बिहार के उस डॉन की कहानी, जो नक्सली कमांडर को मारकर बन गया था माफिया, सिरफिरे नाबालिगों ने खुलेआम कोर्ट में की थी हत्या

बिहार के सबसे बड़े डॉन संतोष झा ने जिस तरह से अपने ही गुरु की हत्या कर क्राइम का बादशाह बना था, उसी तरह से उसकी हत्या भी हुई। कोर्ट परिसर के अंदर ही नाबालिग बदमाशों ने गोलियों से उसे भून दिया था।

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बिहार का सबसे बड़ा माफिया संतोष झा (फाइल फोटो)

बिहार के चर्चित डॉन संतोष झा (Gangster Santosh Jha) की कहानी दोस्ती और धोखे से शुरू हुई थी और मौत भी इसी कारण हुई। एक समय नक्सली रहे वाला संतोष झा ने जब खुद का गैंग बनाया तो उसने अपने ही गुरु और उनकी पत्नी का कत्ल कर दिया था।

संतोष झा की हत्या का आरोप उसके अपने ही एक पूर्व साथी मुकेश पाठक पर लगा था। संतोष की हत्या अगस्त 2018 को उस समय कर दी गई थी जब उसे सीतामढ़ी कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया था। यहां पर कुछ नाबलिग बदमाशों ने सतोष को गोलियों से भून दिया था।

जब संतोष झा (Gangster Santosh Jha) को कोर्ट के बाहर लाया जा रहा था, तभी मोटरसाइकिल पर सवार तीन हमलावरों ने उस पर गोलियां चला दी थीं और फरार हो गए थे। संतोष को तुरंत अस्पताल ले गए जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस हमले में अदालत का एक कर्मचारी भी घायल हो गया था।

कौन था संतोष झा

बिहार के शिवहर में पैदा हुए संतोष झा ने आपराधिक जीवन की शुरूआत नक्सली कमांडर गौरी शंकर झा के साथ की। गौरी शंकर का उस समय इलाके में वर्चस्व था और संतोष ने उसी का शागिर्द बनकर वारदात को अंजाम देना शुरू किया था। एक मामले में उसे पटना में गिरफ्तार कर लिया गया था जिसकी वजह से उसे तीन साल तक जेल में रहना पड़ा था। जेल से निकलने के बाद वह दोबारा गौरी शंकर के साथ जुड़ गया था।

गुरु को मारा

जेल से वापसी के बाद ये जोड़ी ज्यादा दिनों तक चली नहीं और 2010 में दोनों के रास्ते अलग हो गए। संतोष ने अपना अलग गैंग बना लिया, लेकिन एक ही इलाके में दो गैंग होने से गुरु-चेले के बीच अदावत बढ़ गई। एक दिन मौका देखते ही संतोष ने गौरी शंकर और उसकी पत्नी की हत्या कर दी। इसके बाद इलाके में संतोष झा का वर्चस्व बन गया था।

उसका क्राइम रिकॉर्ड ऐसा था कि सिर्फ उत्तरी बिहार के जिलों में ही संतोष (Gangster Santosh Jha) पर 36 मामले दर्ज थे। इसके बाद भी संतोष झा नहीं रुका और पूरे बिहार में क्राइम को अंजाम देने लगा था। 2014 में संतोष झा को बिहार एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया। जेल में रहते हुए संतोष झा ने रंगदारी नहीं मिलने पर दो इंजीनियरों की हत्या करवा दी। हत्या का आरोप लगा संतोष झा के खास मुकेश पाठक पर। संतोष झा का गैंग चलाने का अपना तरीका था। वो अपने गिरोह में लोगों को योग्यता के हिसाब से सैलरी देता था।

फिर दोहराई कहानी

कुछ दिनों बाद मुकेश पाठक भी गिरफ्तार हो गया और दोनों को उम्रकैद की सजा हुई। यहीं से संतोष झा और मुकेश पाठक के रास्ते अलग होने लगे। एक बार फिर दो गैंग बने। एक मुकेश का और दूसरा संतोष का। अदावत बढ़ने लगी तो फिर से वही हुआ जो एक बार पहले हो चुका था। पिछली बार संतोष ने अपने गुरु को रास्ते से हटाया था और इस बार संतोष के चेले ने अपने गुरु को रास्ते से हटा दिया।

जिन नाबालिगों ने संतोष झा (Gangster Santosh Jha) की हत्या की थी, उनमें से एक रिमांड होम में बंद था। संतोष झा की हत्या करने के लिए आरोपी ने भाई की बीमारी का बहाना बनाकर रिमांड होम से छुट्टी ली थी।

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