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डोसा, डार्लिंग और​ डियर जिंदगी… सर्वणा भवन के मालिक का क्या था लव और एस्ट्रो कनेक्शन

राजगोपाल ने तीसरी शादी के लिए लड़की भी पसंद कर ली थी। यह लड़की उनके मैनेजर की बेटी जीवाज्योति ही थी। डोसा किंग को उसके एक ज्योतिषी ने बताया था कि अगर वह इसी लड़की से शादी कर ले तो उसकी किस्मत और भी चमक जाएगी।

सर्वणा भवन के डोसा किंग पी राजगोपाल (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

दुनिया भर में फेमस साउथ इंडियन फूड चेन सर्वणा भवन के संस्थापक और डोसा किंग के नाम से मशहूर पी राजगोपाल का बीते दिन यानी गुरुवार(18 जुलाई) को निधन हो गया था। राजगोपाल को हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा मिली थी। सजा का ऐलान होने के बाद ही डोसा किंग को हार्ट अटैक पड़ा, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। जिस हत्या के मामले में राजगोपाल को सजा मिली, वह किसी फिल्मी कहानी से अलग नहीं है।

राजगोपाल की पहचान दुनिया भर में डोसा किंग के तौर पर थी। उन्होंने साउथ इंडिया की इस डिश को दुनिया भर में मशहूर कर दिया। कम कीमत में लोगों के लिए उपलब्ध कराए गए डोसा, सांभर और इडली पर सवार को राजगोपाल भी मशहूर होता चला गया। लोगों के दिलों में राजगोपाल बड़े भाई के तौर पर था। लेकिन इस भाई का एक दूसरा किरदार भी था। जिसे निभाकर ही राजगोपाल हत्यारा बन बैठा।

राजगोपाल ने जितना मसाला अपने डोसे में डाला, उससे कम उसकी जिंदगी में नहीं था। जिंदगी की आखिरी सांस तक भले ही उन्होंने कितना ही पैसा कमाया हो। लेकिन शुरूआत में ऐसा नहीं था। कम उम्र में ही राजगोपाल ने पैसे के लिए ढाबों और होटलों पर काम करना शुरू कर दिया था। धीरे धीरे वह भी सफलता की सीढ़ियां चढ़ता रहा। राजगोपाल ने दो शादियां की थीं। लेकिन वह एक और शादी करना चाहता था। लेकिन उसकी यह चाहत पूरी नहीं हो सकी और यही उसके खात्मे का कारण बन गई।

राजगोपाल को ज्योतिष पर बहुत यकीन था। राजगोपाल ने तीसरी शादी के लिए लड़की भी पसंद कर ली थी। यह लड़की उनके मैनेजर की बेटी जीवाज्योति ही थी। डोसा किंग को उसके एक ज्योतिषी ने बताया था कि अगर वह इसी लड़की से शादी कर ले तो उसकी किस्मत और भी चमक जाएगी। हालांकि उस लड़की ने राजगोपाल से शादी करने से इंकार कर दिया। जीवाज्योति की शादी पहले ही प्रिंस सांताकुमार नाम के शख्स से हो चुकी थी। डोसा किंग ने लड़की को अपना बनाने के लिए हर तरकीब अपनाई लेकि कामयाब नहीं हो पाया। हताश होते जा रहे राजगोपाल के सिर अब फितूर सवार हो गया था।

2001 में जीवाज्योति अपने पति सांताकुमार और अपने परिवार के साथ तिरुचेंदुर जा रही थी। लेकिन अचानक रास्ते में सांताकुमार का अपहरण कर लिया गया। किडनैपिंग के काफी दिनों बाद उसका शव कोडाइकनाल से बरामद हुआ। उसकी मौत का कारण दम घुटना बताया गया। इसी मामले में राजगोपाल को 2001 में आरोपी बनाया गया था।

इसके बाद 2004 में सेशन कोर्ट ने राजगोपाल को दोषी करार देते हुए 10 साल की सजा सुनाई थी। राजगोपाल ने इस फैसले के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में अपील की थी। लेकिन यहां तो राजगोपाल की किस्मत दगा दे गई। 2009 में फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने 10 साल कैद की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।

इसके बाद राजगोपाल ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में फैसला सुनाते हुए मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। साथ ही, सरेंडर करने की तारीख 7 जुलाई तय की थी। राजगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट से सरेंडर करने के लिए कुछ और वक्त मांगा, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही, तत्काल प्रभाव से सरेंडर करने का आदेश दिया था। 9 जुलाई को ही राजगोपाल ने सरेंडर किया था। मंगलवार (16 जुलाई) को उन्हें जेल से अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद चेन्नई के एक अस्पताल में डोसा किंग ने गुरुवार (18 जुलाई) सुबह अंतिम सांस ली।

 

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