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एक मां की खौफनाक कहानी- बेटे के शरीर से निकाल लिया 130 लीटर खून!

पेशे से नर्स 36 वर्षीय दोषी महिला ने महज 11 माह की उम्र से बेटे के शरीर से खून निकालना शुरू किया और ये सिलसिला अगले पांच सालों तक चलता रहा।

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

डेनमार्क में एक महिला को बेटे के शरीर से गैर जरुरी तौर पर नियमित खून निकालने पर चार साल की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने महिला को पांच सालों तक उसके बेटे के शरीर से नियमित आधा लीटर खून (पांच सालों में करीब 130 लीटर) निकालने का दोषी पाया। डीएनए की खबर के मुताबिक पेशे से नर्स 36 वर्षीय दोषी महिला ने महज 11 माह की उम्र से बेटे के शरीर से खून निकालना शुरू किया और ये सिलसिला अगले पांच सालों तक चलता रहा। हालांकि खुद के दोषी साबित होने पर महिला ने कहा कि वो हर्निंग स्थित वेस्टर्न टाऊन के जिला कोर्ट में सुनाए फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में गुहार नहीं लगाएगी।

कोर्ट में महिला ने कहा, ‘यह एक ऐसा फैसला जो मैंने जानबूझकर नहीं लिया। मुझे नहीं पता कि मैंने ऐसा करना कब शुरू किया। मुझे ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं था। मैंने मन में ऐसा धीरे-धीरे आया। मैंने खून निकालकर टायलेट में फेंक दिया और सिरिंज को कूड़े में फेंक दिया।’ जानना चाहिए कि महिला के बेटे की उम्र करीब सात वर्ष है जो अब अपने पिता के साथ रहता है। जन्म के बाद से ही वह आंत संबंधी बीमारी से पीड़ित था, लेकिन जैसे-जैसे सालों बीत गए, डॉक्टर यह नहीं समझा सके कि उनके सिस्टम में इतना कम खून क्यों था।

बच्चे को बीमारी क्या है इसकी स्थिति जानने के लिए उसे इन सालों में 110 बार ब्लड चढ़ाया गया। आखिर में डॉक्टर्स को बच्चे की मां पर शक हुआ और पुलिस ने मामले मं जांच शुरू की। पुलिस ने जांच के दौरान सितंबर 2017 में आरोपी महिला को ब्लड पैकेट के साथ गिरफ्तार कर लिया। खास बात यह है कि महिला सोशल मीडिया में खासी सक्रिय थी, जहां यूजर्स के सामने उसने खुद को सिंगल मदर बताया जो अपने बीमार बच्चे के लिए लड़ रही थी।

वहीं कोर्ट में मानसिक रोगों के एक्सर्ट्स ने बताया कि उन्हें शक है कि महिला मुनचूसन सिंड्रोम से पीड़ित है। यह एक दुर्लभ स्थिति होती है जिसमें कोई शख्स, आमतौर पर एक महिला, खुद पर आश्रित होने के चलते इस तरह की बीमारी का शिकार हो जाता है।

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