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दिल्ली पुलिस: 42 महीनों में 14 कर्मियों ने ऑन-ड्यूटी कर ली सुसाइड, अब सब-इंस्पेक्टर की भी घर में मिली लाश

दिल्ली पुलिस से मिली सूचना के मुताबिक, पिछले 42 महीनों में 14 कर्मियों ने ड्यूटी के दौरान आत्महत्या की है जबकि 23 कर्मचारियों ने ऑफ ड्यूटी आत्महत्या की।

DELHI, DELHI POLICEबताया जाता है कि काम का दबाव ज्यादा होने की वजह से पुलिस के जवान तनाव में रहते हैं। सांकेतिक तस्वीर।

दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर की लाश उनके घर में मिली है। न्यूज एजेंसी ‘ANI’ के मुताबिक सब-इंस्पेक्टर का नाम रितुराज है। बताया जा रहा है कि सब-इंस्पेक्टर रितुराज पश्चिम विहार वेस्ट में तैनात थे। शुरुआती जांच के बाद दिल्ली पुलिस की तरफ से कहा गया है कि ऐसा लगता है कि रितुराज ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर यह आत्मघाती कदम उठाया है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रितुराज की शादी 17 नवंबर को होनी थी लेकिन शादी से पहले रितुराज ने खुद को गोली मार ली। यह घटना दिल्ली के मोहन गार्डन इलाके की बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि रितुराज की मौत की खबर उनके भाई ने सबसे पहले पुलिस को दी थी।

पुलिस शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या मान कर ही चल रही है। हालांकि मोहन गार्डन इलाके में 26 साल के सब-इंस्पेक्टर की लाश मिलने के मामले में पुलिस अलग-अलग एंगल से भी जांच कर रही है।

आपको बता दें कि एक आरटीआई से खुलासा हुआ है कि 1 जनवरी 2017 से लेकर जून 2020 तक दिल्ली पुलिस के 37 सिपाही और सब इंस्पेक्टर से लेकर इंस्पेक्टर तक खुदकुशी कर चुके हैं। खुदकुशी करने वालों में दो महिला सिपाही भी शामिल हैं। राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक खुदकुशी का राष्ट्रीय औसत प्रति एक लाख पर 13 है। दिल्ली पुलिस से मिली सूचना के मुताबिक, पिछले 42 महीनों में 14 कर्मियों ने ड्यूटी के दौरान आत्महत्या की है जबकि 23 कर्मचारियों ने ऑफ ड्यूटी आत्महत्या की।

दिल्ली पुलिस के कर्मचारी आत्महत्या क्यों कर रहे हैं? इसे लेकर अलग-अलग बातें कही जाती हैं। कई मनोचिकित्सकों औऱ विशेषज्ञों का मानना है किवपुलिस फोर्स के कर्मी लंबी ड्यूटी की वजह से काफी तनाव में रहते हैं और संभवत: इस वजह से वे जिंदगी को खत्म करने जैसा कठोर कदम उठा लेते हैं।

पुलिसकर्मियों पर काम का बोझ काफी ज्यादा है। जिस वजह से दबाव ज्यादा है। कभी-कभी इन्हें 12-12 घंटे की ड्यूटी भी करनी पड़ती है। कई कर्मियों की ड्यूटी पिकेट पर भी लगा दी जाती है और बीट की जिम्मेदारी भी दी जाती है, जिससे काम का दबाव और बढ़ जाता है। इसके अलावा कभी-कभी उन्हें साप्ताहिक अवकाश भी नहीं मिलता है।

कर्मियों ने बताया कि अगर रात्रि पाली में ड्यूटी लगी है और अगले दिन का अदालत का समन है तो वहां भी पेश होना होता है। इस बीच कोई आराम नहीं मिलता है और रात में फिर ड्यूटी करनी होती है, जिससे नींद पूरी नहीं होती है।

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