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27 साल पहले हुई रसोईए की हत्या मामले में IAF के 3 अधिकारियों को CBI अदालत ने दी उम्रकैद की सजा

Jamnagar: नवंबर 1995 में, वायु सेना के जामनगर CSD (कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट) कैंटीन से 94 शराब की बोतलें चोरी हो गईं और यह संदेह था कि इसके पीछे रसोइया गिरजा रावत का हाथ था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर। (Photo Credit – Freepik)

गुजरात के जामनगर में रक्षा विंग के लिए रसोइया के रूप में काम कर रहे एक व्यक्ति की 27 साल पुरानी हत्या के मामले में सीबीआई अदालत ने भारतीय वायु सेना के पूर्व कर्मियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामला वायु सेना की कैंटीन से शराब चुराने का था, जिसमें तीन अधिकारियों पर रसोइए को प्रताड़ित करने का आरोप था; जो सही पाए गए। इसी उत्पीड़न के चलते रसोइए की मौत हो गई थी।

अहमदाबाद की सीबीआई अदालत ने जामनगर में वायु सेना-1 मेस में काम करने वाले रसोइए गिरजा रावत की हत्या के मामले में भारतीय वायुसेना के तत्कालीन स्क्वाड्रन लीडर अनूप सूद, अनिल केएन और महेंद्र सिंह शेरावत को दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। गिरजा रावत पर वायु सेना की कैंटीन से शराब चुराने का आरोप था, जिसके बाद कुछ अधिकारी उन्हें घर से जबरन उठा ले गए थे।

13 नवंबर, 1995 को तत्कालीन स्क्वाड्रन लीडर अनूप सूद सहित वायु सेना पुलिस के लगभग एक दर्जन अधिकारियों ने कथित तौर पर गिरजा रावत के घर की तलाशी ली और उन्हें जबरन ले गए। उनसे कथित तौर पर यह भी कबूल कराया गया कि उन्होंने वायु सेना की कैंटीन से शराब चुराई थी। उस शाम रावत की पत्नी शकुंतला देवी ने गार्ड रूम जाकर अधिकारियों से उनके पति को रिहा करने का अनुरोध किया था।

तब गिरजा रावत की पत्नी को बताया गया था कि उसके पति को जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा। इसके बाद आरोपियों ने गिरजा रावत को कथित तौर पर प्रताड़ित किया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के अगले दिन ही गिरजा रावत की मृत्यु के बारे में उनकी पत्नी को सूचित कर शव लेने के लिए कहा गया था। इस मामले में रसोइए गिरजा रावत की पत्नी ने शिकायत दर्ज कराई थी।

फिर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 22 फरवरी, 2012 को गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश पर रावत की पत्नी शकुंतला देवी द्वारा एक आवेदन दायर करने और गुजरात पुलिस से जांच अपने हाथ में लेने के बाद मामला दर्ज किया था। गिरजा रावत करीब 15 साल से जामनगर के वायु सेना-1 में रसोइया था और जब यह घटना हुई तब वह शहर के वायु सेना-1 मेस में ही काम कर रहा था।

सीबीआई ने गहन जांच के बाद 30 जुलाई 2013 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। साथ ही गिरजा रावत के शव परीक्षण में आंतरिक और बाहरी एंटी-मॉर्टम चोटों का पता चला। फिर मामले में निचली अदालत ने आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें दोषी करार दिया। जबकि तीन को अदालत ने बरी कर दिया और एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई।

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