जिससे दाऊद इब्राहिम भी खाता था खौफ, मुंबई के पहले एनकाउंटर में यूं मारा गया था गैंगस्टर

फरार होने के बाद मान्या सुर्वे मुंबई आ गया था। यहां आकर मान्या सुर्वे ने एक खूंखार गैंग बनाया था।

crime, crime newsफाइल फोटो

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को सबसे बड़ा माफिया कहा जाता है। देश के इस सबसे बड़े दुश्मन ने मुंबई में रहते हुए कई बड़े अपराध को अंजाम दिया था। लेकिन आज हम बात दाऊद की नहीं बल्कि दाऊद से भी बड़े गैंगस्टर की बात कर रहे हैं। कहा जाता है कि इस गैंगस्टर ने दाऊद इब्राहिम को भी मारने की प्लानिंग बना ली थी। हम बात कर रहे हैं ग्रेजुएट से गैंगस्टर बने मान्या सुर्वे की।

मान्या सुर्वे का असली नाम मनोहर अर्जुन सुर्वे था। बताया जाता है कि बीए करने के बाद मनोहर अर्जुन सुर्वे ने अपराध की दुनिया में कदम रखा था। यह भी कहा जाता है कि मनोहर के सौतेले भाई भार्गव दादा ने उसे जरायम की दुनिया में लाया। साल 1969 में मनोहर अर्जुन सुर्वे पर हत्या का पहला आरोप लगा था। इसके बाद मनोहर अर्जुन सुर्वे को मुंबई में मान्य सुर्वे के नाम से जाना जाने लगा।

हालांकि इस हत्याकांड के बाद वो पकड़ा गया था। रत्नागिरी में जेल में भूख हड़ताल करने की वजह से उसकी तबीयत खराब हो गई थी, जिसकी वजह से उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 14 नवंबर, 1979 को वो अस्पताल में पुलिसवालों को चकमा देकर फरार हो गया था। कहा जाता है कि जेल में रहने के दौरान मान्या सुर्वे और भी कुख्यात हो गया था।

फरार होने के बाद मान्या सुर्वे मुंबई आ गया था। यहां आकर मान्या सुर्वे ने एक खूंखार गैंग बनाया था। साल 1970-80 के दशक में मान्या सुर्वे का खौफ इतना ज्यादा था कि एक समय दाऊद इब्राहिम भी उससे खौफ खाता था। 12 फरवरी 1981 को मान्या ने मुंबई की सबसे खतरनाक वारदात को अंजाम दिया था। आरोप लगा कि उसने प्रभादेवी पेट्रोल पंप पर सबीर को मार गिराया। इस हत्याकांड ने दाऊद को हिला कर रख दिया था।

इसके बाद मान्या सुर्वे ने मुंबई में लूट मार मचा दी। पुलिस की बेइज्जती होने लगी। आरोप भी लगने लगे। 1981 में पुलिस कमिश्नर जूलियो रिबेरो ने इसको खोजने के लिए एक स्पेशल पुलिस स्क्वॉड बनाया। इसमें इंसपेक्टर स्तर के लोग ही थे। आइजैक सैमसन, यशवंत भिडे़, राजा तांबत, संजय परांदे और इशाक भगवान।

11 जनवरी 1982 को मान्या सुर्वे कॉलेज में अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने आया था। वहां पुलिस मौजूद थी। उस वक्त इस गैंगस्टर को छह गोलियां मारी गईं। कहते हैं कि पुलिस उसे अस्पताल भी नहीं ले गई। गाड़ी में घुमाती रही तब तक कि वो मर नहीं गया। ये मुंबई का पहला पुलिस एनकाउंटर था। हालांकि, ये स्क्वॉड बस एक बड़े ऑपरेशन के लिए बना था।

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