बिहार: बीजेपी सांसद, विधायक, मंत्री के जो परिजन दुनिया में नहीं रहे उन्हें भी मिली पेंशन- आरटीआई; रविशंकर प्रसाद बोले- जानकारी गलत

बिहार में पूर्व विधायक और उनके आश्रितों के पेंशन से संबंधित एक गड़बड़ी सामने आई है। जो विधायक या उनके आश्रित इस दुनिया में नहीं हैं, उनके नाम पर भी महीनों से पेंशन जारी हो रही है।

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बिहार में पूर्व विधायकों के पेंशन में गड़बड़ी (प्रतीकात्मक फोटो)

बिहार में पूर्व विधायकों, और उनके आश्रितों को दिए जाने वाले पेंशन में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। एक आरटीआई से खुलासा हुआ है कि सांसद-विधायक के जो परिजन अब इस दुनिया में नहीं हैं, उन्हें अभी तक पेंशन मिल रही है।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार विधानसभा से उन सदस्यों और उनके परिजनों को अब भी पेंशन मिल रही है, जो अब इस दुनिया में है हीं नहीं। रिपोर्ट के अनुसार पटना के सांसद रविशंकर प्रसाद की माता जी, राज्य पथ निर्माण विभाग के मंत्री नितिन नवीन की मां, भाजपा के पूर्व विधायक स्व. नवल किशोर प्रसाद सिन्हा की पत्नी मीरा सिन्हा को भी पेंशन मिल रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन तीनों में से कोई भी अब इस दुनिया में नहीं है।

इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और पटना से सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह पूरी तरह से बेबुनियाद और तथ्यहीन है। उन्होंने कहा- “25 दिसंबर 2020 को माता जी के देहावसान के बाद उनका पेंशन अकाउंट 31 दिसंबर 2020 को बंद कर दिया गया था। बंद अकाउंट में पेंशन आना संभव ही नहीं है”।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हिए बिहार विधानसभा अध्यक्ष वीके सिन्हा ने कहा कि वे इस मामले को देखेंगे, क्योंकि यह कोषागार द्वारा वितरित किया जाता है। उन्होंने कहा- “विधानसभा केवल पेंशन निर्धारित करती है जो कोषागार द्वारा वितरित की जाती है। लाभार्थी हर साल जीवन प्रमाण पत्र जमा करते हैं लेकिन कुछ जानकारी इस साल कोरोना के कारण अपडेट नहीं की जा सकी। हम इस पर गौर करेंगे।

वहीं बिहार के पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन मे भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने भी अपनी माता जी के निधन के बाद पेंशन अकाउंट को बंद करा दिया था। उन्होंने कहा कि वो मेल करके बैंक को माता जी के निधन की दे दी थी। इसके बाद जो पेंशन की राशि आई थी, वो वापस ले ली गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार बिहार में कुल 991 पूर्व विधायक और उनके आश्रित पेंशन ले रहे हैं। जिसमें पटना में सबसे ज्यादा पेंशन पर खर्च किया जा रहा है, तो वहीं मुजफ्फपुर पेंशन के मामले में नंबर दो पर है। बिहार सरकार इनके पेंशन पर 59 करोड़ 33 लाख 30 हजार रुपये हर साल सलाना खर्च करती है।

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