कैद से आजाद होते ही बोला जेल भेजने वाली जज के घर धावा- जानिए महिला जज की खौफनाक आपबीती

तालिबान के डर से अफगानिस्तान छोड़ कर यूरोप पहुंचे वाली महिला जज ने बताया कि वहां उसकी और उसके जैसी जजों को जान का सीधा खतरा है। महिला जज को वो लड़ाके खोजते हुए उनके घर पहुंच गए थे, जिन्हें कभी उन्होंने सजा सुनाई थी।

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काबुल में एयरपोर्ट के बाहर पेट्रोलिंग करते तालिबानी लड़ाके (फोटो- रॉयटर्स)

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से उन लोगों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है, जो कभी इसके खिलाफ लड़ाई में किसी ना किसी रूप से शामिल थे। एक के बाद एक तालिबानी लड़ाकों की दरिंदगी की कहानी सामने आ रही है।

ऐसे ही एक महिला जज, जब यूरोप पहुंची तो उसने अपने अनुभव रॉयटर्स के साथ साझा किए। महिला ने कहा कि तालिबान के चार से पांच लड़ाके उसके घर पहुंचे थे और उसके बारे में पूछ रहे थे। ये वो लड़ाके थे जिन्हें कभी महिला जज ने सजी सुनाई थी। महिला जज ने बताया कि तालिबान ने कैदियों को रिहा कर दिया है। ये कैदी जजों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं खासकर महिला जजों के।

अफगानिस्तान में महिला जज हमेशा से निशाने पर रही हैं। जनवरी में अज्ञात बंदूकधारियों ने सुप्रीम कोर्ट की दो महिला न्यायाधीशों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। तब तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा था कि उसका समूह इस मामले में शामिल नहीं है।

महिला जज ने बताया कि उन्होंने अफगानिस्तान में मौजूद अन्य जजों से बात की है, सभी की जिंदगी खतरे में हैं। अगर उन्हें निकाला नहीं गया तो उनकी जिंदगी सीधे तौर पर खतरे में आ सकती है। महिला ने बताया कि वो अपने अंतर्राष्ट्रीय संघ में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विदेशी सहयोगियों के एक समूह की मदद से अफगानिस्तान से निकल पाई है।

एक अफगान मानवाधिकार कार्यकर्ता होरिया मोसादिक ने कहा कि जजों के अलावा लगभग एक हजार अन्य महिला, जो मानवाधिकार के लिए काम कर रही हैं, तालिबान के निशाने पर हो सकती है।

ब्रिटिश के न्याय मंत्री रॉबर्ट बकलैंड ने कहा कि पिछले हफ्ते लंदन ने नौ महिला न्यायाधीशों को निकाला था। इनमें से कई न्यायाधीशों कानून के नियमों को बनाने और उसे लागू करवाने में शामिल रहे हैं। ये काफी हद तक उन परिणामों से भयभीत हैं, जो अब तालिबान के उदय के साथ इनके सामने आ सकती है।

अफगानिस्तान में करीब 250 महिला जज हैं। कुछ हाल के हफ्तों में देश से भागने में सफल रही हैं, लेकिन अधिकांश अभी भी अफगानिस्तान में ही रह रही हैं और अभी भी बाहर निकलने की कोशिश में जुटी हैं।

इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ वुमेन जजेस, अफगानिस्तान से जजों को निकालने में लगा हुआ है। इसमें छह विदेशी न्यायाधीशों की एक टीम सूचनाएं जुटा रही है, सरकारों से बात कर रही है और महिला जजों की सुरक्षित तरीके से अफगानिस्तान से निकालने की व्यवस्था कर रही है।

इससे पहले भी तालिबान पर कलाकरों, पूर्व पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ कई पूर्व राजनेताओं को धमकाने और मारने का आरोप लग चुका है। इससे संबंधित कई वीडियो भी वायरल हो चुके हैं। पूर्व सरकारों में शामिल नेता, अधिकारी, जज समेत हजारों लोग तालिबान से जान बचाने के लिए अबतक अफगानिस्तान छोड़ चुके हैं।

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