ताज़ा खबर
 

मुंबई: कांग्रेस राज में उपमुख्यमंत्री कार्यालय ने आरोपियों पर कार्रवाई ना करने का बनाया था दबाव, पूर्व कमिश्नर ने किये थे सनसनीखेज दावे

राकेश मारिया ने बताया था कि केस दर्ज होने के बाद मुझे उपमुख्यमंत्री कार्यालय से फोन आया था।

crime, crime newsराकेश मारिया। फोटो सोर्स- सोशल मीडिया

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर राकेश मारिया की किताब ‘LET ME SAY IT NOW’ काफी चर्चा में रही थी। आज हम इस किताब में बताई गई उस कहानी का जिक्र करेंगे जिसके बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे। एक घटना का जिक्र करते हुए मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर ने लिखा है कि सितंबर 1999 में महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव हुए थे और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार सत्ता में आई थी। इसके बाद मुझे नजरअंदाज किया गया…क्योंकि एक दिन मुझे मेरे एक परिचित ने फोन कर पूछा कि क्या आपने यह सुना की पिछली रात बांद्रा में क्या हुआ?

मैंने जवाब दिया था की नहीं। इसके बाद मुझे बताया गया कि किसी ने बांद्रा के रेस्टुरेंट में खाना खाया और शराब पीया लेकिन उसने बिल भुगतान करने से इनकार कर दिया था। जब रेस्टुरेंट के कर्मचारियों ने उन्हें बिल भरने के लिए कहा था तब उनकी झड़प भी कर्मचारियों से हुई थी। उस वक्त तो उनलोगों ने पैसा दिया और चले गए लेकिन थोड़ी देर बाद वो अपने कुछ अन्य साथियों के साथ वापस लौटे और फिर काउंटर पर काफी तोड़फोड़ मचाई थी। उनलोगों ने स्टाफ को धक्का दिया था और उसकी पिटाई भी की थी।

इसके बाद रेस्टुरेंट प्रबंधन ने थाने में रिपोर्ट भी दर्ज करवाने की कोशिश की थी। यहां आपको बता दें कि यह घटना साल 1999 की है और उस वक्त राकेश मारिया नॉर्थ वेस्ट रीजन के एडिशनल कमिश्नर थे। राकेश मारिया के मुताबिक उस वक्त पुलिस स्टेशन में मौजूद ऑफिसर ने उन्हें अगले दिन आने के लिए कहा था। इसके बाद मैंने तुरंत पुलिस स्टेशन में पूछताछ की और मुझे बताया गया कि शिकायत लिखवाने के लिए कोई नहीं आया था।

इसके बाद मैंने जांच-पड़ताल की और आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ। लेकिन करीब आधे ही घंटे के बाद मुझे एक फोन आया। यह फोन उस वक्त के उपमुख्यमंत्री छग्गन भुजबल के कार्यालय से था। फोन पर मुझसे कहा गया कि गलत रिपोर्ट लिखवाई गई है और मुझे इसपर एक्शन लेने की जरुरत नहीं है। मैंने उस वक्त कहा था कि मैं कानूनी प्रक्रिया का पालन करूंगा।

इसके बाद मैंने ईमानदारी से जांच की और नवंबर महीने में आरोपी पकड़े गये। उस वक्त यह कहा गया था कि पकड़े गए आरोपियों का कनेक्शन डिप्टी सीएम दफ्तर से भी है। राकेश मारिया में अपनी किताब में लिखा कि उनकी इस कार्रवाई से नाराज होकर दिसंबर 1999 में उनका तबादला कर दिया गया था। ये एक ऐसी पोस्टिंग थी जिसे डिमोशन माना जाता था। जबकि नियम के मुताबिक उन्हें नॉर्थ वेस्ट रीजन में कम से कम दो साल की सेवा देनी थी, लेकिन मात्र 13 महीनों में ही उनका तबादला कर दिया गया था।

Next Stories
1 बैठक में पूर्व मंत्री के सामने ही भिड़ गए थे कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता, VIDEO वायरल होने पर हुई थी किरकिरी
2 पकड़ाने के डर से बिरयानी छोड़ भागा था दाऊद, अंडरवर्ल्ड डॉन पर इस शख्स ने 2 बार किया था हमला
3 जन्म से थे नेत्रहीन, पिता चलाते थे टैक्सी; यूं बने IAS
यह पढ़ा क्या?
X