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दबंग ददन पहलवान: जिनके इलाके में नीतीश कुमार पर हुआ हमला, लालू, मुलायम, मायावती के भी रहे करीबी; निर्दलीय प्रत्याशी पर हैं 22 केस

12वीं पास ददन यादव ने चुनावी हलफनामे में बताया है कि उनपर हत्या की कोशिश, चोरी, धार्मिक भावनाएं भड़काने, रंगदारी, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, दंगा फैलाने समेत कुल 22 मामले दर्ज हैं।

bihar, bihar chunav 2020ददन पहलवान मुलायम, बसपा और लालू के भी करीबी रहे।

बिहार विधानसभा के चुनाव में कई बाहुबली अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। आज हम बात कर रहे हैं पहलवान से नेता बने ददन यादव की। ददन यादव बक्सर के डुमरांव से निर्दलीय प्रत्याशी हैं। दरसअल इससे पहले वो जदयू में थे और विधायक भी थे लेकिन पार्टी ने ऐन चुनाव से पहले अपने कुछ नेताओं पर कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निकाल दिया था इसमें ददन पहलवान भी शामिल थे। टिकट ना मिलने पर ददन पहलवान निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं। ददन यादव पहलवान कैसे बने और कैसा रहा उनका राजनीति सफर? यह हम आपको आगे बताएंगे। लेकिन सबसे पहले आप यह जान लीजिए कि ददन पहलवान पर कितने आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

12वीं पास ददन यादव ने चुनावी हलफनामे में बताया है कि उनपर हत्या की कोशिश, चोरी, धार्मिक भावनाएं भड़काने, रंगदारी, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, दंगा फैलाने समेत कुल 22 मामले दर्ज हैं। साल 2005 में चुनाव खत्म होने के बाद ददन पहलवान पर आरोप लगे कि उन्होंने एक राजनीतिक कार्यकर्ता की पिटाई कर दी है। इस मामले में वो जेल भी गए। ददन यादव उर्फ ददन पहलवान के बेट करतार सिंह ने सत्यवीर एग्रो के नाम पर बैंक से लोन लिया था। इसमें ददन पहलवान गारंटर बने थे। बाद में ददन पहलवान बैंक डिफॉल्टर तक घोषित हो गए।

प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिग और आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन पर शिकंजा कसते हुए उनकी सभी अचल संपत्ति पर पहरा बिठा दिया है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत उनकी तथा उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की खरीद बिक्री तथा हस्तांतरण पर रोक लगा दी है। ददन पहलवान की छवि एक बाहुबली शख्स की है। जब नीतीश कुमार 2018 में समीक्षा यात्रा के दौरान डुमरवां में थें तब उनपर हमला हो गया था और उनपर पत्थरबाजी हुई थी।

ऐसा रहा राजनीतिक सफर

कहा जाता है कि ददन पहलवान साल 1994 से राजनीति में आए। हालांकि उस वक्त उन्होंने किसी भी राजनीतिक पार्टी को ज्वायन नहीं किया था। साल 1995 के चुनाव में वो निर्दलीय चुनावी मैदान में कूद पड़े। हालांकि वो चुनाव हार गए। इसके बाद साल 2000 में ददन पहलवान ने फिर किस्मत आजमाई और इस बार उन्होंने आखिरकार विरोधियों को चित कर दिया। इस जीत के साथ ही ददन पहलान लालू प्रसाद यादव के इतने करीबी बन गए कि लालू राज में उन्हें वित्त वाणिज्य कर राज्य मंत्री का प्रभार भी सौंपा भी गया। राजनीति में ददन पहलवान की खासियत यह रही कि वो लालू, नीतीश और यहां तक कि यूपी की सियासत के धुरंधर मुलायम यादव और मायावती तक के नजदीक रहे। ददन पहलवान लोकसभा चुनाव में भी किस्मत आजमा चुके हैं।

ऐसे बने पहलवान
ददन पुलिस की नौकरी के लिए चुने गए थे पर उन्होंने यह नौकरी नहीं की। उन्होंने 1988 में प्राथमिक विद्यालय बिस्वा जिला बक्सर के अध्यापक पद पर काम किया। चुनाव लड़ने को लेकर ददन पहलवान ने दिनांक 8 दिसंबर 1994 क़ो डीएम के पास जाकर अध्यापक कार्य के पद से अपना त्यागपत्र सौप दिया था। जब वह आठ-नौ वर्ष के थे, तभी से उन्होंने खेत में पिता के साथ हाथ बंटाना आरंभ कर दिया था, बचपन से ही उनको पहलवानी करने में रूचि हो गई, तभी से लोग इनको ददन पहलवान के नाम से भी जानने लगे और उनके सपनों की शुरुआत हुई। कई जगहों पर ददन पहलावन अखाड़े में हाथ आजमाते रहे। कई जगहों पर दंगल प्रतियोगिता थी कराते रहे।

ददन पहलान घोड़े और हेलीकॉप्टर के भी शौकीन है। 2014 के लोकसभा चुनाव में ददन ने हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया था। उनके बेटे भी पिता की ही तरह हेलीकॉप्टर के शौकीन हैं।

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