ताज़ा खबर
 

जानिए, 37 साल की ”लेडी तस्‍कर” की कहानी! 67 साल के पिता के साथ हुई गिरफ्तार

हाथियों के शिकार का खुलासा साल 2015 में उस वक्त हुआ था जब वन्य एवं पशु सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने एक गार्ड को पकड़ा था जो हाथियों के शिकार में इनकी मदद करता था।

अपने पिता सुधीश चंद्र बाबू के साथ अमिथा। फोटो सोर्स – Indian Express

37 साल की यह महिला इतनी शातिर थी कि वो सालों से पुलिस की आंखों में धूल झोंकती आ रही थी। अमिथा चंद्र बाबू नाम की इस महिला को दबोचने के लिए कस्टम डिपार्टमेंट और वन्य जीव सुरक्षा से जुड़े अधिकारी पिछले तीन सालों से प्रयास कर रहे थे। मूल रुप से अमिथा तिरुवनंतपुरम की रहने वाली थी लेकिन जब वन्य अधिकारियों और पुलिस ने इसकी गिरफ्तारी को लेकर वहां दबिश दी तब वो साल 2015 में कोलकाता आ गई थी। दरअसल अमिथा हाथी दांत की तस्करी में माहिर थी और उसका यह धंधा विदेश तक फैला हुआ था। तस्करी के इस खेल का पर्दाफाश करने के लिए डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) के अधिकारियों ने जाल बिछा कर कामयाबी हासिल की। डीआरआई की टीम ने बीते 11 मार्च, 2019 को अमिथा को उस वक्त गिरफ्तार किया जब वो सोनागाछी स्टेशन पर अपने 67 साल के पिता सुधीश चंद्र बाबू को रिसीव करने गई थी। टीम ने कोना एक्सप्रेस-वे के पास इनकी गाड़ी को तलाशी के लिए रोका और फिर इनकी गाड़ी से 3 किलोग्राम हांती दांत बरामद किया गया। बाजार में इनकी कीमत लाखों में हैं।

इसके बाद डीआरआई के अधिकारियों ने अमिथा के कोलकाता स्थित कस्बा अपार्टमेंट में छापेमारी भी की। टीम ने राजडांगा में उनके घर की तलाशी ली तो विभिन्न देवी-देवताओं की 10 मूर्तियां, दो मूर्तियों का ढांचा, एक पैकेट ज्वेलरी, नौ पैकेट हाथी दांत के कटे हुए टुकड़े, 4 पैकेट हाथी दांत का डस्ट और एक कंघी बरामद किया गया। ये सभी हाथी दांते से बने थे। इस महिला के घर से मिले सभी सामानों की कीमत करोड़ों में है। कस्टम डिपार्टमेंट की इस रेड में इस बात का भी खुलासा हुआ कि सुधीश की पत्नी यानी अमिथा की मां केरल में हाथी के शिकार के एक मामले में वांछित है। साल 2015 के इस मामले में उसका बेटा भी फरार है।

अमिथा का पूरा परिवार मूल रुप से तिरुअनंतपुरम का रहने वाला है और जब यहां फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने हाथी दांत की तस्करी के मामले में इनकी तलाश शुरू कि तो यह सभी कोलकाता चले गए। जानकारी के मुताबिक यह परिवार पिछले चार साल से वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो के रडार पर था। हाथियों के शिकार का खुलासा साल 2015 में उस वक्त हुआ था जब वन्य एवं पशु सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने एक गार्ड को पकड़ा था जो हाथियों के शिकार में इनकी मदद करता था। उस वक्त 400 किलोग्राम हाथी दांत बरामद किए गए थे। वन्य अधिकारियों की टीम इस परिवार की तलाश में पहले भी कोलकाता आई थी लेकिन उस वक्त उन्हें कुछ भी सुराग हाथ नहीं लगा था।

जो हाथी दांत सोमवार को इस महिला के पास से बरामद किए गए हैं वो सभी नेपाल भेजे जाने थे। डीआरआई अधिकारियों के मुताबिक सुधीश और अमिथा हाथी दांत को एक खरीदार को बेचने वाले थे जो सिलीगुड़ी के रास्ते इस हाथी दांत को नेपाल भेजने के चक्कर में थे। जानकारी के मुताबिक यह तस्कर महज 20,000 से 50,000 रुपए में भी 1 किलो हाथी दांत बेच दिया करते थे।

कोलकाता में अमिथा के पड़ोसियों ने जांच अधिकारियों को बताया कि अमिथा आसपास के लोगों से काफी कम बातचीत किया करती थी। वैसे तो वो यहां अकेले रहा करती थी लेकिन कभी-कभी उसके परिवार के अन्य सदस्य भी यहां आया करते थे। बहरहाल आपको बता दें कि वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, 1972 की धारा 1 के तहत जानवरों को मारना और उनके दांत, हड्डी, चमड़ा, इत्यादि रखना कानूनन जुर्म है तथा इस जुर्म के लिए तीन साल की जेल और 50,000 रुपया जु्र्माने का भी प्रवाधान है। (और…CRIME NEWS)

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App