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मुन्ना शुक्ला: DM की हत्या का आरोप लगा, जेल में बार बालाओं का डांस करा मचा दी सनसनी; JDU से विधायक रह चुके डॉन को नीतीश से फिर है उम्मीद

मुन्ना शुक्ला ने जेडीयू का साथ नहीं छोड़ा और कई मौकों पर नीतीश कुमार के सुशासन की तारीफ भी की।

munna shukla, nitish kumar, biharडॉन मुन्ना शुक्ला को नीतीश कुमार की पार्टी से टिकट मिलने की उम्मीद है।

बिहार में चुनाव का मौसम है लिहाजा सियासी पारा चरम पर है और सियासी बिसातें बिछाई जा रही हैं। हाजीपुर के लालगंज विधानसभा सीट पर जदयू का टिकट पाने के लिए मुन्ना शुक्ला एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। इस चुनाव में इस सीट की अपनी अहमियत है लेकिन आज बात हम इस सीट के गणित की नहीं बल्कि उस मुन्ना शुक्ला की करेंगे जिन्हें राज्य में डॉन, बाहुबली और दबंग जैसे कई अन्य उपनामों से भी जाना जाता है। यह वहीं मुन्ना शुक्ला हैं जो कभी लालू के नंबर वन दुश्मन और नीतीश के सबसे करीबी रह चुके हैं।

विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला अंडरवर्लड डॉन से लेकर विधायक तक का सफर तय कर चुके हैं। खास बात यह है कि मुन्ना नीतीश और रामविलास पासवान दोनों के ही करीबी रहे हैं और दोनों ही पार्टियों से विधायक बन चुके हैं। मुन्ना शुक्ला के राजनीतिक सफर के बारे में जानने के लिए आपको उनके जेल के सफर के बारे में जानना पड़ेगा क्योंकि इस डॉन ने जेल में रहते हुए अपने राजनीतिक कद को ना सिर्फ बढ़ाया बल्कि जेल ही चुनाव भी जीता।

मुजफ्फरपुर में वकील के तीसरे बेटे मुन्ना शुक्ला साल 1994 में अपने भाई छोटन शुक्ला की हत्या के बाद अपराध की दुनिया में उतरे। कहा जाता है कि डॉन बनने की चाहत में मुन्ना शुक्ला ने सीधे DM की हत्या करवा दी। आरोप लगा कि जब मुन्ना के भाई छोटन शुक्ला की शव यात्रा निकाली जा रही थी तब मुन्ना शुक्ला ने भीड़ को इस कदर उकसाया कि उसने गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी।

बात बड़े अफसर की हत्या से जुड़ी हुई थी और इस हत्याकांड ने बिहार में खलबली मचा दी। इस कांड के बाद मुन्ना बिहार में गुंडई का सबसे बड़ा चेहरा बन गया। साल 1994-98 में मुजफ्फरपुर इलाके के बाहुबली बृजबिहारी की पटना के आईजीआईएमएस संस्थान परिसर में गोलियों से भून कर हत्या कर दी गई। बृजबिहारी लालू-राबड़ी के बेहद करीबी माने जाते थे और उनकी सरकार में मंत्री भी थे।

इस हत्याकांड ने मुन्ना शुक्ला को और भी मशहूर कर दिया लेकिन लालू का नंबर वन दुश्मन भी बना दिया। निचली अदालत ने इस मामले में मुन्ना को उम्रकैद की सजा सुनाई लेकिन पटना हाईकोर्ट ने साल 2014 में मुन्ना शुक्ला को बरी कर दिया और वो फिलहाल जमानत पर हैं।

साल 1999 में मुन्ना शुक्ला ने निर्दलीय विधानसभा चुनाव सबसे पहली बार लड़ा था लेकिन हार मिली थी। इसके बाद साल 2002 में जेल ही उसने निर्दलीय चुनाव लड़ा और फिर जीत हासिल की। इसके बाद साल 2005 के चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर और बाद में मध्यावधि चुनाव में जेडीयू के टिकट पर विधायक बने।

इसके बाद से मुन्ना शुक्ला ने जेडीयू का साथ नहीं छोड़ा और कई मौकों पर नीतीश कुमार के सुशासन की तारीफ भी की। साल 2009 में जेडीयू ने आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के खिलाफ मुन्ना शुक्ला को वैशाली लोकसभा सीट से उतारा लेकिन शुक्ला को हार मिली।

साल 2012 में मुन्ना शुक्ला पर आरोप लगे थे कि उसने जेल में रहते हुए इंजीनियरिंग कॉलेज के डायरेक्टर से 2 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी थी। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद मुन्ना के सेल से छापेमारी में फोन भी बरामद हुए थे।

जेल में रहने के दौरान मुन्ना शुक्ला पर बाल बालाओं के डांस कराने के भी आरोप लगे जिसकी तस्वीरें भी अखबार में छपी थीं। मुन्ना शुक्ला ने साल 2010 में अपनी पत्नी अन्नु शुक्ला को लालगंज सीट से जेडीयू का टिकट दिलवाया और वे विजयी रहीं। इस बार मुन्ना लालगंज सीट से पर नीतीश कुमार से टिकट पाने की तमन्ना रखते हैं।

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