कुछ देर उनकी तबीयत खराब गई जिसके बाद उन्हें जैतो के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

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कर्ज से परेशान था किसान: पुलिस अधीक्षक भूपेन्द्र सिंह सिद्धू ने कहा कि हम मामले की जांच कर रहे हैं। शव को मोर्चरी में रखवाया गया है। किसान जगसीर गुरुवार (05 दिसंबर) पराली जलाने को लेकर लगाये गए जुर्माने के खिलाफ प्रर्दशन में शामिल हुआ था। यह प्रर्दशन जैतो में चल रहा है जहां कई किसान यूनियन धरना प्रर्दशन कर रहे है। उन्होंने कहा कि किसान जगसीर कर्ज से परेशान होकर ऐसा कदम उठाया है।

एक महीने से कर रहे है प्रदर्शन: गौरतलब है कि किसान बीकेयू, एकता और सिद्धपुर किसान यूनियन के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वे पराली जलाने को लेकर दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग कर रहे है। यह धरना प्रर्दशन जैतो में एक महीने से ज्यादा दिन से चल रहा है। एफआईआर रद्द करने के अलावा, किसानों अपने राजस्व रिकॉर्ड से लाल प्रविष्टियों को हटाने और उन पर लगाए गए दंड को वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं।

किसान यूनियनों के वरिष्ठ नेता पहुंच रहे: यूनियन के प्रदेश प्रधान जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि यह बेहद गंभीर स्थित है। सरकार का रूख तानाशाही वाला है। किसान अपनी मांगों को लेकर आत्महत्या करने लगे हैं। अब सरकार के विरोध में संघर्ष की अगली रूपरेखा क्या होगी, इसके लिए प्रदेशभर से किसान यूनियनों के वरिष्ठ नेता पहुंच रहे हैं। उसके बाद ही फैसला किया जाएगा।

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