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बिहार: स्मैकियों का खून हजारों में बेचता था गिरोह, बिना जांच लोगों को चढ़ा दिया एक्सपायर ब्लड, चोरी मामले में छानबीन के बीच खून के धंधे का भंडाफोड़

बिहार: स्वास्थ्य विभाग में नकली खून की आशंका को भी लेकर हड़कंप है। जांच में जुटे अधिकारियों का कहना है कि ब्लड को सीएस ऑफिस में सुरक्षित रखवा दिया गया है।

बिहार: स्मैकियों का खून हजारों में बेचता था गिरोह, बिना जांच लोगों को चढ़ा दिया एक्सपायर ब्लड, चोरी मामले में छानबीन के बीच खून के धंधे का भंडाफोड़
प्रतीकात्मक तस्वीर। (Photo Credit – Pixabay)

बिहार की राजधानी पटना में पुलिस एक लॉकेट चोरी के मामले में जगह-जगह गिरोह के मुखिया को धर दबोचने के लिए छापेमारी कर रही थी, तभी पुलिस को खून के काले कारोबार के बारे में पता चला। जांच हुई तो पुलिस के होश उड़ गए, पता चला कि गिरोह स्मैकियों का खून निकालकर जरूरत के हिसाब से 5-10 हजार में बेच दिया करता था। हैरानी भरी बात यह थी कि पैकेट में बंद खून एक्सपायरी डेट का था और बिना जांच के सैकड़ों लोगों में चढ़ा दिया गया।

मामला पटना के कोतवाली क्षेत्र का है, जहां पुलिस के लॉकेट चोरी के मामले में जांच कर रही थी। इसी दौरान पता चला कि संतोष नाम का एक शख्स पत्रकार नगर थाना क्षेत्र में चोरी का गिरोह चलाता है। लीड मिलते ही पटना पुलिस ने छापेमारी कर संतोष को लॉकेट-सोने के गहनों समेत धर दबोचा। इसी छापेमारी में जब पुलिस ने उसके घर में रखे फ्रिज को खोला तो उसमें करीब 44 पैकेट खून के रखे हुए थे।

पुलिस टीम यह देखकर सन्न रह गए क्योंकि, जहां पैकेट बंद खून रखा गया था वहीं पर बगल में सब्जियां भी रखी गई थी। इसी खेल की जांच में पुलिस ने एक और आरोपी अजय द्विवेदी को पकड़ा गया। पूछताछ में सामने आया कि संतोष पटना की लैब निवेदा में तकनीशियन है और अजय का काम स्मैकियों को लाना और उनका खून संतोष से निकलवाना होता है। अजय कुमार द्विवेदी वैशाली और संतोष जमुई का रहने वाला है।

पूछताछ में पता चला कि अजय जिन स्मैकियों को लाता उन्हें खून के बदले 700 रुपए दिए जाते थे और संतोष जरूरत के हिसाब पैकेटबंद खून 5 से 10 हजार तक बेचता था। हैरानी वाली बात यह है कि संतोष ने इस खून को सामान्य फ्रिज में सब्जियों के साथ उसी लैब के ब्लड बैग में रखता था, जिसमें वह काम करता था।

जबकि खून को एक अलग तरह के डीप फ्रीजर में रखा जाता है। जिसमें समय-समय पर तापमान का ध्यान रखना होता है और किसी को भी ब्लड चढ़ाने से पहले जांच जरूरी होती है। इसके अलावा, बरामद हुए ब्लड बैग पर न तो कलेक्शन का डेट था और न ही एक्सपायरी डेट दी गई थी।

संतोष ने खुलासा किया कि वह निवेदा ब्लड सेंटर से करीब 250 ब्लड बैग लेकर आया था। अब तक वह करीब 216 पैकेट खून बेच चुका है, जबकि 44 पैकेट पुलिस ने उसके घर के फ्रिज से बरामद किये हैं। अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के सामने समस्या यह कि जिन 216 लोगों को यह खून चढ़ाया गया है उन्हें ट्रैक कैसे किया जाए। वहीं, बरामद किये गए पैकेटों की जांच जारी है।

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First published on: 24-07-2022 at 11:32:19 am