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यूपी का एक माफिया जिसका चेला हुआ करता था दाउद इब्राहिम, मुख्तार-अतीक भी खाते हैं खौफ

कुख्यात माफिया सुभाष ठाकुर के नाम का ऐसा दबदबा है कि बड़े-बड़े बाहुबली भी उससे पंगा नहीं लेते हैं।

यूपी का एक माफिया जिसका चेला हुआ करता था दाउद इब्राहिम, मुख्तार-अतीक भी खाते हैं खौफ
सुभाष ठाकुर को बाबा के नाम से भी जानते हैं। (Photo Credit – Social Media)

यूपी के पूर्वांचल में मुख्तार अंसारी, बृजेश सिंह, मुन्ना बजरंगी और धनंजय सिंह जैसे कई माफिया चर्चित रहे। लेकिन कुख्यात माफिया सुभाष ठाकुर का नाम और रुतबा ऐसा था कि ये सारे बाहुबली भी कांपते थे। यही कारण था कि एक समय सुभाष ठाकुर को पूर्वांचल का सबसे बड़ा कुख्यात माफिया माना जाता था। सुभाष ठाकुर का खौफ ऐसा था कि मुख्तार अंसारी और अतीक जैसे लोग उसके धंधे में नहीं आते थे। हालांकि, इस समय यह माफिया जेल के सलाखों के पीछे उम्रकैद की सजा काट रहा है।

इस दशक में पहुंचा था मुंबई: 90 के दशक को आते-आते संतोष ठाकुर काम की तलाश में बनारस (वाराणसी) से मुंबई जाता है। किस्मत ऐसी कि जल्द ही अपराध की दुनिया में पहुंच गया। छोटे गुटों में शामिल होने के बाद संतोष ठाकुर ने रंगदारी को अपना मुख्य धंधा बनाया और बड़े बिल्डरों को निशाने पर लिया। एक वक्त आया जब संतोष ठाकुर नामी गैंगस्टर बन गया, वहीं दूसरी तरफ दाउद इब्राहिम भी पनप चुका था। माना जाता है कि संतोष के गैंग में शामिल होने के बाद ही दाउद ने अपराध के सारे दांव सीखे थे। इसके बाद ही वह मुंबई का डॉन बना था।

ठाकुर-दाउद और छोटा राजन: दाउद के देश छोड़ने से पहले सुभाष ठाकुर ने दाउद और छोटा राजन के साथ काम शुरू किया था। तस्करी, रंगदारी, फिरौती के कामों को अंजाम देने में माहिर संतोष ठाकुर खौफ का दूसरा नाम बन गया था। दाउद के इशारे पर बड़े कारोबारियों व बिल्डरों से प्रोटेक्शन मनी लेना हो या फिर जमीन पर कब्ज़ा करना संतोष ठाकुर के बाएं हाथ का खेल हो चुका था।

जे.जे. हॉस्पिटल शूटआउट: जब संतोष ठाकुर, दाउद के साथ काम करता था तो उनका बस एक ही दुश्मन था अरुण गवली। यह दुश्मनी तब और बढ़ गई जब अरुण गवली के गुर्गों ने दाउद के बहनोई इस्माइल इब्राहिम पारकर को 26 जुलाई 1992 को मौत के घाट उतार दिया। इस हत्या के बदले में मुंबई के जे.जे. हॉस्पिटल में 12 सितंबर को भयानक शूटआउट हुआ, जिसमें गवली गैंग के शैलेश की हत्या कर दी गई थी। जिस बेखौफ अंदाज में इस हत्याकांड को अंजाम दिया था उससे सभी लोग हैरान थे।

दाउद से हुई अदावत: कहते हैं जुर्म की दुनिया में दोस्ती ज्यादा दिन नहीं टिकती, ऐसे में सुभाष ठाकुर और दाउद भी दुश्मन हो गए। इस दुश्मनी का कारण साल 1993 में हुए मुंबई सीरियल बम धमाके थे, जिसे दाउद इब्राहिम ने कई आतंकियों के साथ मिलकर अंजाम दिया था। इसके बाद सुभाष ठाकुर ने अपना रास्ता बदल लिया। वहीं जेजे हॉस्पिटल शूटआउट मामले में साल 2000 में सुभाष ठाकुर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

जब “बाबा” पड़ गया नाम: आजीवन कारावास की सजा काटने के दौरान सुभाष ठाकुर को सभी ‘बाबा’ नाम से बुलाने लगे। इसके पीछे कारण था कि सुभाष ने जेल में रहते हुए ढलती उम्र तो हासिल की ही, बल्कि वह बड़े बाल और लंबी सफ़ेद ढाढ़ी भी रखने लगा था। सुभाष ठाकुर भले ही जेल में रहा लेकिन राज्य में होने वाले चुनावों में उसका दबदबा रहता और पूर्वांचल की कई सीटों पर वह सीधे प्रभाव डालता है। सुभाष ठाकुर का नाम फिर से साल 2017 में चर्चा में तब आया जब वाराणसी कोर्ट में उसने याचिका दायर कर अपनी जान को दाउद इब्राहिम से खतरा बताया था। साथ ही कहा था कि उसे सुरक्षा हेतु बुलेटप्रूफ जैकेट दी जाए।

इसके बाद 2019 में सुभाष को बीमारी के चलते बीएचयू में भर्ती कराया गया था। इस कारण काफी विवाद भी हुआ था कि ऐसे अपराधी ने बीमारी का बहाना बनाकर अस्पताल में शरण ली है।

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First published on: 16-01-2022 at 03:02:04 pm
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