बिहार: मंत्री, कलेक्टर की हत्या का लगा आऱोप, जेल में लड़कियों का डांस कराने का भी इल्जाम; गैंगस्टर से सियासी चोला पहनने वाले मुन्ना शुक्ला की कहानी

कहा जाता है कि साल 1994-1998 तक मुन्ना शुक्ला ने ठेकेदारी से खूब पैसा बनाया। साथ ही बिहार के दूसरे बाहुबलियों से अदावत भी मोल ली।

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मुन्ना शुक्ला। फाइल फोटो। फोटो सोर्स – सोशल मीडिया

जिस तरह उत्तर प्रदेश में खतरनाक गैंगस्टरों की कोई कमी नहीं उसी तरह बिहार भी खूंखार अपराधियों का गढ़ रहा है। कई ऐसे अपराधी हुए जिन्हें अदालत ने सजा दी तो कई ऐसे भी हुए जिनपर गंभीर अपराधों के इल्जाम तो लगे पर कई मामलों में वो बेदाग साबित हुए। इन्हें बाहुबली भी कहा गया और फिर उनकी एंट्री राजनीति में भी हुई। हम बात कर रहे हैं मुन्ना शुक्ला की।

मुन्ना शुक्ला को कभी उत्तर बिहार का अंडरवर्ल्ड डॉन भी कहा गया था। कहा जाता है कि मुन्ना शुक्ला के बड़े भाई छोटन शुक्ला कभी अपराध जगत में बड़ा नाम थे। बताया जाता है कि छोटन का आपराधिक इतिहास यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ था और बाद में वो ठेकेदारी से जुड़ गये थे। साल 1994 में उनकी हत्या हो गई थी। कहा जाता है कि भाई की हत्या के बाद मुन्ना शुक्ला ने अपराध की दुनिया में कदम रखा।

आरोप है कि मुन्ना शुक्ला ने भाई छोटन शुक्ला की शव यात्रा निकाली और विरोध प्रदर्शन कराए। इस दौरान गोपालगंज के डीएम भीड़ शांत कराने पहुंचे थे। आरोप है कि इसी दौरान मुन्ना शुक्ला ने भीड़ को उकसा दिया जिसके चलते गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। यह पहला मामला था जब मुन्ना शुक्ला का नाम किसी हत्या के केस में आया।

कहा जाता है कि साल 1994-1998 तक मुन्ना शुक्ला ने ठेकेदारी से खूब पैसा बनाया। साथ ही बिहार के दूसरे बाहुबलियों से अदावत भी मोल ली। इसी दौरान मुजफ्फरपुर इलाके में बृजबिहारी ऐसे नेता थे जो मुन्ना के बड़े भाई छोटन के दौर से ही बाहुबलियों के सामने चुनौती पेश कर रहे थे। 3 जून 1998 को मंत्री बृज बिहारी प्रसाद इलाज के लिए पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान अस्पताल में थे।

रात को पार्क में टहल रहे थे, तभी अपराधियों ने उन्हें गोलियों से भून डाला। इस केस में राजन तिवारी और विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला, सूरजभान सिंह सहित 8 लोगों को आरोपी बनाया गया। इस वारदात में निचली अदालत से सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, लेकिन 25 जुलाई 2014 को मुन्ना शुक्ला, सूरजभान सिंह समेत सभी आरोपियों को पटना हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। इसके बाद मुन्ना शुक्ला ने राजनीति में हाथ आजमाया। कभी वो निर्दलीय मैदान में कूदे तो कभी जदयू के साथ रहे।

मुन्ना शुक्ला पर जेल में महिला डांसरों को नचवाने का आरोप भी लगा था। कुछ दिनों तक यह खबर मीडिया में भी छाई रही थी। इसके बाद मुन्ना शुक्ला ने जेल से ही पीएचडी करने की बात भी कही थी, हालांकि वो विवादों में भी रहा।

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