माखन चोरी बाल लीला, फिर मिठाई चुराना कैसे हुआ अपराध?- आरोपी बच्चे को बरी कर बोले जज; जानें- क्या है पूरा विवाद?

मिठाई चोरी के आरोप में गिरफ्तार एक बच्चे को कोर्ट ने बरी करते हुए कहा कि माखन चोरी बाल लीला है तो फिर मिठाई चुराना अपराध कैसे हुआ। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस को भी फटकार लगाई है। मामला बिहार के नालंदा जिले का है।

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मिठाई चोरी के आरोप में गिरफ्तार किशोर बरी (प्रतीकात्मक फोटो)

बिहार के एक कोर्ट ने चोरी के आरोप में गिरफ्तार बच्चे को यह कहते हुए रिहा कर दिया कि, माखन चोरी बाल लीला है तो मिठाई चोरी करना अपराध कैसे हुआ। घटना बिहार के नालंदा जिले की है।

दरअसल बच्चे पर आरोप था कि उसने पड़ोसी के फ्रिज से मिठाई चुराकर खाई है। मिठाई की चोरी पकड़े जाने के बाद पड़ोसी ने पुलिस को बुला लिया और बच्चे को गिरफ्तार करवा दिया। बच्चे को जब कोर्ट में पेश किया गया, तब जज ने एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस को भी फटकार लगाई है।

दरअसल बच्चा आरा का रहने वाला है और नालंदा जिले के हरनौत में अपनी नानी के यहां आया हुआ था। एक दिन जब उसे भूख लगी तो वो पड़ोसी के घर चला गया और फ्रिज से मिठाई निकालकर खाने लगा। इसके बाद वहां रखा मोबाइल उठाया और गेम खेलने लगा। इतने में उसे पड़ोसी ने पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।

बच्चे को जब जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया, तब जज साहब उसके ऊपर लगे आरोप देखकर चौंक गए। डरा सहमा बच्चा जब काफी कोशिशों के बाद अपना दर्द बयां किया तो जज साहब ने पुलिस को फटकार लगाते हुए उसे छोड़ने का आदेश दिया। जज साहब ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में भगवान की बाल लीला को दर्शाया गया है। कृष्ण दूसरे के घर से माखन चुरा कर खा लेते थे, मटका भी फोड़ देते थे। अगर आज का समाज होता तो बाल लीला की कथा नहीं होती। भूख के कारण बच्चे का मिठाई चुराना अपराध कैसे हो गया। जज साहब ने शिकायतकर्ता महिला से भी सहिष्णु होने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा कि अगर उनका बच्चा मिठाई चुराता तो क्या वो उसे पुलिस को सौंप देती या समझाती?

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि पुलिस को इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं करनी चाहिए थी, इसे जनरल डायरी में दर्ज करना चाहिए था। बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट को बताया कि बच्चे के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, एक दुर्घटना के बाद पिता रोग ग्रस्त हो गए हैं और मां की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। ननिहाल में भी सिर्फ नानी हैं। परिवार में कमाई का जरिया कुछ भी नहीं है।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए बच्चे को रिहा कर दिया है। साथ ही आरा जिला बाल संरक्षण ईकाई को आदेश दिया है कि किशोर सुरक्षित रहे, किसी तरह की तंगहाली का शिकार होकर फिर से अपराध करने के लिए मजबूर ना हो।

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