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AIIMS से बेटे का शव लेने के लिए 3 दिन तक इंतजार करते रहे पिता, नहीं मिला तो घर लौट आए और कहा- आप ही कर दें अंतिम संस्कार

Coronavirus, (COVID-19): संपर्क करने पर बच्चे के 26 साल के पिता ने 'Indian Express' को बताया कि बच्चे की डेड बॉडी लेने के लिए उनलोगों ने एम्स में तीन दिन तक इंतजार किया लेकिन जब शव नहीं मिला तो वो वहां से वापस आ गए।

Author Edited By Nishant Nandan Updated: June 2, 2020 8:31 PM
CRIME, CRIME NEWSबच्चे की मौत के बाद उसका कोविड-19 टेस्ट पॉजीटिव आया है। सांकेतिक तस्वीर।

Coronavirus, (COVID-19): दिल्ली स्थित AIIMS में नौ महीने के बच्चे की मौत के बाद उसका कोविड-19 टेस्ट पॉजीटिव आया है। बच्चे के परिवार वालों ने उसकी डेड बॉडी लेने से इनकार कर दिया है तथा एम्स प्रबंधन से कहा है कि प्रबंधन ही बच्चे का अंतिम संस्कार कर दे। बच्चे के मां-बाप मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर के रहने वाले हैं। बताया जा रहा है कि बीते सोमवार (25 मई, 2020) को बच्चे को उसके परिजनों ने एम्स में भर्ती कराया था। बच्चे के सिर में एक गांठ थीं और जिस वक्त उसे भर्ती कराया गया था उस वक्त उसकी हालत गंभीर थी। सिर में गांठ की समस्या से यह मासूम पिछले एक साल से पीड़ित था।

रामपुर जिला प्रशासन के मुताबिक, एम्स प्रशासन ने उनसे संपर्क कर कहा था कि वो बच्चे के माता-पिता के बारे में पता लगाएं क्योंकि वो अपने बच्चे को बिना अस्पताल से लिए वापस चले गए हैं। रामपुर के जिला मजिस्ट्रेट Aunjaneya Kumar ने कहा कि ‘बच्चे के परिजनों ने दिल्ली जाकर बच्चे की कस्टडी लेने से इनकार कर दिया है। बच्चे के पिता ने हमे एक पत्र दिया है जिसमें उन्होंने एम्स प्रबंधन से कहा है कि वो बच्चे का अंतिम-संस्कार कर दें। मैंने यह खत अन्य कागजातों के साथ एम्स प्रबंधन को भेज दिया है।’

संपर्क करने पर बच्चे के 26 साल के पिता ने ‘Indian Express’ को बताया कि बच्चे की डेड बॉडी लेने के लिए उनलोगों ने एम्स में तीन दिन तक इंतजार किया लेकिन जब शव नहीं मिला तो वो वहां से वापस आ गए। पिता के मुताबिक पिछले साल अक्टूबर से ही वो अपने बच्चे का इलाज करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि ‘मार्च में लॉकडाउन होने के बाद हम उसे लेकर एम्स नहीं जा सके।

पिछले हफ्ते जब मेरे बेटे की हालत ज्यादा खराब हो गई तब हमने उसे रामपुर के ही एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया। वहां चिकित्सकों ने हमें एम्स जाने की सलाह दी थी। मैंने एक कार रिजर्व किया और 25 मई को अपने बेटे को लेकर एम्स आया था। मेरे साथ मेरी पत्नी भी थी।’

एम्स में चिकित्सकों ने कोविड-19 के टेस्ट के लिए हम सभी के सैम्पल लिए थे। 26 मई को मेरे बेटे की मौत हो गई। उसी दिन मुझे बताया गया कि मेरे बेटे की रिपोर्ट पॉजीटिव आई है जबकि मेरी और पत्नी की निगेटिव। उस वक्त एम्स के चिकित्सकों ने हमे डेड बॉडी देने से इनकार कर दिया था और हमसे कहा था कि डेड बॉडी तब ही मिलेगी जब सारी जरुरी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी।

बच्चे के पिता के मुताबिक 29 मई तक वो दिल्ली में कार के अंदर ही रह रहे थे और अपने बेटे की डेड बॉडी मिलने का इंतजार करते रहे थे। उनके पास पैसे नहीं बचे थे जिसकी वजह से उन्हें बिना शव लिए ही वहां से वापस आना पड़ा।

‘रामपुर वापस आने के बाद 30 मई को हमें एम्स के एक चिकित्सक के यहां से फोन आया और हमें डेड बॉडी ले जाने के लिए कहा गया। मैंने उनको कहा कि यह अब मेरे लिए संभव नहीं है इसलिए आप ही शव का अंतिम संस्कार कर दें।’

बहरहाल इस मामले में रामपुर प्रशासन ने पति-पत्नी के सैम्पल दोबारा कोविड-19 टेस्ट के लिए लिये हैं। एहतियात के तौर पर जिस स्थानीय नर्सिंग होम में बच्चे को भर्ती कराया गया था उसे सील कर दिया गया है तथा कर्मचारियों को क्वारन्टीन होने के लिए कहा गया है।

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