दिल्ली में साल दर साल बढ़े अपराध: केंद्र पर उठे सवाल, केजरीवाल सरकार भी नहीं पूरे कर पाई चुनाव में किए वादे

दिल्ली और अपराध का नाता खत्म होने के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं। महामारी के दौरान अपराध में कुछ कमी जरूर आई, लेकिन वो ऐसी नहीं थी कि जिस पर प्रसन्नता जताई जा सके। आखिर क्यों हर साल दिल्ली में अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं।

Increasing Crime in National Capitol Delhi
हर साल आने वाले एनसीआरबी की रिपोर्ट में जारी होने वाले आंकड़े चौंकाने वाले हैं। (Photo Source – Express File Photo)

देश की राजधानी दिल्ली। यहां से पूरे देश की नीतियों का निर्माण और संचालन होता है। लेकिन अफसोस कि अपराध की काली छांव से यह शहर अछूता नहीं है। इसे देश की राजधानी के अलावा कई जघन्य अपराधों की राजधानी भी कह सकते हैं। ऐसा कहने के पीछे हमारे पास है ठोस सरकारी आंकड़े। राष्‍ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB एनसीआरबी) और भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG कैग) की रिपोर्ट तो यही कहती है। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में साल 2013 से 2019 के बीच अपराधों में 275 फीसदी बढ़त हुई है।

हालांकि सीएजी ने इस बढ़ते अपराध के पीछे दिल्ली पुलिस में संसाधनों की कमी को बड़ी वजह बताया था। रिपोर्ट के मुताबिक 2013 से 2015 के बीच दिल्ली में हत्या, डकैती और बलात्कार के मामले बढ़े थे। 2019 में दिल्ली पुलिस ने 5185 जघन्य अपराधों के मामले दर्ज किए थे। जबकि 2013 में इनकी संख्या 4159 थी।

वहीं एनसीआरबी का डाटा और अधिक विस्तार से जानकारी देता है। इसके अनुसार 2019 के मुकाबले 2020 में दिल्ली में बलात्कार के 43 फीसदी ज्यादा मामले दर्ज हुए थे। 1712 मामले ऐसे थे जिसमें पति या ससुरालवालों ने महिला के साथ क्रूरता की। वहीं 56 मामले दहेज हत्या के थे। यह दोनों की आंकड़े एक जनवरी 2020 से 15 जून 2020 तक के हैं।

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में साल 2020 में बुजुर्गों के साथ अपराध के 906 मामले दर्ज हुए। ये देश के 19 महानगरों में सर्वाधिक हैं। हालांकि 2019 के मुकाबले इनमें कमी आई है। 2019 में दिल्ली में बुजुर्गों के प्रति 1076 अपराध दर्ज हुए थे, लेकिन 2020 में कमी आई और ये कुल 906 केस दर्ज किए गए।

दिल्ली में आईपीसी के तहत होने वाले प्रकरणों की संख्या भी हर साल बढ़ ही रही है। पिछले कुछ सालों के आंकड़े तो यही बताते हैं:
– 2013 में 86800
– 2014 में 155654
– 2015 में 191377
– 2016 में 209519
– 2017 में 232066
– 2018 में 249012
– 2019 में 299475
– 2020 में 249192

दिल्ली में 2011 से 2020 तक के अपराधों का विस्तृत विवरण (delhipolice.nic.in/PDF/CID.pdf)

वहीं 15 अगस्त 2021 तक की दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के आंकड़े भी आंख खोलने वाले हैं। इसके अनुसार, राजधानी में पिछले एक दशक में आईपीसी और गैर आईपीसी के तहत दर्ज होने वाले अपराधों की संख्या में दो सौ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2011 से 15 अगस्त 2021 तक दिल्ली का क्राइम ग्राफ 228.61 पर पहुंच गया है। 2011 में आईपीसी के तहत कुल 53353 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं इस साल 15 अगस्त तक यह संख्या 175327 पर पहुंच चुकी है। जबकि 2020 में इन मामलों की संख्या 153525 थी। 2019 में अपराध का यह ग्राफ सबसे ऊपर था। उस साल तीन लाख से ज्यादा (301085) से ज्यादा मामले दर्ज हुए थे।

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गौरतलब है कि 2013 तक दिल्ली में शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी। 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद पूरे देश ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की निंदा की थी। 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी ने अपने मैनिफेस्टो में महिला एवं बाल सुरक्षा को प्राथमिकता दी थी।

मैनिफेस्टो के अनुसार, सरकार बनने के बाद नागरिक सुरक्षा बल का गठन किया जाना था, जो हर वार्ड में सीनियर सिटीजन, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर काम करता। महिलाओं से जुड़े अपराधों और मुकदमों के जल्द निपटारे के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और वर्मा समिति की सिफारिशों को लागू करने का वादा भी किया गया था।

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