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बिंदी यादव: लालू-नीतीश के करीबी पर राष्ट्रदोह का आरोप, बेटा हत्या और पत्नी शराब रखने के आरोप में गई जेल; माफिया की पत्नी JDU की प्रत्याशी

साल 1980 तक बिंदी यादव की पहचान एक सड़क छाप गुंडे की थी। उसपर साइकिल चोरी के इल्जाम लगे थे और यह पहला ऐसा आरोप था जिसमें वो गिरफ्तार हुए।

crime, crime news, biharमनोरमा देवी के पति बिंदी यादव की इसी साल कोरोना से मौत हुई है। फाइल फोटो

इस बार के बिहार विधानसभा चुनाव में कई पार्टियों ने कुछ दागियों से परहेज तो किया लेकिन उनकी पत्नियों को खुलकर टिकट दिया। आज हम बात करेंगे गया के अतरी विधानसभा सीट से जदयू की प्रत्याशी मनोरमा देवी की। मनोरमा देवी के पति कुख्यात माफिया बिंदी यादव पर साइकिल चोरी से लेकर राष्ट्रदोह तक के केस दर्ज हुए। लेकिन बिंदी यादव के सियासत में उनके आने के बाद लालू प्रसाद यादव से लेकर नीतीश कुमार तक किसी ने भी उनसे परहेज नहीं किया। यहीं वजह थी कि वो कभी राजद के करीब रहे तो कभी जदयू के। खुद मनोरमा देवी भी जेल जा चुकी हैं लेकिन जदयू ने एक बार फिर उन्हीं को टिकट थमाकर अतरी से विरोधियों को चुनौती दे दी है।

बिंदी यादव के आपराधिक इतिहास को खंगालने पर यह पता चलेगा कि किस तरह वो एक मामूली क्रिमिनल से डॉन बना और फिर बन गया विधायक का पति। साल 1980 तक बिंदी यादव की पहचान एक सड़क छाप गुंडे की थी। उसपर साइकिल चोरी के इल्जाम लगे थे और यह पहला ऐसा आरोप था जिसमें वो गिरफ्तार हुए। बिंदी यादव को बिंदेश्वरी यादव के नाम से भी जाना जाता है।

कभी गया जिला परिषद के अध्यक्ष रह चुके बिंदी यादव के बारे में कहा जाता है कि गया से सटे झारखंड के इलाकों में उसकी पहचान एक माफिया के तौर पर रही है। बिंदी के गुर्गे झारखंड से आने वाले ट्रकों से रोजाना लाखों रुपए की उगाही अवैध रूप से एंट्री कराने के नाम पर लेते हैं। इसके अलावा बिंदी यादव की कंस्ट्रक्शन कंपनियां और बालू के घाट भी हैं।

हालांकि जुर्म की दुनिया में उसके काले कारनामों की यह तो एक बानगी भर है। बताया जाता है कि साल 1990 में बिंदी ने बच्चू नाम के अपराधी से हाथ मिलाया और फिर करीब तीन साल तक आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता रहा। धीरे-धीरे बिंदी और बच्चू के अपराध के चर्चे होने लगे। इस दौरान बिहार में लालू यादव की सरकार थी। जब गया के डीएम और एसपी ने बिंदी और बच्चू पर सख्त रवैया अपनाना शुरू किया तो उन्हें लगा कि पॉलिटिक्स ज्वाइन करने के बार सुरक्षित रह पाएंगे।

साल 1990 में ही बिंदी ने राष्ट्रीय जनता दल ज्वाइन कर लिया। 2001 में बिंदी गया डिस्ट्रिक्ट बोर्ड का चेयरमैन बना और साल 2006 तक इस पद पर बना रहा। साल 2005 में बिंदी ने गया (ग्रामीण) से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गया। 2010 में गुरुआ से आरजेडी की टिकट पर बिंदी ने दोबारा विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन एक बार फिर उसे हार का सामना करना पड़ा। इसी चुनाव के दौरान पर्चा भरते समय एफिडेविट में बिंदी ने बताया था कि उसके ऊपर 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके बाद बिंदी ने 2010 में लालू की पार्टी छोड़ दी और नीतीश की पार्टी जेडीयू ज्वाइन कर ली।

साल 2011 में पुलिस ने बिंदी के पास से प्रतिबंधित हथियारों की 6000 गोलियां बरामद की थीं जिसके बाद उसपर राष्ट्रद्रोह का केस दर्ज किया गया था। बिंदी पर लूट, अपहरण और हत्या के 15 से ज्यादा मामले दर्ज थे। उस पर नक्सली संगठन भाकपा-माओवादी को प्रतिबंधित हथियारों की गोलियां सप्लाई करने का आरोप भी लगा। बताया जाता है कि गया और दिल्ली में बिंदी यादव के नाम से मॉल, होटल और करीब 15 पेट्रोल पंप हैं।

बिहार के चर्चित सचदेवा मर्डर केस में बिंदी यादव के बेटे रॉकी यादव और उसके 2 अन्य साथियों को उम्रकैद की सजा हुई थी। कहा जाता है कि रॉकी यादव ने सिर्फ इसलिए आदित्य सचदेवा को मार डाला था क्योंकि उसने दबंग नेता के बेटे की गाड़ी को सड़क पर ओवरटेक कर लिया था।

रॉकी यादव की मां मनोरमा देवी पर शराबबंदी वाले राज्य बिहार में शराब रखने का आरोप भी लगा था। पुलिस ने मनोरमा देवी के घर से शराब बरामद किया था। इस मामले में मनोरमा देवी ने जेल की हवा भी खाई। हालांकि बाद में वो रिहा हो गईं। आपको बता दें कि इसी साल जुलाई के महीने में मनोरमा देवी के पति बिंदी यादव की मौत कोरोना से हुई है।

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