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फोन-लैपटॉप और कम्प्यूटर में बच्चों के पॉर्न वीडियो रखे तो होगी 5 साल की जेल, अब तक 6 गिरफ्तार

सोशल मीडिया पर बच्चों के अश्लील वीडियो देखने या उन्हें शेयर करने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की साइबर सेल सख्ती से नजर रख रही है। पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक 61 साल का बुजुर्ग भी है।

अश्लील वीडियो बनाने और शेयर करने वालों के खिलाफ कार्रवाई (फोटो सोर्स – इंडियन एक्सप्रेस)

सोशल मीडिया पर बच्चों के अश्लील वीडियो देखने या उन्हें शेयर करने वालों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की साइबर सेल सख्ती से नजर रख रही है। पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक 61 साल का बुजुर्ग भी है। दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट के मुताबिक इनकी गिरफ्तारी दो दिन पहले हुई है। ये लोग काफी समय से सोशल मीडिया पर इस तरह के वीडियो शेयर कर रहे थे। पुलिस को काफी समय से इस तरह की हरकतें करने वालों की शिकायतें मिल रही थी।

पुलिस ने कहा हो सकती है पांच साल की सजा : पुलिस का कहना है कि मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर में बच्चों के अश्लील वीडियो से जुड़े कंटेंट रखने या उन्हें किसी सोशल साइट्स पर शेयर करने पर 5 साल तक की सजा हो सकती है। इस तरह की सजा का प्रावधान सन 2000 में बने आईटी एक्ट की धारा 67 बी में भी है। पिछले साल बने गृह मंत्रालय के पोर्टल में इसको लेकर काफी असर दिखा है।

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पोर्टल पर सीधे शिकायतें की जा सकती हैं : इसमें सभी राज्यों के पुलिस अफसर को नोडल अफसर बनाया गया है। दिल्ली में गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम नोडल ऑफिसर अन्येश रॉय हैं, जो कि दिल्ली पुलिस में साइबर क्राइम यूनिट के डीसीपी हैं। गृह मंत्रालय के इस पोर्टल पर चाइल्ड पॉर्नोग्राफी, रेप या गैंगरेप से जुड़े कंटेंट सोशल मीडिया पर शेयर करने वालों के खिलाफ शिकायतें की जाती हैं। इस पोर्टल का मकसद इस तरह के वीडियो और तस्वीरों पर रोक लगाना है।

शिकायतों पर पुलिस करेगी कार्रवाई : पुलिस के मुताबिक कोई भी व्यक्ति इस तरह की शिकायतें सीधे पोर्टल पर कर सकता है। इसमें दो ऑप्शन हैं। इसमें अपनी पहचान भी छिपाई जा सकती है। चाइल्ड एब्यूजिव, रेप या गैंगरेप की कैटेगरी भरने के बाद नाम-पता बताना होता है। यह गुप्त रखा जाएगा। उसके बाद जिस शख्स के मोबाइल नंबर या यूनिट रिसोर्स लोकेटर (यूआरएल) के खिलाफ शिकायत करनी है, उसकी जानकारी भरनी होती है। यह शिकायत आप जिस राज्य की है वहां की नोडल एजेंसी को भेज दी जाती है। शिकायत को वेरीफाई करने के बाद संबंधित पुलिस कार्रवाई करेगी।

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