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श्मशान में महिला का शव दफनाने पर दबंगों ने दी धमकी, JCB से डेड बॉडी खोदकर ले गए परिजन

राजस्थान के बाड़मेर शहर के एक गांव से बड़ा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां एक बुजुर्ग महिला का शव सार्वजनिक श्मशान में दफनाना परिजनों के लिए मुश्किल खड़ा कर गया। गांव के दबंगों ने परिजनों को धमकाते हुए कहा कि यदि यह शव यहां से नहीं हटाया गया तो तुम्हारा हुक्का-पानी बंद […]

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प्रतीकात्मक तस्वीर। (Photo Credit – Pixabay)

राजस्थान के बाड़मेर शहर के एक गांव से बड़ा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां एक बुजुर्ग महिला का शव सार्वजनिक श्मशान में दफनाना परिजनों के लिए मुश्किल खड़ा कर गया। गांव के दबंगों ने परिजनों को धमकाते हुए कहा कि यदि यह शव यहां से नहीं हटाया गया तो तुम्हारा हुक्का-पानी बंद कर देंगे। जिसके बाद परिजनों ने शव को जेसीबी से निकाला और अपने खेत में जाकर दफनाया।

जानकारी के अनुसार, मामला बाड़मेर के सदर इलाके के रामसर कुआ गांव का है। जहां 90 वर्षीय की महिला की मौत होने पर परिजनों ने उसके शव को गांव के ही पास बने सार्वजनिक श्मशान में दफना दिया। इस बात की खबर जैसे ही गांव के दबंगों को पता चली तो उन्होंने मृतका के परिजनों से कहा यदि महिला के शव को वहां से नहीं हटाया तो उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया जाएगा।

दबंगों की धमकी के बाद परिजन हैरान और परेशान हो गए। सामाजिक बहिष्कार के डर से परिजनों ने शव को जेसीबी की मदद से बाहर निकाला और खुद के खेत में दफना दिया। रामसर कुआ गांव, बाड़मेर से करीब तीस किलोमीटर दूर है, जहां कुछ दिनों पहले अणसी देवी बीमार थी। अणसी देवी, 90 साल की थी और 27 जून को मौत हो गई थी।

मामले में अणसी देवी के पोते गणपत ने बताया कि दादी की मौत के बाद हमने उनके शव के सार्वजनिक श्मशान में दफना दिया। इसके बाद जैसे ही गांव वालों को पता चला तो वह भड़क गए। उन्होंने कहा दफनाये हुए शव को कहीं और ले जाओ, लेकिन उसे वहां से जितनी जल्दी हटा सकते हो तो हटा लो।

वहीं, मामले में दूसरे पोते जोगेंद्र ने बताया कि दादी की मौत के बाद शव दफनाने को लेकर विरोध हुआ तो उन्होंने इलाके के तहसीलदार से फोन पर मदद मांगी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब इस सिलसिले में बाड़मेर के एसडीएम से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्हें कोई सूचना नहीं है, जैसे ही बात संज्ञान में आती है कार्रवाई करेंगे।

अणसी देवी के परिजनों ने बताया कि जब तक वह जिंदा थी, तब तक पूरे इलाके में हर खुशी के मौके पर ढोलक बजाने का काम करती थी। परिवार के मुताबिक़, चाहे किसी के घर में आया नया मेहमान हो या किसी की शादी उनकी दादी अणसी देवी को सब जगह बुलाया जाता था, लेकिन मरने के बाद उन्हें चंद फीट जगह मुनासिब नहीं हुई। दाना-पानी बंद करने की धमकी के चलते उन्हें अपनी दादी के शव को निकाल कर फिर से दूसरी जगह दफनाना पड़ा।

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