अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी रेप केस 2024 चर्चित मामला फिर से चर्चा में आ गया है। केस ने नया मोड़ ले लिया और फिर से इसकी जांच शुरू कर दी गई है। असल में विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी के इंटरव्यू के बाद बंद हो चुके इस केस को फिर से खोल दिया है। विश्वविद्यालय की ओर से लिए गए इस फैसले के बाद कैंपस में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। जानिए आखिर क्यों 2024 के इस रेप केस को दोबारा खोला गया है।

एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी वकीलों ने 2024 में कॉर्नेल फ़्रेटरनिटी में हुए रेप की जांच फिर से शुरू कर दी है। एक पूर्व छात्रा ने मुक़दमा करके आरोप लगाया था कि उसे नशीली दवा देकर यौन शोषण किया गया, जबकि आरोपी और यूनिवर्सिटी इन मुख्य दावों को नकार रहे हैं।

कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के एक फ्रेटरनिटी हाउस में 2024 में हुए गैंगरेप के आरोपों की आपराधिक जांच न्यूयॉर्क के सरकारी वकीलों ने फिर से शुरू कर दी है। यह कदम यूनिवर्सिटी के खिलाफ एक पूर्व छात्रा द्वारा मुकदमा दायर करने के बाद उठाया गया है।

रॉयटर्स के अनुसार, टॉमपकिंस काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी मैथ्यू वैन हाउटेन ने कहा कि उनका कार्यालय इस मामले को ग्रैंड जूरी के सामने पेश करने की योजना बना रहा है। जूरी यह तय करेगी कि कॉर्नेल की ‘ची फाई’ (Chi Phi) फ्रेटरनिटी के सात मौजूदा और पूर्व सदस्यों के खिलाफ आपराधिक आरोप लगाए जाएं या नहीं।

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2024 के गैंगरेप मामले की नए सिरे से समीक्षा

यह जांच तब फिर से शुरू हुई जब कॉर्नेल की एक पूर्व छात्रा ने इस महीने की शुरुआत में फ्रेटरनिटी के सात सदस्यों, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और अन्य लोगों के खिलाफ सिविल शिकायत दर्ज कराई। महिला ने आरोप लगाया कि 19 अक्टूबर 2024 को ‘ची फाई’ फ्रेटरनिटी के कई सदस्यों ने उसे नशीला पदार्थ देकर उसके साथ यौन उत्पीड़न और बलात्कार किया। मुकदमे में एक स्नैपचैट ग्रुप चैट का भी जिक्र है, जिसके बारे में महिला का आरोप है कि उसमें फ्रेटरनिटी के सदस्य उसके साथ संबंध बनाने के बारे में बातचीत कर रहे थे। वकील ने कहा कि सिविल मुक़दमे में लगाए गए आरोप उस बयान से अलग हैं जो महिला ने नवंबर 2024 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी पुलिस को दिया था। उन्होंने कहा कि प्रॉसिक्यूटर यह पता लगाना चाहते हैं कि क्या मुक़दमे में ऐसे सबूत हैं जो शुरुआती जांच के दौरान उपलब्ध नहीं थे और क्या वे सबूत आपराधिक आरोपों का आधार बन सकते हैं।

2024 में आपराधिक आरोप क्यों नहीं लगाए गए?

वकील वैन हाउटेन के अनुसार, महिला के शुरुआती बयान में यह नहीं कहा गया था कि उसे उसकी जानकारी के बिना नशीली दवा दी गई थी या उसे यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया था। उन्होंने आगे कहा कि महिला ने पुलिस को बताया था कि उसने अपनी मर्ज़ी से शराब और नशीली दवाएं ली थीं और वह फ्रेटरनिटी के सदस्यों के साथ यौन गतिविधियों में शामिल थी। ABC न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, उस बयान और कॉर्नेल पुलिस की जांच के आधार पर, उनके ऑफ़िस ने उस समय आपराधिक आरोप नहीं लगाए थे।

वकील ने कहा कि उन्हें महिला की बात पर भरोसा था, लेकिन 2024 में सरकारी वकीलों के पास ऐसी कोई जानकारी नहीं थी जिससे आपराधिक मुकदमा चलाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि उनके ऑफिस ने आरोपों की अलग से जांच नहीं की, बल्कि कॉर्नेल पुलिस की जांच पर ही भरोसा किया।

पीड़िता के वकील ने सरकारी वकील की बात पर सवाल उठाए

महिला के वकील, थॉमस पी. जिउफ्रा ने डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी द्वारा महिला के शुरुआती बयान के बारे में बताई गई बातों पर सवाल उठाए हैं और जांच के तरीके की आलोचना की है। जिउफ्रा ने कहा कि शुरुआती शिकायत के बाद उनकी क्लाइंट (पीड़िता) से किसी ट्रेंड डिटेक्टिव या सरकारी वकील ने कभी पूछताछ नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों को ऐसे सबूत दिए गए थे जिनसे आगे की जांच शुरू होनी चाहिए थी।

रॉयटर्स के अनुसार, सबूतों में एक विवादित चीज़ स्नैपचैट ग्रुप चैट का स्क्रीनशॉट है, जिसका ज़िक्र सिविल केस में किया गया है। ABC न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में, वैन हाउटेन ने कहा कि उनके ऑफिस को 2024 में यह मटीरियल नहीं मिला था, जबकि जिउफ्रा का कहना है कि उस समय यह कॉर्नेल पुलिस को दिया गया था। ABC न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, DA का ऑफिस अब ग्रैंड जूरी के सामने केस पेश करने से पहले सबूतों की दोबारा समीक्षा करेगा।

केस पर कॉर्नेल यूनिवर्सिटी का बयान

कॉर्नेल यूनिवर्सिटी ने सोमवार को एक नए बयान में कहा कि वह आपराधिक जांच को फिर से शुरू करने के फैसले का समर्थन करती है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि उसने 2024 में आरोपों की ‘टाइटल IX’ के तहत अलग से जांच की थी। कॉर्नेल के अनुसार, फैकल्टी और स्टाफ के एक पैनल ने शिकायतकर्ता और आरोपी के सबूत सुने और उसके बाद सज़ा सुनाई, जिसमें यूनिवर्सिटी से निकालना (expulsion) और सस्पेंशन शामिल था। कॉर्नेल ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि शामिल छात्रों को सज़ा के तौर पर सिर्फ़ निबंध लिखने का काम दिया गया था।

सोमवार के बयान में कहा गया, “सुनवाई के बाद पैनल ने कई तरह की सज़ाएं सुनाईं, जिनमें कॉर्नेल से निकालना और सस्पेंशन शामिल था। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए थे, उनमें से किसी को भी शामिल होने के एकमात्र नतीजे के तौर पर निबंध लिखने का मौका नहीं दिया गया।” कॉर्नेल ने इंटरव्यू में कहा, “यह कहना गलत है कि यूनिवर्सिटी ने शामिल लोगों को कोई ठोस सज़ा नहीं दी।”

आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया

केस में नामजद कम से कम दो लोगों के वकीलों ने आरोपों से इनकार किया है। स्कॉट क्रेट्ज़मार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील जेरेमी सैलैंड ने कहा कि उनके क्लाइंट ने महिला के साथ यौन उत्पीड़न या उसे छूने जैसा कोई काम नहीं किया और उन्होंने मुकदमे में लगाए गए आरोपों को गलत बताया।

एक और आरोपी स्कॉट नॉरिस ने सेक्सुअल एक्टिविटी या ड्रग्स के इस्तेमाल में शामिल होने से इनकार किया। उसने माना कि उसने एक मैसेज भेजा था जिसका ज़िक्र केस में है, लेकिन कहा कि जब कथित गलत हरकत हुई, तब वह वहां मौजूद नहीं था।

उसने अपने वकील के ज़रिए कहा, “मैंने किसी भी सेक्सुअल एक्टिविटी या ड्रग्स के इस्तेमाल में हिस्सा नहीं लिया। कॉर्नेल ने मुझे सेक्सुअल एक्टिविटी और ड्रग्स के इस्तेमाल से जुड़े उन आरोपों के लिए ज़िम्मेदार नहीं पाया, जिनके कारण दूसरों को गंभीर नतीजे भुगतने पड़े। मैंने बिना सोचे-समझे स्नैपचैट का इस्तेमाल किया और कुछ देर के लिए उस कमरे में रुका जहां गलत हरकत हुई थी, लेकिन उस समय नहीं जब वह हरकत हुई थी।”

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