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Bihar Election 2020: चुनाव हारे तो विरोधी को बम से उड़ाया! कभी लालू तो कभी नीतीश के करीबी रहे बाहुबली प्रभुनाथ सिंह

प्रभुनाथ सिंह हजारीबाग की जेल में बंद हैं। प्रभुनाथ सिंह पर हत्या, अपहरण, धमकी देने, मारपीट करने समेत 35 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज हैं।

bihar, bihar election, lalu prasad yadav, nitish kumarबाहुबली की छवि रखने वाले यह नेता अभी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।

बिहार में सभी सियासी दल इस वक्त विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। राज्य में चुनावी माहौल के बीच आज बात बिहार के उस शख्स कि जिसने चुनाव हारने के बाद अपने विरोधी को बम से उड़ा दिया। जी हां, सिवान जिले के महाराजगंज सीट के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह की छवि बिहार में कभी बाहुबली नेता की रही है। सीमेंट कारोबारी से राजनीति में आए प्रभुनाथ सिंह साल 1995 में जब अपने ही एक शागिर्द अशोक सिंह के हाथों विधानसभा चुनाव हारे तो यह शिकस्त उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ।

विधायक को बम से उड़ाया: कहा जाता है कि 3 जुलाई 1995 की शाम करीब 7.20 मिनट पर विधायक अशोक सिंह की पटना में उनके आवास पर बम मारकर हत्या कर दी गई। इस सनसनीखेज हत्याकांड में प्रभुनाथ सिंह और उनके भाई दीनानाथ सिंह को सीधा आरोपी बनाया गया। बाद में इस मामले में प्रभुनाथ सिंह को दोषी भी करार दिया गया और फिलहाल वो इसी मामले में जेल की हवा खा रहे हैं।

35 से ज्यादा संगीन मामले हैं दर्ज: हालांकि यह पहला मौका नहीं था जब प्रभुनाथ सिंह पर हत्या के आरोप लगे थे। विधायक बनने से पहले प्रभुनाथ सिंह का नाम मशरक के पूर्व विधायक रामदेव सिंह काका की हत्या में भी आय़ा। हालांकि बाद में अदालत ने इस मामले में उन्हें बरी कर दिया था। फिलहाल प्रभुनाथ सिंह हजारीबाग की जेल में बंद हैं उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली थी। प्रभुनाथ सिंह पर हत्या, अपहरण, धमकी देने, मारपीट करने समेत 35 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज हैं।

लालू, नीतीश सभी के करीबी: बिहार में बाहुबली की छवि रखने वाले प्रभुनाथ सिंह भले ही अभी जेल में बंद हैं लेकिन राजनीति में उनका रसूख काफी ऊंचा रहा है। कभी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव तो कभी जेडीयू के मौजूदा सीएम नीतीश कुमार, प्रभुनाथ सिंह इन दोनों ही नेताओं की राजनीति में अपने लिए जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। कहा जाता है कि प्रभुनाथ सिंह की लोकप्रियता इतनी है कि उनके लिए किसी भी पार्टी का टिकट हासिल करना कोई बड़ी बात नहीं है।

ऐसा है सियासी सफर: कारोबारी रह चुके प्रभुनाथ सिंह ने साल 1985 में राजनीति में कदम रखा। सारण के मशरख विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल कर प्रभुनाथ सिंह ने राज्य के बड़े नेताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। अगले विधानसभा चुनाव में भी प्रभुनाथ सिंह ने जीत हासिल की। हालांकि साल इसके बाद साल 1995 में वो जीत की हैट्रिक नहीं लगा सके। हालांकि इस हार से प्रभुनाथ सिंह की राजनीतिक ठसक में कोई कमी नहीं आई। विधायकी का चुनाव हारने के बाद वो लोकसभा तक पहुंच गए।

समता पार्टी से टिकट हासिल कर 1998 में उन्होंने महाराजगंज लोकसभा सीट से जीत हासिल की। 2004 में जदयू के टिकट पर विजयी पताखा लहराया। हालांकि साल 2009 के लोकसभा चुनाव में राजद के उमाशंकर सिंह ने इन्हें हरा दिया। इसके बाद साल 2012 में महाराजगंज सांसद उमाशंकर सिंह का निधन हो गया और फिर उपचुनाव होने वाला था।

साल 2012 में प्रभुनाथ सिंह जेडीयू से अलग होकर आरजेडी में शामिल हो गए। 2013 में महाराजगंज लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में आरजेडी के टिकट पर प्रभुनाथ सिंह को जीत मिली हालांकि लेकिन 2014 के चुनाव में प्रभुनाथ सिंह को फिर शिकस्त झेलनी पड़ी। 12वीं पास प्रभुनाथ सिंह के भाई, प्रभुनाथ सिंह के बेटे रणधीर सिंह, उनके जीजा गौतम सिंह और समधी विनय सिंह यह सभी राजनेता हैं।

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