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महिला IAS ऑफिसर से करीबी बढ़ाने के लिए CISF कमांडेंट की साजिश? कार में ड्रग्स छिपा देने लगा मदद का झांसा, ऐसे हुआ खुलासा

सीआईएसएफ के वरिष्ठ कमांडेंट व विदेश मंत्रालय के सुरक्षा मंत्रालय में निदेशक रंजन प्रताप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला आईएएस ऑफिसर से करीबी बढ़ाने के लिए साजिश रची। इसके लिए उन्होंने महिला के पति की कार में 550 ग्राम ड्रग्स रखवाकर उन्हें फंसाने की कोशिश की।

आरोपियों को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस, फोटो सोर्स – इंडियन एक्सप्रेस

सीआईएसएफ के वरिष्ठ कमांडेंट व विदेश मंत्रालय के सुरक्षा मंत्रालय में निदेशक पर एक महिला आईएएस ऑफिसर से करीबी बढ़ाने के मकसद से साजिश रचने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने महिला के पति की कार में उस वक्त 550 ग्राम चरस रखवा दी, जब गाड़ी उनके घर के बाहर खड़ी थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट फाइल कर दी है और सीआईएसएफ अफसर व उनके एक दोस्त को गिरफ्तार कर लिया है। अफसर की पहचान रंजन प्रताप सिंह के रूप में हुई है।

पुलिस ने दी यह जानकारी: दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘‘इस मसले में 9 अक्टूबर को असिस्टेंट कमांडेंट सुभाष चंद की ओर से शिकायत मिली थी, जिसके बाद लोधी कॉलोनी पुलिस थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई। जांच के बाद रंजन प्रताप सिंह व उसके दोस्त नीरज चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया। हमने दिल्ली की एक अदालत में चार्जशीट दायर कर दी है और मामले में सुनवाई चल रही है। इस घटना में तीसरे आरोपी की भी पहचान हो गई है। फिलहाल वह लापता है और उसे पकड़ने के लिए टीमें अलीगढ़ में मौजूद हैं। आरोप है कि रंजन प्रताप को उससे ही ड्रग्स मिली थी।’’

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पुलिस के पास 60 गवाह: चार्जशीट में पुलिस ने बताया है कि उसके पास 3 स्टार गवाह व टेक्निकल सबूत मिलाकर कुल 60 गवाह हैं। पुलिस को प्रगति विहार हॉस्टल की एक सीसीटीवी फुटेज मिली थी, जिसमें दोनों आरोपी 4 अक्टूबर को हॉस्टल के अंदर टहल रहे थे और उन्होंने कथित तौर पर कार में चरस रख दी। एक स्थानीय निवासी ने उन्हें कार के पास देखा था। पुलिस को 9 अक्टूबर की भी एक सीसीटीवी फुटेज मिली, जिसमें दोनों आरोपियों ने अपनी कार एक पेट्रोल पंप के पास रोक रखी है। इसके बाद उन्होंने सीआईएसएफ अधिकारियों को कॉल करके ड्रग्स की जानकारी दी थी।

आरोपियों ने पहचान परेड से किया इनकार: पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने गवाहों के सामने पहचान परेड से साफ इनकार कर दिया। चार्जशीट में 3 मुख्य गवाहों का जिक्र किया गया है। इसमें अरबिंदो मार्ग के पास मिलने वाला एक हॉकर है, जिसके फोन से कथित तौर पर चौहान ने कॉल किया था। हॉकर का दावा है कि चौहान ने एक अर्जेंट कॉल करने के लिए उसका फोन मांगा था। उसके पास कागज का एक टुकड़ा था, जिस पर कई नंबर लिखे थे। हॉकर ने बताया कि उस दौरान रंजन प्रताप अपनी कार के पास खड़ा था और कॉल करने के बाद दोनों चले गए थे। पुलिस ने कागज का वह टुकड़ा बरामद कर लिया, जिस पर सीआईएसएफ के 4 वरिष्ठ अधिकारियों के नंबर लिखे थे।

20 साल से महिला से थी पहचान: रंजन प्रताप ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि 20 साल पहले सिविल सर्विसेज की तैयारी के दौरान उसकी मुलाकात महिला से हुई थी। साल 2000 में दोनों ने उत्तराखंड में एक साथ 4 महीने का फाउंडेशन कोर्स किया था। इसके बाद महिला की शादी हो गई, लेकिन दोस्त की तरह दोनों एक-दूसरे के संपर्क में थे। पुलिस का दावा है कि रंजन प्रताप उस वक्त नाराज हो गया, जब महिला ने दूसरे विभाग ट्रांसफर होने के बाद उसके कॉल व मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया।

ऐसे रची साजिश: चार्जशीट में पुलिस ने दावा किया है कि रंजन प्रताप लगातार महिला से संपर्क करने की कोशिश करता रहा, लेकिन एक दिन महिला ने उसे फटकार दिया, जिससे रंजन भड़क गया। उसने महिला के पति को फंसाने की कोशिश की, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में काम करता है। रंजन ने अपने दोस्त चौहान के साथ मिलकर उसे नारकोटिक्स के झूठे मामले में फंसाने का प्लान बनाया। पति को हिरासत में लिए जाने के कुछ घंटे बाद महिला ने रंजन को कॉल किया था और मदद भी मांगी थी।

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