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कारोबारी को गला घोंटकर मार डाला, फिर सुपारी देने वालों को भेजा फोटो, मौत का यकीन नहीं हुआ तो लाश ढोकर गुड़गांव ले गए किलर

Delhi Crime News: ग्रेटर कैलाश में व्यवसायी का अपहरण कर गला घोंटकर हत्या करने के बाद बदमाशों ने उसकी फोटो को सुपारी देने वाले को भेज दी। लेकिन जब फोटो देखने के बाद भी उसे यकीन नहीं हुआ तो बदमाश सबूत के तौर पर व्यापारी के शव को गुड़गांव ले गए।

Author नई दिल्ली | Updated: December 6, 2019 1:32 PM
मृतक अरुण शर्मा, मुख्यआरोपी ऋषिराज चौहान।

Delhi Crime News: देश की राजधानी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में एक 64 वर्षीय व्यवसायी अरुण शर्मा का अपहरण कर गला घोंटकर हत्या करने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि शर्मा की हत्या करने के बाद बदमाशों ने उसकी फोटो को कथित तौर सुपारी देने वाले को भेज दी। लेकिन जब फोटो देखने के बाद भी उसे यकीन नहीं हुआ तो बदमाश  सबूत के तौर पर व्यापारी के शव को गुड़गांव सुपारी देने वाले के पास ले गए। मामले का मुख्य आरोपी ऋषि राजपाल चौहान (64) और उनके बेटे हितेश (29) ने कथित तौर पर संपत्ति विवाद को लेकर शर्मा की हत्या की योजना बनाई और इसके लिए उन्होंने एक व्यक्ति को 25 लाख रुपये दिये थे।

शॉल से गला घोटकर मार डाला: ऋषि राजपाल चौहान एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है गुड़गांव में अपने घर से एक क्लिनिक और लड़कियों का पीजी चलाता हैं, जो कि कथित टतौर पर विवादित प्रॉपर्टी है। हत्या की यह घटना 15 नवंबर को सुबह लगभग 9 बजे हुई। जिसके 19 दिन बाद पांच आरोपी गुरूवार को पकड़े गए हैं। अतिरिक्त सीपी (क्राइम) बीके सिंह ने बताया कि कैलाश कॉलोनी मेट्रो स्टेशन के पास से व्यवसायी अरुण शर्मा का अपहरण करने के बाद, आरोपियों ने शॉल से उनका गला घोंट दिया। उन्होंने व्हाट्सएप के माध्यम से शर्मा के शव की तस्वीर हितेश को भेजी, लेकिन हितेश को इस पर विश्वास नहीं हुआ। बदमाश फिर शव को गुड़गांव ले गए, जहां हितेश ने आकर शव देखा। शव देखने के बाद हितेश ने उसे उत्तर प्रदेश में ले जाकर दफन करने को कहा।

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पिछले 10 साल से चल रहा था विवाद: बता दें कि अरुण शर्मा 1980 के दशक में लोकप्रिय टीवी ब्रांड टेलीविस्टा के मालिक थे और बाद में उन्होंने दक्षिण दिल्ली में एक इलेक्ट्रॉनिक स्टोर खोला था। वह GK-I में अपनी बहन और बेटी के साथ रहते थे। उनकी पत्नी का करीब दो साल पहले निधन हो गया था। पुलिस ने बताया कि जिस प्रॉपर्टी को लेकर दोनों लोगों में विवाद चल रहा था वह गुड़गांव के सेक्टर 17 में है और इसकी कीमत 3 करोड़ रुपये है। पुलिस ने कहा कि यह विवाद 10 साल से चल रहा था। शर्मा ने हाल ही में इस पर कानूनी लड़ाई जीती थी।

महीनों से रच रहा था साजिश: एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी चौहान कथित तौर पर महीनों पहले से इसकी साजिश रच रहा था। चौहान ने कोर्ट के सुनवाई के दौरान तीनों बदमाश – अमित छाबड़ा (32), प्रियांक खन्ना (34) और साहिल (25) कोर्ट में बुलाया था, ताकि वे पीड़ित पर पहचान सकें। तीनों लोगों ने शर्मा के घर पर दो बार वारदात को अंजाम देनें की कोशिश की थी। इस घटना के दिन तीनों ने सुबह 6 बजे से फर्जी नंबरप्लेट के साथ एक सफेद स्कॉर्पियो में शर्मा के घर के पास इंतजार कर रहे थे। जब शर्मा सुबह 9 बजे के गुड़गांव की अदालत में प्रॉपर्टी के अंतिम निष्पादन के लिए पेश होने आ रहे थे उसी दौरान बदमाशों ने उनका अपहरण कर लिया।

शव को झांसी में लगाया ठिकाने: पुलिस ने बताया कि जब शर्मा ने विरोध किया और मदद के लिए चिल्लाए तो बदमाशों ने उन्हें तुरंत ही गला घोंटकर मार डाला। इसके बाद बदमाश हितेश को शव दिखाने के बाद गाड़ी का फेक नंबर प्लेट बदलकर वहां से तुरंत झांसी शव को ठिकाने लगाने के लिए निकल गए। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने सबसे पहले पीड़ित का एटीम कार्ड और आईडी हरियाणा के पलवल में फेंक दिया। इसके बाद उन्होंने शव झांसी के नहर में ले जाकर फेंक दिया। तीनों आरोपी 16 नवंबर को गुड़गांव वापस आकर प्रॉपर्टी से संबंधित को कुछ दस्तावेज हितेश को सौंपे।

पच्चीस लाख में ली थी सुपारी: पुलिस ने कहा कि पिता-पुत्र की जोड़ी ने कथित तौर पर शर्मा की हत्या कराने के लिए एक व्यक्ति से संपर्क किया था जिसने बताया था उसे इस काम के लिए पच्चीस लाख रुपये की जरुरत होगी। सुपारी लेने वाला व्यक्ति अपने बेटे अमेट, प्रियांक (भतीजा) और साहिल तीनों के साथ आमेट इलेक्ट्रॉनिक दुकान पर काम करते हैं।

सीसीटीवी फुटेज से हुई स्कार्पियो की पहचान: एडिशनल सीपी सिंह ने कहा कि स्थानीय पुलिस ने शुरू में मामले की जांच की और मामला बाद में एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग टीम को स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस को घटनास्थल से सीसीटीवी फुटेज मिले हैं जिससे स्कार्पियो की पहचान की गई है। अपनी शिकायत में, शर्मा के परिवार ने पुलिस को चौहान और भूमि विवाद के बारे में बताया था।

शव अभी बरामद नहीं हुआ:  गौरतलब है कि चौहान ने पुलिस को कॉल डिटेल के साथ पूछताछ करने पर बताया है कि कथित तौर पर वह कुछ आरोपियों के संपर्क में था, जो 15 नवंबर को पीड़ित के घर के पास थे। यह भी पाया गया कि आरोपियों में से एक साहिल ने हितेश से बातचीत की कॉल रिकॉर्ड की थी। फोन और कॉल रिकॉर्ड बरामद कर लिया गया है। साहिल ने कहा कि वह अपहरण के सबूत के रूप में रिकॉर्ड रखना चाहता था, क्योंकि चौहान ने उन्हें भुगतान करने से इनकार कर दिया था। अधिकारी ने कहा कि तीन अपहरणकर्ताओं को भेजने वाला व्यक्ति फरार है और एक टीम उसकी तलाश कर रही है। हितेश अभी भी फरार चल रहा है। शर्मा का शव अभी तक बरामद नहीं हुआ है

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